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मैथिली-भोजपुरी अकादमी को आवंटित बजट ऊंट के मुंह मे जीरा- अजीत दुबे

अजीत दुबे
दिल्ली विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान आप विधायक वंदना कुमारी ने दिल्ली सरकार की मैथिली-भोजपुरी अकादमी को सलाना आवंटित बजट कम बजट का सवाल उठाया। ध्याननीय है कि दिल्ली सरकार द्वारा हिंदी अकादमी, पंजाबी अकादमी, उर्दू अकादमी, संस्कृत अकादमी, सिंधी अकादमी और मैथिली-भोजपुरी अकादमी का संचालन किया जाता है।
बीते वित्तीय वर्ष में जहां हिंदी अकादमी को 15.75 करोड़ रूपये, उर्दू अकादमी को 12 करोड़, पंजाबी अकादमी को 25.41 करोड़, संस्कृत अकादमी को 6.5 करोड, सिंधी अकादमी को 4.60 करोड़ रूपये का बजट आवंटित किया गया वहीं मैथिली- भोजपुरी अकादमी को महज 1.5 करोड़ का आवंटन हुआ। दिल्ली में पूर्वांचल मूल के 40 से 50 लाख तक की आबादी होने के बावजूद मैथिली-भोजपुरी अकादमी सरकारी उपेक्षा की शिकार है।
मुझे याद है कि भोजपुरी समाज, दिल्ली के सन 2000 के सलाना आयोजन में तत्कालीन विधायक व पूर्व सांसद श्री महाबल मिश्र ने मंचासीन तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित जी से मैथिली-भोजपुरी अकादमी को स्थापित करने की मांग की। इसी आयोजन  में अपने अध्यक्षीय भाषण में मैंने भी शीला दीक्षित जी से आग्रह किया दिल्ली पूर्वांचल की संस्कृति के संवर्धन-संरक्षण, प्रचार-प्रसार के लिए अकादमी स्थापित किया जाए।
करीब आठ वर्षों के संघर्ष और शासन-प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विभिन्न बैठकों के बाद आखिरकार 2008 में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित जी ने मैथिली-भोजपुरी अकादमी को स्थापित किया। मुझे अकादमी का संस्थापक सदस्य बनाया गया। और बाद में मुझे मैथिली-भोजपुरी अकादमी का उपाध्यक्ष भी बनाया गया। इसलिए अकादमी के गठन से लेकर उसके कार्यप्रणाली से मैं परिचित हूँ।
दिल्ली की विधानसभा में इस समय पूर्वांचली मूल के 14 विधायक जीते हैं। विगत् विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के लोगों ने आप की सरकार को दिल खोल कर वोट किया था। ऐसे में सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि पूर्वांचली मूल की बड़ी आबादी को ध्यान में रख कर ही अपने बजटीय आवंटन न्यायसंगत तरीके से करे। पंजाबी अकादमी को 25.41 करोड़ के मुकाबले भोजपुरी अकादमी दी गई 1.5 करोड़ की राशी ऊंट के मुंह में जीरा जैसी ही है। उम्मीद इस दिशा में दिल्ली के माननीय मुख्यमंत्री ध्यान देंगे… और मैथिली-भोजपुरी अकादमी पर्याप्त धन राशि आवंटित करेंगे ताकि पूर्वांचली संस्कृति के संवर्धन-संरक्षण में बजट कोई समस्या न बने।

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