दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार, पीएम मोदी और शाह के साथ बनी बिहार के विकास की रणनीति

बिहार में नई सरकार के गठन और लगातार पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार एक्शन मोड में हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात को भले ही ‘शिष्टाचार भेंट’ कहा जा रहा हो, लेकिन इसके पीछे बिहार के विकास और सियासत की बड़ी पटकथा लिखी जा रही है। रविवार को दिल्ली की कड़ाके की ठंड के बीच बिहार की सियासत में गर्माहट महसूस की गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अमित शाह के आवास पर एक लंबी बैठक की, जिसमें बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। पांचवीं बार सत्ता संभालने के बाद नीतीश का यह पहला दिल्ली दौरा है।

नीतीश कुमार की इस यात्रा का मुख्य एजेंडा है—विकास। सीएम ने केंद्र सरकार से सड़कों, पुलों, स्कूलों और अस्पतालों के निर्माण के लिए ज्यादा फंड और सहयोग मांगा है। खासकर युवाओं के लिए नौकरियों और रोजगार के नए अवसर पैदा करना नीतीश सरकार की प्राथमिकता है। चर्चा इस बात की भी है कि केंद्र सरकार बिहार को एक ‘विशेष पैकेज’ की सौगात दे सकती है, जिससे राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार मिलेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस दौरे से नीतीश कुमार ने एनडीए गठबंधन में अपनी मजबूती का संदेश दिया है। सम्राट चौधरी की बैठक में मौजूदगी यह साफ करती है कि जेडीयू और बीजेपी के बीच तालमेल बेहतर है। अटकलें यह भी हैं कि मकर संक्रांति के बाद बिहार कैबिनेट का विस्तार हो सकता है, जिसकी रूपरेखा दिल्ली की इन मुलाकातों में तय कर ली गई है।

नीतीश कुमार का यह दिल्ली दौरा बिहार के लिए उम्मीदों भरा है। एक तरफ विकास की योजनाओं को केंद्र की हरी झंडी मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक स्थिरता का संदेश। अब सबकी निगाहें मकर संक्रांति पर टिकी हैं, जब बिहार की राजनीति में कुछ बड़े बदलाव और नई योजनाओं की घोषणा हो सकती है।

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