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हे प्रभु ! ‘सिस्टम’ डिरेल क्यों ? प्रियप्रकाश

रविवार को फिर से ट्रेन हादसा हुआ है । मध्य रेलवे के किउल-गया रेलखंड में हुए हादसे में 9 लोगों की जान चली गई है । हाल के दिनों में रेलवे में हादसों की संख्या में बढोतरी हुई है साथ ही ट्रेनों की लेटलतीफी भी जगजाहिर है। रेलवे की पूरी व्यवस्था पर आकलन कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार प्रियप्रकाश

हे प्रभु ! ‘सिस्टम’ डिरेल क्यों ?

प्रियप्रकाश

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्रेनों के विलंब से चलने पर रेल अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि या तो ट्रेनों को समय पर चलाना सुनिश्चित करें या फिर कड़ी कार्रवाई का सामना करें। रेल मंत्री ने जोनल हेड और बोर्ड सदस्यों से जिम्मेदारी उठाने की बात कही है और रात में वरिष्ठ अधिकारियों को ड्यूटी पर तैनात करने को कहा है । देखा जाए तो यह सही भी है,नवंबर 2016 से फरवरी के बीच करीब 15 हजार ट्रेनें लेट हुई है। इसके बाद भी यह सिलसिला जारी है । सर्दियों में ट्रेनों के विलंब होने पर कोहरे को बड़ी वजह माना जाता है लेकिन फरवरी के बाद भी ट्रेनों के लेट होने का सिलसिला कम नहीं हुआ है । अब भी मेल और एक्सप्रेस ट्रेन एक से चार घंटे की देरी से चल रही है।

रेल मंत्री रेलवे में सुधार की कई कोशिशें कर रहे हैं,साफ-सफाई और कनफर्म टिकट देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं और यात्री सुविधाओं में बढोतरी के लिहाज से नई ट्रेनों की शुरूआत भी हुई है लेकिन आज लगातार हो रहे है हादसे और विलंब से चल रही ट्रेनों के कारण आज हालत बद से बदतर होती जा रही है,इसमें रेल अधिकारियों का भी लापरवाही से इनकार नहीं किया जा सकता है । ट्रेनों की लेटलतीफी आज आम है,पैसेंजर ट्रेनों की बात तो दूर मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें भी घंटों देरी से चल रही है।हादसे में भी काफी बढोतरी हुई है । बीते एक साल में कम से कम 16 हादसे हो चुके हैं जिसमें करीब 200 लोगों की जानें जा चुकी है । इसी साल चार महीने में 7 हादसे हो चुके हैं जिसमें करीब 45 लोग जान गंवा चुके हैं जबकि इतने ही लोग घायल हुए हैं। 20 नवंबर 2016 को अकेले कानपुर में पटना-इंदौर एक्सप्रेस की दुर्घटना में 147 लोगों की जानें गई थी जबकि 200 लोग घायल हुए थे। इसी साल 22 जनवरी को जगदलपुर-भुवनेश्वर एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई जिसमें 27 लोगों की जान चली गई । पिछले 26 जुलाई 2016 को यूपी में ही स्कूल वैन और पैसेंजर ट्रेन की टक्कर में आठ बच्चों की जान चली गई । लगातार हो रहे ट्रेन हादसे के पीछे रेल मंत्री के साथ-साथ प्रधानमंत्री भी किसी साजिश की आशंका जता चुके हैं, खासकर कानपुर में हुए हादसे को लेकर प्रधानमंत्री ने भी साजिश की तरफ इशारा किया था । लेकिन क्या इन सभी हादसों के पीछे किसी साजिश हो सकती है ? कानपुर की घटना को छोड़ दें तो अभी तक बाकी किसी भी घटना के पीछे ऐसा प्रतीन नहीं होता है । कानपुर हादसे की जांच अभी चल रही है और इसको लेकर कुछ गिरफ्तारियां भी हुई है । लगातार हो रहे हादसे के पीछे अगर किसी की साजिश है तो इसका जल्द ही खुलासा होना चाहिए आखिर सीधे-सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ा ये महकमा है । इन दुर्घटनाओं के पीछे एक बड़ी वजह मानव रहित रेलवे फाटक का होना है । देश में अभी करीब 12 हजार मानव रहित फाटक हैं इसे खत्म करने का रेल मंत्री ने इस साल के बजट में 3000 रेलवे फाटक खत्म करने और 917 ओवरब्रिज बनाने की बात कही है । इस पर कितना काम हुआ या हो रहा है इसका अभी ठीक-ठीक पता नहीं चल पाया है।

ट्रेनों को समय पर चलाने की तरफ अब रेल मंत्री का ध्यान गया है । ट्रेनों के विलंब होने की कई वजह हो सकती है लेकिन रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार अक्षम चालकों की वजह से भी मेल,एक्सप्रेस और राजधानी-शताब्दी जैसी ट्रेनें लेट हो रही है। जानकार बताते हैं की कई चालक दो स्टेशनों के बीच रफ्तार कायम नहीं रख पा रहे हैं। एक्सप्रेस ,मेल ट्रेनों को 110 और राजधानी-शताब्दी ट्रेनों को 130 किलोमीटर की रफ्तार से चलानी चाहिए लेकिन तीव्र मोड़ और खराब ट्रेकों को छोड़कर खाली जगहों पर भी ड्राइवर फूल स्पीड में गाड़ी नहीं दौड़ा पाते । ऐसा सही समय पर ब्रेक नहीं लगाने के कारण हो रहा है जिस कारण ट्रेनें विलंब होती जा रही है । कायदे से लाइनें व्यस्त रहने पर ट्रेनों को स्टेशन पर रोके रहना चाहिए लेकिन प्लेटफार्म खाली करने के लिए ट्रेनों को रवाना कर दिया जाता है और फिर आगे सिग्नल पर घंटे भर रोक दी जा रही है जिससे भीषण गर्मी में यात्री परेशान हो रहे हैं । कई सेक्शन पर ट्रैक की क्षमता से 220 फीसदी तक ज्यादा ट्रेनों को चलाया जा रहा है । रेलवे के 17 जोनों में से 6 जोन ऐसे हैं जहां सबसे ज्यादा ट्रेन लेट होती है । खासकर दिल्ली-हावड़ा रूट पर सबसे ज्यादा प्रभावित है। इस रूट पर 55 फीसदी ट्रेनें लेट होती है । बीते दो साल से इस रूट पर पटरियों की मरम्मती और दोहरीकरण का काम चल रहा है लेकिन हालत अब भी नहीं सुधरे हैं ।

रेलवे यातायात का सबसे बड़ा नेटवर्क है हर रोज 23 मिलियन लोग रेल में सफर करते हैं । लेकिन रेलवे के परिचालन में दिक्कत और कर्मचारियों के काम-काज के तरीके भी सिस्टम को खराब करने में लगे हैं । इस पंक्ति के लेखक को कुछ माह पहले इन्हीं परिस्थितियों का सामना करना पड़ा । यहां उस घटना का जिक्र लाजिमी होगा । दिनांक 19-10-2016 को पटना से दिल्ली की यात्रा भयावह थी । मैं परिवार समेत पटना से दिल्ली की यात्रा पर था । स्लीपर क्लास की खराब हालत जगजाहिर है,वातानुकुलित क्लास में टिकट नहीं मिलने के कारण मुझे श्रमजीवी एक्सप्रेस {ट्रेन नं12391} में स्लीपर में सफर करना पड़ा । दानापुर स्टेशन पर जब मैं परिवार समेत ट्रेन में चढ़ा तो मेरे बर्थ पर 41 यात्री सफर करते मिले । कुल 4 बर्थ में 41 यात्री ? यह चौंकाने वाला दृश्य था ।

सभी लोग बेहद गरीब थे और उन्हें मुगलसराय तक जाना था । हैरत की बात है की बगैर टिकट के करीब 100 किलोमीटर तक यात्र कर चुके थे। मेरे पूछने पर कहा की टीटीई ने पैसे लिए थे । ट्रेन करीब चार घंटे पहले से ही विलंब चल रही थी। मैं उसी हालत में टीटीई का इंतजार करता रहा। पटना से आरा 60 किलोमीटर की यात्रा पूरा करने में डेढ़ घंटे का समय लग गया । आखिर आरा स्टेशन पहुंचने पर मेरे सब्र का बांध टूट गया । स्टेशन पर आरपीएफ जवान नजर आए और मैने पूरी जानकारी दी । यह भी कहा की इसकी जानकारी मैं मंत्रालय को दूंगा,इसपर वो लोग हरकत में आए और टीटीई को बुलाया । टीटीई ने रौब दिखाते हुए सभी को वहां से जेनरल बॉगी में भेजा । उन यात्रियों की हालत देखते हुए मुझे दुख भी हुआ । मैं सोचना रहा की उनसे पैसे लेकर भी खुद को फंसता देख कैसे ये रौब दिखा रहा है ।

देश में बुलेट ट्रेन चलाने पर काम तेजी से चल रहा है और रेल मंत्री जापान और कोरिया से विशेषज्ञों की टीम को बुला रहे हैं जो ट्रेनों के पटरी से उतरने की घटनाओं को रोकने के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी समाधानों की सिफारिश करेंगे । सभी यात्रियों को कंफर्म टिकट मिले इसके लिए तेजी से काम कर चल रहा है । ये सभी काम दूरगामी है, रेल यात्रियों की सुविधाओं में बढ़ोतरी करना है तो ट्रेनों के हादसे और लेटलतीफी को दूर करना ही होगा ।

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