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भारतीयता की लिंचिंग- संजीव उनियल

संजीव उनियल
अधिवक्ता, उच्चतम न्यायालय

      70 वर्षीय महाराज कल्पवरक्ष व 35 वर्षीय महाराज सुशील गिरी जी की हत्या इसलिए हुई कि उन्होंने भगवा रंग धारण किया हुआ था, ये वही भगवा है जो सम्पूर्ण भारतवर्ष का गुरु है, जो आर्यों की विजय पताका है, ऋषियों का वरवेश है, त्याग व शुचिता का संदेश देता है, लौकिक व आध्यात्मिक उन्नति का अभय प्रेरणा धाम है। इस भारतवर्ष की हज़ारों वर्ष पौराणिक सनातन परम्परा का वाहक है, इस भगवा पताका को लेकर मर्यादा पुरूषोतम श्री रामचंद्र जी ने लंका पर विजय प्राप्त की थी, यह भगवा विक्रमादित्य, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी का विजय पताका था और यही भगवा तुकाराम, दयानंद सरस्वती, स्वामिविवेकानंद आदि शंकराचार्य का मस्तक व वेश था।

      यह नहीं भूलना चाहिए कि ये पालघर वर्षों से कम्यूनिस्टो का गढ़ रहा है तथा वहाँ कशतकारी और ईसाई मिशनरीयो के बीच साँठगाँठ व धर्मातरण का अड्डा बना हुआ है। ये साधुओं की योजनाबद्ध हत्या जो कि लिंचिग से भी अधिक भयावह व शर्मनाक है। लिंचिंग में बहुत सारे लोग एक साथ मिलकर किसी को मार देते हैं पर पुलिस की मौजूदगी में नहीं। परंतु इस घटना में तो २०० से ज़्यादा लोग इन दो साधुओं व एक ड्राइवर को पुलिस के सामने, पुलिस चौकी पर पीट पीट कर मारते हैं। इन साधुओं को पुलिसकर्मी उस भीड़ को सौंपते हैं जैसे कह रहे हों लो ‘’ तुम्हारा शिकार ’’, और उसके बाद जो विडीओ में 70 वर्ष के महाराज कल्पव्रक्ष व सुशील गिरी जी महाराज के साथ होता है वह आज़ाद भारत का सबसे भयावह, ख़तरनाक व शर्मसार करने वाला व पुलिस सहायता से की गयी लिंचिंग है। पालघर वह इलाक़ा है जहाँ कि ईसाई मिशनरी, आदिवासियों को धर्मातरण का ज़हर पिलाकर क्षेत्र का ईसाईकरण करने में लगे हुए थे। यह CPM का गढ़ रहा है तथा यहाँ का MLA भी CPM पार्टी का है। यह अब बिलकुल साफ़ हो गया है कि CPM का हाथ इस लिंचिंग में है। पहले पाँच क़ातिल CPM पार्टी के कार्यकर्ता हैं, ये जयराम धक भावर गाँव दिवाशी गाढ़ापड़ा, महेश सिताराम रवाते, गणेश देवाजी राव, राम दास रूपजी असारे, सुनील सोमजी रवाते गाँव पतिल्पाडा से हैं।

      यह संदेह है कि ये भीड़ CPM नेताओ के द्वारा योजनाबध तरीक़े भड़कायी गयी थी। यह वही क्षेत्र हैं जहाँ ईसाई मिशनरीयो ने पिछले अनेको वर्षों से भोलेभाले आदिवासियों का धर्मान्तरण करने का काम किया है।

      पुलिस ने इन तीनों लोगों को जंगल की एक पुलिस पोस्ट में सुरक्षित रखा था तथा जब भीड़ लाठी, डंडे व हथियार लेकर आयी तथा पुलिस ने इन तीनो को उस भीड़ के हवाले कर दिया जिनको उस निर्दयी भीड़ ने पुलिस के सामने नृशंसता से ‘’लिंचिग’’ करते हुए मर डाला। रक्षक ही भक्षक बन गए

      शिराज़ बलसारा, जो एक NGO ‘कशतकारी’ की प्रमुख है जिनके ईसाई मिशनरीयो से सम्बंध हैं वह इन 110 लोगों की bail की तैयारी में जुटी हैं। यह भी ख़ुलासा हुआ है कि CPM MLA कामरेड विनोद निकोले की इस क़ातिलाना योजना में बहुत बड़ी भूमिका है।

 इस मामले को प्रमुखता से उठाने वाले अर्नब जब इस मामले में सोनिया गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाते है उन्हें उनके मूल नाम से संबोधित करते हैं। इससे नाराज होकर कॉंग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ 100 से अधिक FIR देश के विभिन्न प्रांतो में दर्ज कराई। जिसके लिए मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी की 12-13 घंटे पुलिस स्टेशन में पूछताछ की, इससे पहले Supreme Court ने अपने एक order में अर्नब गोस्वामी के ३ सप्ताह के protection order को Pass किया था। अर्नब और उनकी पत्नी पर जानलेवा हमला भी किया गया।

      आज यह ज्वलंत प्रश्न देश के सामने हैं कि उन दो भगवा साधुओं का क्या अपराध था जो उनकी व उनके चालक की पुलिस के सामने पीट पीट कर हत्या की गयी। क्या पुलिस कर्मियों को कही से फ़ोन गया था कि इन महात्माओं को उग्र भीड़ को सौंप दिया जाए? क्या इस लिंचिंग को दबाने का प्रयत्न किया गया? मीडिया चैनल रिपब्लिक भारत के एडिटर एंड चीफ़ की जानलेवा हत्या का प्रयास क्यों किया गया?

      किसके इशारे पर अर्नब के ख़िलाफ़ 100 से अधिक FIR हुई तथा ऐसे एक सिविल मुकदमे में उनसे १२ घंटे तक क्यों पूछताछ हुई तथा अर्नब व उनकी श्रीमती जो की एडिटर हैं उनपर जानलेवा हमला करने वालों को पुलिस ने अब तक पूछताछ के लिए तलब क्यूँ नहीं किया, जबकि यह एक फ़ौजदारी मुक़दम्मा है।

‘’धर्मो रक्षति रक्षितः’’

 अर्थात तुम धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा।

      चाणक्य के अर्थशास्त्र को संसार के बहुत से देश सार्थक मानते है जो इस परिपेक्ष में दिशा देता हुआ कहता है –

      शासनम दंडेन’ अर्थात शासन को चलाने के लिए क़ानून का कठोरता से पालन करते हुए, इन राक्षसों को दंड मिलना चाहिए।

      वस्तुत: महाभारत का यह वाक्य तो बहुत ही सरगर्वित है –

‘’धारणाद धर्ममित्याहु:,धर्मो धार्यते प्रजा:’’

अर्थात धर्म को केंद्र में रखकर समाज के सारे उपक्रम चलने चाहिए। भारतवर्ष की पौराणिक संस्कृति, पुरातन सभ्यता तथा सनातन भगवा गुरु परम्परा को जीवित रखने के लिए भारतीय समविधान का कठोरता से पालन करते हुए अत्यंत शीघ्र समस्त अपराधियों को व दोषी पुलिसकर्मियों को कठोर से कठोर सज़ा देकर एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए जिससे कोई भी व्यक्ति पवित्र ‘भगवा’ को कभी टेढ़ी निगाहों से ना देख सके।  

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