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अल्पसंख्यक आयोग व अल्पसंख्यक मंत्रालय को समाप्त करो- विश्व हिन्दू परिषद

बोल बिंदास, गुजरात. विश्व हिंदू परिषद की प्रबंध समिति ने एक प्रस्ताव पारित कर  अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले अल्पसंख्यक आयोग व अल्पसंख्यक मंत्रालय को समाप्त करने की मांग सरकार के सामने रखी है.


विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति का यह स्पष्ट अभिमत है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अलगाववादियों के एजेंडे को लागू करके मुस्लिम व ईसाई कट्टरपंथियों में अलगाव के भाव को मजबूत कर रहा है और अपने कार्यकलापों से बहुसंख्यक हिन्दू समाज को अपमानित एवं आरोपित कर रहा है। कथित अल्पसंख्यक समाज के लिए एक हैल्पलाइन नं. जारी करने के निर्णय की जानकारी देते समय यह कहा गया कि अगर अल्पसंख्यकों को कोई सता रहा है तो वे तुरंत इस पर फोन करें। यह सर्वविदित तथ्य है कि भारत में जब भी कोई सरकार या संस्था अल्पसंख्यकों के लिए कोई योजना लाती है तो इनका अभिप्राय केवल मुस्लिम व ईसाई समाज से ही होता है। इस घोषणा से यह प्रकट होता है कि भारत में मुस्लिम व ईसाई समाज को मानों इतना सताया जा रहा है कि इस कदम की जरुरत पड़ गयी। पाकिस्तान और अलगाववादी इसी तर्क का प्रयोग कर अपनी भारत विरोधी कार्यवाही को उचित ठहराते हैं। अब उनको एक और वकील मिल गया है। सम्पूर्ण विश्व का घटनाचक्र इस बात का सबूत है कि मुसलमानों को जितने अधिकार भारत में हैं उतने किसी मुस्लिम देश में भी नहीं हैं। इसके बावजूद जेहादी तत्व हमेशा असंतोष पैदा करके वैमनस्य बढ़ाते रहते हैं। अल्पसंख्यक आयोग भी इस काम को करके अल्पसंख्यकवाद और अलगाववाद को मजबूत कर रहा है।

आयोग की इस पहल के कारण कुछ ईसाई मिशनरियों ने भी हेल्प लाईन नम्बर जारी कर ईसाइयों पर होनेवाले तथाकथित हमलों की सूचना देने के लिए कहा है। जबकि अब तक दुष्प्रचारित तथाकथित हमले असत्य ही सिद्ध हुए हैं। इस दुष्प्रचार में उनका हिन्दुविरोधी राजनैतिक एजेण्डा भी रहता है। न्यायिक एवं पुलिस जांच में ये सभी प्रचारित आरोप असत्य ही पाए जाते हैं। अल्पसंख्यकवाद को प्रोत्साहन देने की इस प्रवृृत्ति के कारण ईसाई मिशनरी भी अपने आपको पीड़ित दिखाकर आक्रामक होते हैं और अपने देशविरोधी कृृत्यों को निर्बाध रूप से लागू करने का प्रयास करते हैं।


मा. सर्वोच्च न्यायालय ने 2005 में एक मामले में इनसे अपेक्षा की थी कि देशघाती अल्पसंख्यकवाद को समाप्त करने के लिए अल्पसंख्यक आयोग को पहल करनी चाहिए। परन्तु, इसके विपरीत अल्पसंख्यकवाद को प्रोत्साहन देकर वे विभाजनकारी प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके इस कृृत्य के कारण अपने आपको पीड़ित दिखाकर जेहादी व मिशनरी अपने लिए सहानुभूति अर्जित करना चाहते हैं जिससे वे अपने षड़यन्त्रों को स्वतंत्रतापूर्वक क्रियान्वित कर सकें। इसी कारण कुछ स्वार्थी और अदूरदर्शी नेता सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करने वालों को स्वतंत्रता सेनानी तक बताने का देशद्रोह पूर्ण काम कर बैठते हैं।

विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति अल्पसंख्यक आयोग से यह जानना चाहती है कि भारत में जेहादी व ईसाई मिशनरी पीड़ित हैं या अत्याचारी ? इस पर इनको एक विस्तृत बयान जारी करना चाहिए। विहिप उनको इस विषय पर खुली बहस की चुनौती देती है। जिस समय वे हेल्पलाइन की सूचना दे रहे थे उसी समय बिजनौर में कुछ मुस्लिम गुंडे हिन्दू लड़कियों के साथ छेड़खानी कर रहे थे। उन्हें रोकने पर उनके साथियों ने आकर हिन्दू समाज पर हमला बोल दिया। लव जेहाद के नाम पर हिन्दू लड़कियों को भगाने की घटनाएं भारत के सभी प्रांतों में उजागर हो रही हैं। सहारनपुर की घटना ने यह सिद्ध कर दिया है कि जेहादियों के लिए प्रत्येक हिन्दू काफिर है चाहे वह किसी भी जाति का हो। डाॅ0 अम्बेडकर की जन्मतिथि पर दलितों की शोभायात्रा पर हमला करना उनकी इसी मानसिकता को दर्शाता है। क्रिकेट में पाकिस्तान द्वारा भारत को हराने पर कश्मीर घाटी, बंगाल, उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान तथा अन्य कई प्रांतों के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में पाकिस्तान के झंडे लहराए गए तथा हिन्दू समाज पर हमले किये गए। ऐसे कई स्थानों पर हिन्दू समाज पर बार-बार हमले किए जाते हैं। यह सर्वविदित है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ही अधिकांश साम्प्रदायिक दंगे होते हैं। हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के कारण कई स्थानों से हिन्दुओं को पलायन करना पड़ा है।
अल्पसंख्यक आयोग को यह स्मरण रखना चाहिए कि भारत में जेहादी व ईसाई मिशनरी अन्य अल्पसंख्यकों पर भी बर्बर अत्याचार करते हैं। पूर्वोत्तर में बौद्धों व पंजाब में सिखों का धर्मान्तरण करके उनको समाप्त करने का षड़यन्त्र चर्च द्वारा ही किया जाता है। इसी प्रकार लद््दाख में जेहादियों द्वारा धर्मान्तरण व लव जेहाद द्वारा बौद्धों को समाप्त करने का षड़यन्त्र निर्बाध रूप से चल रहा है। आज की आवश्यकता जेहादी व ईसाई मिशनरियों से अन्य अल्पसंख्यकों व हिन्दू समाज को बचाने की है न कि हिन्दू समाज को कठघरे में खड़ा करने की।

अल्संख्यक आयोग ने गौरक्षा के बारे में भी अनावश्यक टिप्पणी की है परन्तु कांग्रेसी, वामपंथी और तथाकथित अल्पसंख्यकों के एक वर्ग द्वारा आयोजित बीफ पार्टियों और बर्बर गौहत्याओं के बारे में वे कुछ नहीं बोले, इससे हिन्दुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं।

अल्पसंख्यक आयोग की अवधारणा ही अलगाववादी मानसिकता को पुष्ट करती है। क्या देश के सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए मानवाधिकार आयोग पर्याप्त नहीं है ? विश्व हिन्दू परिषद की माँग है कि अल्पसंख्यक आयोग तथा अल्पसंख्यक मंत्रालय अविलम्ब समाप्त कर देना चाहिए।

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