रवि किशन का मनोज तिवारी पर करारा वार— “मैंने ही उन्हें चलना और संसद में बोलना सिखाया”
राजनीति की पिच हो या बड़े पर्दे का रोमांच, जब भी भोजपुरी के दो शेर—रवि किशन और मनोज तिवारी एक साथ होते हैं, तो धमाका होना लाज़मी है। ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के लेटेस्ट एपिसोड में कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला। रवि किशन ने नेशनल टेलीविज़न पर मनोज तिवारी को अपना ‘जूनियर’ बताते हुए उनकी ऐसी खिंचाई की कि कपिल शर्मा भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। लेकिन रुकिए, ये कोई कड़वाहट वाली जंग नहीं, बल्कि उस पुराने और गहरे याराने का हिस्सा है जहाँ एक-दूसरे की टांग खींचना ही दोस्ती का असली सबूत माना जाता है।
कपिल शर्मा के शो में इस बार महफिल सजी थी बॉलीवुड डीवा मलाइका अरोड़ा, ओरी और भोजपुरी के ‘पावर हाउस’ रवि किशन के साथ। लेकिन सारी लाइमलाइट तब खिंच गई जब रवि किशन ने अपने पुराने दोस्त और सांसद साथी मनोज तिवारी पर निशाना साधा। दरअसल, कुछ वक्त पहले मनोज तिवारी ने इसी मंच पर दावा किया था कि रवि किशन को राजनीति में लाने वाले वही हैं। बस, फिर क्या था! रवि किशन ने इसका हिसाब चुकता करते हुए कहा— “ये वो लोग हैं जो कभी गांव में भजन गाते थे। मनोज मेरे जूनियर हैं। पहली बार फिल्म ‘सैंया हमार’ मैंने ही की थी, ये लोग तो बहुत बाद में आए। सच कहूं तो इन्हे चलना भी मैंने ही सिखाया है।“
रवि किशन ने मनोज तिवारी की चुटकी लेते हुए उनके संघर्ष के दिनों का एक ऐसा राज़ खोला जिसे सुनकर दर्शक लोट-पोट हो गए। रवि ने सीधे कैमरे में देखते हुए कहा— ‘मनोज सुनो… बनारस घाट पर जब हम कन्यादान की शूटिंग कर रहे थें, तब तुमने पहली बार 35mm का बड़ा कैमरा देखा था और तुम हैरान रह गए थे। मैंने ही तुम्हे मुंबई का रास्ता दिखाया, डायलॉग बोलना सिखाया और यहां तक संसद में जब पहली बार तुम्हारे पैर कांप रहे थे तो मैंने ही तुम्हे सहारा दिया।‘ रवि किशन का ये बेबाक अंदाज़ साफ़ बयां कर रहा था कि चाहे संसद हो या सिनेमा, वो खुद को बड़ा भाई साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते।
भले ही टीवी पर ये बातें ‘खरी-खोटी’ जैसी सुनाई दे रही हों, लेकिन असलियत में ये रवि किशन और मनोज तिवारी के उस दशकों पुराने याराने का हिस्सा है जिसे भोजपुरी इंडस्ट्री में ‘जय-वीरू’ की जोड़ी जैसा माना जाता है। दोनों के बीच ये मीठी नोकझोंक और ‘लिगेसी वॉर’ काफी पुरानी है। ये दोनों ही दिग्गज एक-दूसरे को अपना ‘बड़प्पन’ दिखाकर टांग खींचने का कोई मौका नहीं छोड़ते। कभी मनोज तिवारी उन्हें अपना चेला बताते हैं, तो कभी रवि किशन उन्हें अपना जूनियर करार देते हैं। लेकिन इस खींचतान के पीछे का सच ये है कि दोनों एक-दूसरे का बेहद सम्मान करते हैं और उनकी ये ‘पब्लिक राइवलरी’ असल में उनकी दोस्ती को और भी गहरा बनाती है।
