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एनसीआर से जानलेवा पलायन !-अनीता चौधरी

अनीता चौधरी

बोल बिंदास, दिल्ली- इस विकट घड़ी में जब लोगों का घर से निकलना बंद है ,कर्फ्यू लगी हुई है , कोरोना वायरस का कहर हर तरफ फैला हुआ है । हर तरफ से यही आवाज़ आ रही है कि घर से निकलना मतलब ,जान से खेलना । मगर मौत के दहशत भरे इस माहौल में भी लाखों की तादात में हमारे भगवान रूपी मज़दूर भाई-बहन जिनके बिना हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी को सोचना भी मुश्किल है वो दिल्ली-एससीआर से पलायन कर रहे है । पलायन का ये सिलसिला बुधवार देर शाम से ही शुरू है । लोगो 100-100 किलोमीटर तक पैदल ही चले जा रहे हैं। । शुक्रवार आधी रात को तो हजारों लाखों की तादात में ये असंगठित क्षेत्र के हमारे दिहाड़ी मज़दूर भाई बहन सड़कों पर नज़र आये ।

इस दृश्य को देख दिल यही कह रहा है कि ये स्थिति वाकई शर्मनाक और चिंताजनक है । हालांकि दिल्ली सरकार की तरफ से इनके लिए कई घोषणाएं की गई। थीं मगर ज़मीन पर ये ढाक के तीन पात नज़र आ रहे हैं । जो तस्वीर सामने आ रही है वो यही बताती है कि TV और अखबार के माध्यम से की गयी सारी घोषणाएं समय से ज़मीनी स्तर पर उतरने में असफल रहीं। कोरोना से बचाने के नाम पर दिल्ली सरकार ने लाखों दैनिक मजदूरों को भुखमरी के कगार पर ला दिया। पूर्वांचल से हजारों किलोमीटर की दूरी तय करवाके रोजगार की तलाश में आये ये सीधे शरीफ और मेहनतकश इंसान आज फिर अपनी गठरी सहेजकर घरों की तरफ चल दिये। इस विकट घड़ी में जब इतनी बड़ी बड़ी घोषणाएं केंद्र और दिल्ली सरकार ध्वनि की तरफ से हुईं तो शक की सुई कहीं न कहीं साजिश की तरफ भी घूम जाती हैं । कि कहीं केजरीवाल सरकार ने ज़िम्मेदारियों से बचने के लिए जानबूझकर इन लाखों गरीब श्रमिकों को योजनाओं की लाभ से वंचित और भूखा यो नहीं रखा ताकि ये खुद दिल्ली से भाग जाएं और उसकी जिम्मेदारी कम हो जाये।

हालांकि हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों को इनको हर संभव सहायता और सुविधा मुहैया करवाने के निर्देश दे दिये हैं । उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने इनके लिए हर तरह की संभव सुविधा प्रदान करने का आश्वासन भी दिया है ,वादा किया है की उनका पूरा ख्याल रखा जाएगा । इधर उंगली उठती देख और हालात बिगड़ते देख दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी उनसे मिलने पहुँचे और जानलेवा इस पलायन कि सहूलियत भारी यात्रा के लिए बस सेवा का वादा कर के चले आये । दिहाड़ी मज़दूरों की गई पलायन के बीच दिल्ली सरकार ने भी इनके रहने और खान पान का ख्याल रखने के लिए बड़ी बड़ी घोषणाएं की हैं मगर ये फिर भी न जाने कितने किलोमीटर पैदल ही चले जा रहे है । जिस मंज़िल की तलाश में ये यहां आए थे वो आज इन्हें नेताओं के झूठे वादों से भरे भुखमरी का मजमा नज़र आ रहा है । भूख से बिलखते छोटे छोटे बच्चे इनकी गोद में हैं । मगर इन्हें किसी चीज की परवाह नहीं । इस वक़्त ये बस अपने पैतृक घर जो इनका घर है ,अपना घर ,जहां से इनकी जड़ें जुड़ी हुई हैं वहां जाना चाहते हैं । ना जाने क्यों इन्हें किसी पर विश्वास नहीं हो पा रहा। वोट बैंक की राजनीति में अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं । लेकिन मुश्किल ये है कि लॉक डाउन का ये समय चल रहा है ,जहां कुछ भी नहीं चल रहा है । जरूरत की चीजों के अलावा बस सिर्फ और सिर्फ ये हमारे पूर्वांचली दिहाड़ी मज़दूर कहे जाने वाले भाई-बहन चल रहे हैं । इनकी जरूरत फिलहाल शायद किसी को नहीं है । कोरोना की इस जंग में जनता कर्फ्यू लगी है । सभी राज्यों की सीमाएं सील कर दी गयी है । राज्यकीय सीमाओं फिलहाल घुसना मना है । मगर ये अपना घर बार सब कुछ छोड़ कर दिल्ली छोड़ चुके हैं । दिल्ली सरकार इन्हें रोक नहीं रही और यूपी की प्रशासन इन्हें उस तरफ घुसने नहीं दे रही है है । ऊपर से धूप और बारिश का ये सितम अलग से । वैसे बॉर्डर पर बस की सुविधा सुनिश्चित करने के वादे भी दोनों राज्यों की सरकारों की तरफ से की गई है मगर ये वादे ज़मीन पर कारगर तरीके से नज़र नहीं आ रही हैं । बस के इंतज़ार ज़मीन पर बैठे इन लोगों की आंखे पथरा गई हैं । नज़ारा ये है कि सोशल डिस्टनेसिंग के इस दौर में ,दिल्ली -यूपी बॉर्डर पर हजारों – लाखों की तादात में लोग एक दूसरे के सहारे बैठ कर ,गंतव्य स्थल तक पहुँचने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं।
कुल मिलाकर सरकार की घोषणाओं की कलई खुल रही है और गरीब जनता भगवान भरोसे है।
ऐसे में इन अनुशासित और मेहनती श्रमिकों के आत्मसम्मान को नमन हैं।

रामनवमी के नवरात्र का समय चल रहा है ।
दूरदर्शन पर रामानंद सागर का रामायण भी शुरू हो गया है। ऐसे में राम से बस यही गुजारिश है कि हे राम कुछ तो रहम करो !!

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