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मनोज तिवारी नही रहे ‘मृदुल’

बोल बिंंदास- इसे सत्ता का नाश कहें या काम काज का दबाव आमतौर पर मुस्कराते रहने वाले, लोगों की फर्माइशों को पूरा करने वाले सांसद और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी दिल्ली के एक स्कूल में 2 करोड़ की लागत से लगाये जाने वाले सीसीटीवी कैमरो के उद्घाटन कार्यक्रम में एक महिला अध्यापक पर बुरी तरह भड़क गए. महिला अध्यापक का दोष सिर्फ इतना था कि उसने सांसद महोदय से एक गाना सुनाने की फर्माइश कर डाली. बस फर्माइश सुनते ही सांसद महोदय का पारा चढ़ गया. ना केवल सार्वजनिक तौर पर उन्होंने महिला अध्यापक लताड़ा, साथ ही मंच से उतर जाने और उनपर कारवाई करने का आदेश भी दे डाला. उनके इस कृत्य की चौतरफा निंदा हो रही है. साथ ही ये सवाल भी उठ रहा है कि स्कूल में जिस तरह से उन्होंने अध्यापिका के साथ व्यवहार किया क्या वो उचित था. माना सांसद की गरिमा का ध्यान अध्यापिका जी को रखना चाहिए था लेकिन क्या एक महिला के सम्मान का ध्यान एक सांसद को नही रखना चाहिए था? क्या असर पड़ा होगा वहां मौजूद लोगों पर, बच्चों पर. उनका सांसद किस तरह का सम्मान रखता है महिलाओं के प्रति. गौरतलब है कि आज मनोज तिवारी जिस मुकाम पर पंहुचे हैं वो उनकी गायक की छवि के कारण ही है. खैर राजनीति का नशा है ही ऐसा जिसके सर चढ़ता है फिर उसका यही हाल होता है.

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