धुरंधर रिव्यू: रणवीर सिंह का ‘घातक’ अवतार, 3 घंटे 32 मिनट की ये फ़िल्म है पाकिस्तान अंडरवर्ल्ड का विस्फोटक सफ़र
बॉलीवुड के गलियारों में इस वक़्त सबसे बड़ा नाम है ‘धुरंधर’! डायरेक्टर आदित्य धर की ये बड़ी फ़िल्म आख़िरकार पर्दे पर आ चुकी है। 3 घंटे 32 मिनट की ये मेगा फ़िल्म इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि इसमें दिख रहा है रणवीर सिंह का सबसे खतरनाक अंदाज़, जिसका इंतज़ार सबको था। ‘धुरंधर’ एक हाई-वोल्टेज जासूसी थ्रिलर है, जो सीधे कराची के अंडरवर्ल्ड में घुसकर वार करती है।
फ़िल्म की कहानी की शुरुआत होती है एक बड़े राजनीतिक संकट से—दिसंबर 1999, जब कंधार हाईजैक के चलते आतंकियों को छोड़ने का फ़ैसला लिया गया था। इंटेलिजेंस ब्यूरो के ऑफिसर आर. माधवन यहीं से ‘प्रोजेक्ट धुरंधर’ शुरू करते हैं। इस प्रोजेक्ट का हीरो है जसकीरत सिंह रंगीली यानी रणवीर सिंह। उसका काम है हमज़ा अली मज़ारी बनकर पाकिस्तान के कराची में घुसना और ISI, गैंगस्टर वर्ल्ड के पूरे नेटवर्क को अंदर से तोड़ना। रणवीर सिंह यहां एकदम जंगली, अनियंत्रित और पूरी तरह बदले की आग में जलते नज़र आते हैं। उनका डायलॉग, “घायल हूँ इसलिए घातक हूँ,” उनकी परफॉर्मेंस की पूरी कहानी कह जाता है।
एक्टिंग की बात करें तो रणवीर सिंह ने पूरी फ़िल्म को अपने दम पर संभाला है। लेकिन उन्हें ज़बरदस्त सपोर्ट मिला है अक्षय खन्ना का, जो एक गैंगस्टर के रोल में कमाल के हैं। वहीं, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल (टॉर्चर सीन में) बेहद असरदार लगते हैं।फ़िल्म तकनीकी तौर पर भी बहुत स्ट्रॉन्ग है। शाश्वत सचदेव का बैकग्राउंड म्यूज़िक सीन में जान डाल देता है। पुराने हिट गाने जैसे ‘हवा हवा’ को कहानी के साथ जिस तरह से जोड़ा गया है, वो कमाल है। एक्शन सीक्वेंस बड़े और भव्य हैं, और कैमरा वर्क कराची के अंदरूनी इलाकों को बहुत ही रियल दिखाता है।
लेकिन, इतनी लंबी फ़िल्म में कुछ कमियाँ भी हैं। फ़िल्म का सेकंड हाफ़ थोड़ा भटकता हुआ लगता है और बीच-बीच में इसकी रफ़्तार धीमी हो जाती है। इसके अलावा, अगले साल आने वाले सीक्वल के कुछ सीन पहले ही ट्रेलर में दिखाने से थोड़ा सस्पेंस कम हुआ है। फिर भी, ‘धुरंधर’ जासूसी, एक्शन और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बनी एक पावरफुल, रोमांच से भरपूर फ़िल्म है। इसे बड़े पर्दे पर देखना एक ज़बरदस्त अनुभव है, जिसे आप मिस नहीं कर सकते।
