बिहार की राजनीति की सबसे बड़ी तस्वीर! हत्या के आरोपी विधायक और प्रदेश के मुखिया का ये ‘अंदाज़’ बना चर्चा का विषय
बिहार की राजनीति में बाहुबली अनंत सिंह को ‘छोटे सरकार’ कहा जाता है। वो शख्स जो अपनी बेबाकी और ‘अकड़’ के लिए मशहूर है, आज जब विधानसभा की दहलीज पर झुका, तो हर कोई हैरान रह गया। दुलारचंद यादव हत्याकांड के आरोप में जेल में बंद अनंत सिंह ने शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैर छुए और हाथ जोड़कर उनके सामने ऐसे खड़े हुए मानो कोई पुराना ‘संकटमोचक’ अपने आका के पास वापस लौट आया हो।
मोकामा विधानसभा चुनाव के नतीजों के 51 दिन बाद आज वह पल आया जब अनंत सिंह ने विधायक पद की शपथ ली। कोर्ट की इजाजत के बाद वे जेल से कड़ी सुरक्षा में विधानसभा पहुंचे। चेहरे पर वही पुराना रसूख, बदन पर शानदार ब्लेजर और ललाट पर चमकता टीका। शपथ लेने के बाद जैसे ही अनंत सिंह सदन के बाहर निकले, उनका सामना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हुआ। फिर जो हुआ, उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। बाहुबली विधायक ने झुककर नीतीश कुमार के पैर छुए। नीतीश कुमार ने भी मुस्कुराते हुए हाथ उठाकर उन्हें आशीर्वाद दिया। करीब दो दशक पुराने रिश्ते की गर्माहट एक बार फिर सदन के गलियारों में महसूस की गई।
नीतीश और अनंत सिंह का रिश्ता 2004 के लोकसभा चुनाव से शुरू हुआ था, जब अनंत सिंह ने बाढ़ क्षेत्र में नीतीश कुमार के लिए ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाई थी। 2005 में सत्ता संभालते ही अनंत सिंह नीतीश के सबसे करीबी माने जाने लगे। हालांकि, 2015 में रिश्तों में ऐसी खटास आई कि अनंत सिंह जेडीयू से बाहर हो गए और नीतीश के सबसे बड़े विरोधी बनकर उभरे। लेकिन आज की तस्वीर ने बता दिया कि समय का पहिया घूम चुका है। ‘छोटे सरकार’ अब फिर से जेडीयू के सिपाही हैं और नीतीश कुमार उनके सर्वमान्य नेता।
शपथ भले ही हो गई हो, लेकिन कानूनी मुश्किलें अब भी बरकरार हैं। 30 अक्टूबर 2025 को जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के आरोप में अनंत सिंह जेल में हैं। कोर्ट ने फिलहाल उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। यही वजह है कि शपथ ग्रहण के चंद मिनटों बाद ही ‘छोटे सरकार’ को दोबारा पुलिस वैन में बैठकर बेऊर जेल लौटना पड़ा। लेकिन समर्थकों में चर्चा इस बात की है कि जो विधायक मुख्यमंत्री के चरणों में है, उसे भला कब तक सलाखों के पीछे रखा जा सकता है।
राजनीति में तस्वीरों का अपना मतलब होता है। एक तरफ हत्या जैसा संगीन आरोप और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का आशीर्वाद—ये समीकरण बिहार की राजनीति में क्या रंग लाएगा, ये आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन इतना तो तय है कि अनंत सिंह के इस कदम ने विपक्ष को हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है और समर्थकों को एक नई उम्मीद।
