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क्या बॉलीवुड में ‘बाहुबली’ जैसी फिल्म बनायी जा सकती है ?

क्या बॉलीवुड में ‘बाहुबली’ जैसी फिल्म बनायी जा सकती है ?


आइये इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं…

क्या बॉलीवुड बाहुबली जैसे बड़े बजट की फिल्म बनाने के लिए तैयार है ?

‘बाहुबली 2’ से पहले, सूरज बड़जात्या की ‘प्रेम रतन धन पाओ’ सबसे महंगी भारतीय फिल्म थीं।बताया जा रहा है की अब तक की बॉलीवुड की सबसे महंगी फिल्म सलमान खान की प्रेम रतन धन पाओ (180 करोड़ रुपये) है जबकि ‘बाहुबली 1’ की लागत 180 करोड़, और ‘बाहुबली 2’ का बजट 250 करोड़ रुपये रहा। किसी भी शानदार बॉलीवुड फ़्लिक ने अपने उच्चतम स्तर के मामले में लगभग 150-180 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। क्या इसका मतलब है कि बजट के मामले में बॉलीवुड के फिल्मकारों में अपने क्राफ्ट पर राजामौली जैसे कॉन्फिडेंस की कमी है और क्या उन्हें अभी वक़्त लगेगा इस तरह लार्जर देन लाइफ सिनेमा बनाने में….

क्या बॉलीवुड का कोई भी बड़ा स्टार प्रभास की तरह एक प्रोजेक्ट को लम्बा वक़्त और कड़ी मेहनत देने के लिए तैयार है ?

बताया जा रहा है की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी के शूटिंग के दौरान प्रभास ने अपने मैनेजर्स को साफ़ हिदायत दी थी की वो किसी भी अन्य निर्माता के साथ किसी भी फिल्म प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत ना करें…और जैसा की आपको पता है की ‘बाहुबली 1’ और ‘बाहुबली 2’ पर पूरा फोकस रखने के लिए प्रभास ने पिछले पांच सालों में किसी और फिल्म प्रोजेक्ट को साइन नहीं किया…और प्रभास ने ऐसा इसलिए किया ताकि वो अपने करैक्टर की कॉन्टिनुइटी को मेन्टेन कर सकें…प्रभास ये भी सुनिश्चित करना चाहते थे की वो इन पांच सालों में अपने करैक्टर में रहें ताकि उसको पूरी तरह से परदे पर जियें..और हुआ भी कुछ ऐसा ही दर्शकों ने जब प्रभास को बड़े परदे पर देखा तो उनमें अभिनेता नहीं दिखा,बल्कि वहां उन्हें अमरेंद्र बाहुबली और महेंद्र बाहुबली ही दिखे।

वहीँ बॉलीवुड में हमारे पास मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान हैं, जो एक साल में केवल एक फिल्म पर काम करते हैं, कभी-कभी दो साल में एक ही फिल्म भी करते हैं। लेकिन क्या वो भी किसी फिल्म प्रोजेक्ट को पांच साल देने के लिए तैयार है, शायद वो भी इंकार कर देंगे। आमिर के अलावा बाकी सभी सुपरस्टार्स का फिल्मो का स्ट्राइक रेट कहीं ज़्यादा है, तो उनसे एक प्रोजेक्ट के लिए पांच साल देने की बात कहना शायद बेमानी होगी….

प्रभास का ‘बाहुबली’ डेडिकेशन


साल की मच अवेटेड फिल्म ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ ने लिए जितना इंतजार फैन्स ने किया है उतनी ही मेहनत प्रभास ने भी की है। दरअसल प्रभास ने फिल्म के लिए डबल मेहनत की है क्योंकि उन्होंने फिल्म में यंग और ओल्ड दो कैरेक्टर प्ले किए हैं। ऐसे में उन्हें यंग कैरेक्टर में टोन बॉडी मस्कुलर लुक में दिखना था तो वहीं दूसरे में उन्हें थोड़ा उम्रदराज। प्रभास ने इन दोनों कैरेक्टर के लिए प्रॉपर फिटनेस रुटीन फॉलो किया है।

प्रभास के फिटनेस ट्रेनर लक्ष्मण रेड्डी ने एक लीडिंग वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में इसकी डिटेल दी है। जिसमें उन्होंने बताया कि फिट कैरेक्टर के लिए प्रभास में 100 किलो वजन किया था। प्रभास फिटनेस के लिए रोज 5 घंटे जिम में वर्कआउट किया। उन्हें इस दौरान जंक फूड बिल्कुल अलाउड नहीं था साथ ही बिजी शेड्यूल के बाद भी वो वर्कआउट स्किप नहीं करते थे।
प्रभाष चाहते तो वजन बढ़ाने के लिए दूसरी तकनीक का भी सहारा ले सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

क्या बॉलीवुड में किसी हीरोइन को ‘देवसेना’ जैसा रोल मिलेगा?


अनुष्का शेट्टी ने ‘बाहुबली 2′ में’ रानी देवसेना’ को निभाया, जो तलवारबाज़ी और घुड़सवारी में पूरी तरह से निपुण थी जो किसी भी मायने में इस फिल्म के हीरो से कमतर नहीं थी।और सिर्फ ‘देवसेना’ ही क्यों ‘शिवगामी’ और ‘अवंथिका’ भी वास्तव में असली नायक थी। फिल्म में ये तीनों ही राज्य पर शासन करती हैं, राजा का चयन करती हैं, अपना साथी तय करती हैं, अपने राज्य को बचाने के लिए लड़ती हैं और यहां तक ​​कि दुश्मनों को दंडित भी करतीं हैं ।

अब सवाल ये उठता की क्या बॉलीवुड में किसी मेल सुपरस्टार के रहते हुए ऐसे मजबूत महिला पात्र हो सकते हैं ? यहां तक ​​कि बॉलीवुड में महिला केंद्रित फिल्मों में भी फिल्म निर्माताओं ने किसी भी मानसिक अवसाद के बिना सामाजिक मानदंडों से लड़ने के लिए अपनी महिला नायकों को दिखाने का प्रयास नहीं किया है। क्या आप सोच सकते हैं कि अगर ‘बाहुबली’ जैसी फिल्म को बॉलीवुड में बनाया गया होता, तो क्या कोई बड़ा सुपरस्टार ऐसी फिल्म में काम करने को तैयार होता जिसमें फीमेल एक्ट्रेस इतनी स्ट्रांग हों…..क्या वो स्क्रीन स्पेस को लेकर इन्सेक्युर नहीं होते ?

क्या किसी सपोर्टिंग एक्टर को इतना महत्त्व मिलता जितना ‘कटप्पा’ को मिला ?

बाहुबली 2 की रिलीज़ होने से कुछ ही दिन पहले, कट्टप्पा की भूमिका निभाने वाले अभिनेता सत्यराज ने 9 साल पहले ‘कावेरी जल विवाद’ पर दिए अपने विवादित बयान की वजह से आगये थे विवाद में जिसके बाद उन्होंने माफ़ी भी मांग ली थी और फिर कर्नाटक में फिल्म के रिलीज़ का रास्ता साफ़ हुआ था…


इससे ये साफ़ होता है की इस फिल्म में कट्टप्पा का क्या महत्त्व था.. कट्टप्पा बाहुबली में एकमात्र चरित्र था, जो शुरू से अंत तक मौजूद था..हालांकि मुख्य लड़ाई ‘भल्लालदेव’ और ‘बाहुबली’ के बीच ही थी, लेकिन पूरा दूसरा भाग “कट्टप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा” के सवाल पर ही केंद्रित था। क्या बॉलीवुड में किसी सपोर्टिंग एक्टर को इतना इम्पोर्टेंस दिया जाता है ? शायद नहीं क्यूंकि सपोर्टिंग एक्टर या तो कॉमेडियन बन कर रह जाते हैं या फिर हीरो का एक सहायक बनकर रह जाता है…

क्या कोई बॉलीवुड फिल्म ‘बाहुबली’ फ्रैंचाइज़ी की तरह क्षेत्रों की सीमाओं को पार कर पायेगी ?

ये पहली बार देखा गया है की कोई रीज़नल फिल्म एक करिश्माई अंदाज़ में भारत के उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक के दर्शकों को सिनेमा घरों तक खींच पायी है..क्षेत्रवाद और भाषाओं की सीमाओं को तोड़ते हुए ‘बाहुबली’ फ्रैंचाइज़ी, दर्शकों को या ये कहें की विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने में ज़बरदस्त तरीके से सफल रही है..इसके पहले शायद ही किसी हिंदी फिल्म या ये कहें भारतीय फिल्म ने सीमाओं और भाषाओँ के बैरियर को तोड़ पाने में सफलता प्राप्त की थी…

इन बिंदुओं से ये तो साफ़ होता है की ‘बाहुबली फ्रैंचाइज़ी’ ने एक ऐसा उदाहरण पेश कर दिया है जिसने बॉलीवुड निर्माता-निर्देशकों को अपनी फिल्मों की आत्माओं के अंदर झाँकने के लिए मजबूर ज़रूर कर दिया है..और ‘बाहुबली 2’ ने इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में एक रिवोल्युशन ज़रूर लाकर रख दिया है.. ‘बाहुबली 2’ ने जो स्टैण्डर्ड सेट किये हैं उससे आगे बढ़ने के लिए फिल्मकारों और बॉलीवुड के सुपरस्टार्स को चिंतन करने की ज़रूरत है….
रजनी,संवाददाता,मुबंई

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