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कोरोना से डरिये मत, मजबूत बनिये, एंटीबॉडी और इम्यून सिस्टम के इस खेल में विल पावर की होती है जीत

अनीता चौधरी

आउटर पार्टिकल के साथ एंटीबॉडी की चलती है लंबी लड़ाई , इम्युनिटी ढाल बन कर निभाता है सेनापति की भूमिका और इच्छा शक्ति तय करती है ,हार या जीत

आइए जानते हैं क्या करता है हमारा प्रतिरक्षा तंत्र कोरोना वायरस को हराने के लिए?

ज्यादातर लोग कोरोना वायरस से इन्फेक्ट होके अपने आप कैसे ठीक हो रहे हैं ?

जब से कोरोना की खबरें पढ़ रही हूँ, तब से दिमाग में यही कौंध रहा है कि आखिर क्या बला है ये वायरस ? साइंस की स्टूडेंट होने के नाते जितना पढ़ रही थी ,उतनी ही जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी । बॉटनी, और जूलॉजी के सारे molecules दिमाग में आपस इन टकरा रहे थे । और blood corpuscles के एंटीबाडी और इम्युनिटी को याद कर रहे थे , उनके फंक्शन को समझ रहे थे । कोरोना वायरस और इसके संक्रमण को काफी पढ़ने के बाद एक बात समझ में आई । क्यों इतनी बड़ी है संक्रमण की संख्या और आखिर मौत के आंकड़े उस तुलना में क्यों है छोटे?

कोरोना की ये जंग क्यों है इतनी लंबी और इस लेंदी वार के कौन -कौन है योद्धा ? आइए इसको आसान भाषा में समझते हैं । …

क्या होता है वायरस का हमला

वायरस आया शरीर में, 4 दिन गले में रहा, फिर फेफड़े में उतर गया, फेफड़े में एक कोशिका के अंदर घुसा और उसके Reproduction के तरीके को इस्तेमाल करके खुद की copies बना ली, फिर सारी copies मिलकर अलग अलग कोशिकाओं को अंदर घुसकर ,उन्हें ख़त्म करना शुरू कर देती है। अब बहुत सारे वायरस हो गए हैं फेफड़ों में, मौत के करीब पहुँचने लगता है इंसान। शुरू में वायरस फेफड़ों के epithelial cells को प्रभावित करता है।वायरस अभी जंग जीत ही रहा होता है कि तभी शरीर के सेनापति इम्युनिटी को खबर पहुँचती है ।

हमारे शरीर का सेनापति होता है हमारा इम्यून सिस्टम, इम्यून सिस्टम के पास सभी दुश्मनों का लेखा जोखा होता है की किसपर कौनसा अटैक करना है,इसकी पूरा रोड मैंप भी।

इम्यून सिस्टम बॉडीज में एंटीबॉडी के रूप में एक सेना तैयार करता है । फिर हमारा सेनापति यानी इम्युन सिस्टम, एंटीबॉडी को वायरस पर हमले के लिए भेज देता है।

क्या है एंटीबॉडी

एंटीबाडी यानी हमारे शरीर में outer particles से लड़ने वाली सेना की रचना ,इम्यून सिस्टम ,वायरस यानी दुश्मन के अटैक के तरीके को देखकर करता है।
अगर वो वायरस पहले अटैक कर चुका है तो उसकी एंटीबाडी रचना पहले से मेमोरी में होगी और उसे तुरत वायरस को मारने के लिए भेज दिया जाता है।
अगर वायरस नया है जैसा कि कोविद 19 के केस में है तो इम्यून सिस्टम हिट एंड ट्रायल से सेना की रचना करता है।

Body के लिए enemy के रूप में outer particle virus से लड़ने के लिए सबसे पहले हमारे शरीर के सबसे फेमस योद्धा इम्मुनोग्लोबिन G को भेजा जााता है । इम्मुनोग्लोबिन G शरीर की सबसे कॉमन एंटीबाडी है और ज्यादातर युद्धों में जीत का सेहरा इसी के सर बंधता है। इम्मुनोग्लोबिन G शुरूआती अटैक में ही वायरस पर काबू करने की कोशिश करती है। इम्मुनोग्लोबिन G को सपोर्ट देता है इम्मुनोग्लोबिन M ।

युद्ध की शुरुआत

बॉडी में जैसे ही कोई बाहरी वायरस आता है ,वायरस और एंटीबॉडी के बीच जीत हासिल करने के लिए भीषण युद्ध शुरू हो जाता है । इम्मुनोग्लोबिन G जो कि फर्स्ट लेयर ऑफ इम्यून सिस्टम है वायरस पर टूट पड़ता है और उसे बेअसर करने की कोशिश करता है, साथ ही जो सेल्स अब तक ख़त्म नहीं हुए होते हैं उन्हें बचाने की कोशिश करता है ।
कोविड-19 वायरस के केस मेंं वायरस नया है, ताकतवर है, और सेेना रूपी एंटीबॉडी वायरस से लड़ने के लिए हिट एंड ट्रायल के तौर पर तैयार हो रहा है , इसलिए कभी कभी कोरोना वायरस इम्यून सेल्स को भी इन्फेक्ट करता है। इस इंफेेेशन को कोविड-19 वायरस इसे अपनी जीत के तौर पर लेता है ।

क्या है इम्यून सिस्टम और किस तरह से काम करती है इसकी सेना
इम्मुनोग्लोबिन G और इम्मुनोग्लोबिन M के अलावा हमारा इम्यून सिस्टम एक गुरिल्ला आर्मी भी छोड़ देता है खून में, जिसमे कुछ प्रमुख योद्धा भी है ।एक है B सेल्स, जो जनरल सेना टाइप है, जो सब कुछ जानता है, इसके कुछ हेल्पर सेल्स भी होते हैं । सबसे इम्पोर्टेन्ट होते हैं किलर T सेल्स, जो चुस्त योद्धा होते हैं और आत्मघाती हमला करते हैं जिससे वायरस अपने आप को कमजोर महसूस करता है । और फिर वायरस और सेल्स के बीच लम्बा युद्ध शुरू होता है। जितना युद्ध लम्बा खिंचता जाता है उतनी ही मात्रा में B और दोनों टाइप के T सेल्स की मात्रा खून में बढ़ती जाती है।

ज़िन्दगी और मौत का फर्क
मौत के ज्यादा चांस मात्र तब हैं जब इम्युनिटी रूपी सेनापति पहले से ही किसी और बीमारी से लड़ रहा हो, इसलिए उसकी सेना को दो या ज्यादा सीमाओं पर लड़ना होता है,कमजोर भी होता है और कुछ केसेस में हार भी हो जाता है।

वायरस इम्यून सेल्स को इन्फेक्ट करता रहता है और ट्रैप में फंसाने की कोशीश करता रहता है । लेकिन इम्मुनोग्लोबिन G और इम्मुनोग्लोबिन M मिल कर वायरस को बुरी तरह पटखनी देने की कोशिश करता रहता है ।

क्योंकि कोविड-19 में बॉडी और एंटीबॉडी के बीच लड़ाई लंबी होती है इसलिए बीमार या वृद्ध व्यक्ति इसका मुकाबला लंबे समय तक नही कर पाता । और उसके मृत्यु के चांसेस बढ़ जाते है । लेकिन स्वस्थ इंसान में इम्युनिटी सिस्टम काफी स्ट्रांग होता इसलिए एंटीबाडी के सामने वायरस का टिके रहने थोड़ा नामुमकिन होता है । इसीलिए कोविड-19 वायरस के केस में इंसान को घरों में बंद रह कर ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए, और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल करते हुए पोषक आहार लेना चाहिए, ताकि आपके बॉडी का सेनापति आपके लिए ढाल की तरह बना रहे । आपके शरीर का एंटीबाडी सेना बन कर outer bodies के साथ अच्छे से लड़ सके और युद्ध के अलावा बाकी चीज़ों का तनाव ना ले ।

इम्युनिटी की जीत
एंटीबॉडी अपने इम्यून सिस्टम के सपोर्ट से वायरस पर जैसे ही जीत हासिल करता है आपकी सांसे और और बॉडी सिस्टम एक बार फर धीरे धीरे नार्मल होने लगता है। वायरस पर एंटीीबाडी के इस जीत केे बाद जश्न भी होता है । इस समय आपके खून में बी और टी सेल्स भारी मात्रा में होते हैं। जीत के साथ ही इम्यून सिस्टम की मेमोरी में ये दर्ज़ हो जाता है। और खुदा ने खस्ता फिर दोबारा जरूरत पड़ती है तो आपका ब्लड सिस्टम पूरी तरह से तैयार होता है । कोविड-19 की लड़ाई में प्लाज्मा थरेपी की सफलता और कोरोना मरीज का ठीक होना ।
बॉडी, एंटीबॉडी और इम्युनिटी सिस्टम से ही काम करता है । प्लाजमा थरेपी में ठीक हुए मरीज के एंटीबाडी सेल्स इस वायरस से वाकिफ होते हैं इसलिए इम्युनिटी सिस्टम एंटीबॉडी को accordingly, जरूरत के हिसाब से वायरस को मारने के लिए एंटीबॉडी सेल्स तैयार करता है। इसलिए कोरोना की इस लड़ाई में , डरिये और घबराइए मत मजबूती के साथ डटे रहिए ।

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