दिल्ली में फिर ‘दरिंदगी’! लड़कियों की इज्जत बचाने वाले कारोबारी को बदमाशों ने पत्थरों से किया अधमरा

दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली, जिसे हम दिल वालों का शहर कहते हैं, वहाँ एक बार फिर ‘सरेराह’ एक नेक इंसान की जान लेने की कोशिश की गई। महरौली के IGNOU रोड पर जब कुछ युवक लड़कियों से बदसलूकी कर रहे थे, तो 39 साल के मुकेश कुमार ने चुप रहना गंवारा नहीं किया। लेकिन लड़कियों के सम्मान में उठाई गई ये आवाज उन पर इतनी भारी पड़ी कि बदमाशों ने उन्हें पत्थरों से अधमरा कर दिया। आज एक मां अपने लहूलुहान बेटे को देखकर दहाड़ें मार कर रो रही है। क्या दिल्ली अब इतनी असुरक्षित हो गई है कि सही का साथ देना जान पर बन आए?

पेशे से ट्रांसपोर्ट कारोबारी मुकेश कुमार बीती रात अपने मामा के घर से लौट रहे थे। थकान मिटाने के लिए वे IGNOU रोड पर एक चाय की दुकान पर रुके। तभी उनकी नजर चार युवकों पर पड़ी जो वहाँ खड़ी दो लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी कर रहे थे। एक जिम्मेदार नागरिक के नाते मुकेश ने बीच-बचाव किया और युवकों को रोकने की कोशिश की। लेकिन उन दरिंदों को ये नसीहत रास नहीं आई।

मुकेश के विरोध करते ही उन चार लड़कों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। इससे पहले कि मुकेश खुद को संभाल पाता, एक युवक ने पीछे से उसके सिर पर भारी वार किया। मुकेश जमीन पर गिरा ही था कि चारों ने उस पर पत्थरों की बारिश कर दी। बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए उन लड़कों ने तब तक मुकेश को पीटा जब तक वे पूरी तरह बेसुध नहीं हो गया। चाय की दुकान के पास मौजूद लोग मूकदर्शक बने रहे, जबकि हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। मुकेश पूरी रात मौत और जिंदगी के बीच बेहोश पड़ा रहा।

मुकेश की मां सर्वेश के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह 5 बजे घटना की जानकारी मिली। जब वे अस्पताल पहुँचीं, तो मुकेश की हालत देखकर उनका कलेजा फट गया। पूरी रात बेहोश रहने के बाद सुबह 4 बजे मुकेश को होश आया। मुकेश का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने किसी की बहन-बेटी की लाज बचाने की हिम्मत दिखाई थी। परिवार अब गहरे सदमे में है और इंसाफ की गुहार लगा रहा है।

दिल्ली पुलिस ने पीड़ित के बयान पर केस दर्ज कर लिया है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि उन चार चेहरों की पहचान हो सके जिन्होंने कानून की धज्जियां उड़ाईं। हालांकि हमलावर अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। यह घटना एक बार फिर ये सवाल उठाती है कि सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा और मदद के लिए आगे आने वालों को सुरक्षा कौन देगा? सवाल ये भी है कि क्या अगली बार कोई शख्स किसी लड़की की मदद के लिए आगे आएगा? दिल्ली पुलिस के लिए ये साख की लड़ाई है। उन चार चेहरों को सलाखों के पीछे पहुँचाना ही मुकेश के साहस और उनकी मां के आंसुओं का असली इंसाफ होगा।

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