जदयू की सदस्यता लेने के बाद बदले अंदाज में दिखे निशांत, युवाओं को किया प्रेरित
नालंदा: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद अब सबकी निगाहें उनके बेटे निशांत कुमार पर टिकी हैं। राजनीति की चकाचौंध से दूर रहने वाले निशांत अब न केवल सक्रिय हो गए हैं, बल्कि अपने पैतृक गांव कल्याणबीघा में युवाओं के बीच जाकर एक नया विजन भी पेश कर रहे हैं। नालंदा के इंडोर शूटिंग रेंज में निशांत ने जिस तरह ‘निशाना’ साधा, उसने विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
नालंदा जिले का कल्याणबीघा गांव… यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पैतृक निवास है। जदयू की सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार यहाँ के इंडोर शूटिंग रेंज पहुंचे। सादगी के लिए पहचाने जाने वाले निशांत ने यहाँ न केवल खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया, बल्कि खुद भी निशानेबाजी का अभ्यास किया। राष्ट्रीय स्तर के युवा खिलाड़ियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की प्रतिभा को दुनिया भर में नाम रोशन करना है। युवाओं के साथ उनका यह सहज संवाद बता रहा था कि वे अब ‘ग्राउंड जीरो’ पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
निशांत कुमार पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और अब तक उन्होंने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग रखा था। लेकिन हाल ही में जब पिता नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया, तो निशांत ने भी पार्टी की कमान संभालने की दिशा में कदम बढ़ा दिए। जदयू में शामिल होने के बाद उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका मकसद संगठन को मजबूत करना और युवाओं के साथ संवाद बढ़ाना है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 10 अप्रैल के बाद बिहार की नई सरकार में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, और उनकी ये सक्रियता उसी की ‘वॉर्म-अप’ एक्सरसाइज मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निशांत कुमार की एंट्री नीतीश कुमार का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है। जहाँ एक तरफ नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, वहीं निशांत के ज़रिए वे पार्टी के युवा वोट बैंक और कार्यकर्ताओं के भरोसे को बनाए रखना चाहते हैं। कल्याणबीघा की शूटिंग रेंज से लेकर कार्यकर्ताओं के बीच तक, निशांत का हर कदम यह संदेश दे रहा है कि जदयू में अब ‘युवा नेतृत्व’ की नई पौध तैयार है। फिलहाल, निशानेबाजी का ये अभ्यास बिहार की भविष्य की राजनीति के लिए कितना सटीक बैठता है, ये तो वक्त ही बताएगा।
निशांत कुमार की ये सक्रियता बता रही है कि आने वाले दिनों में बिहार की सत्ता के समीकरण बदलने वाले हैं। अब सवाल यह है की क्या सादगी से शुरू हुआ ये सफर बिहार के ‘डिप्टी सीएम’ की कुर्सी तक जा जाएगा?
