दिल्ली में गूंजा शंखनाद—लाल बाग के राजा के दरबार में बना ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड

दिल्ली: बप्पा के जयकारों और श्रद्धा के सैलाब से तो आप वाकिफ होंगे, लेकिन जब सैकड़ों शंख एक साथ गूंज उठें तो हवा में कैसी आध्यात्मिक ऊर्जा पैदा होती है—इसका नजारा हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में देखने को मिला है।

दिल्ली में आयोजित ‘लाल बाग का राजा – दशम गणपति महोत्सव 2026’ के पावन मौके पर कुछ ऐसा ऐतिहासिक हुआ, जिसने आस्था और एकता की नई मिसाल कायम कर दी है। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महोत्सव के प्रधान राकेश बिंदल की अगुवाई में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक साथ शंखनाद कर वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

राजधानी दिल्ली के पीतमपुरा स्थित डीडीए ग्राउंड, नेताजी सुभाष प्लेस इन दिनों भक्ति के रंग में पूरी तरह रंगा हुआ है। मौका था ‘लाल बाग का राजा, दिल्ली’ के दसवें यानी दशम गणपति महोत्सव का।

पंडाल में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ था। हर तरफ बप्पा के जयकारे, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और महकते फूलों से पूरा इलाका गूंज रहा था। धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ जिस तरह का सांस्कृतिक उत्साह यहां देखने को मिला, उसने इस आयोजन को राजधानी के सबसे बड़े और खास आयोजनों की फेहरिस्त में शामिल कर दिया है।

इस महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण रहा वो ऐतिहासिक पल, जब देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महोत्सव के प्रधान राकेश बिंदल सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ एक मंच पर एकत्र हुए।

जैसे ही सैकड़ों लोगों ने एक साथ शंख उठाया और शंखनाद किया, उसकी गूंज से पूरा डीडीए ग्राउंड और आसपास का इलाका थर्रा उठा। वातावरण में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का ऐसा संचार हुआ कि वहां मौजूद हर शख़्स की आंखें श्रद्धा से भर आईं।

इस अद्भुत और सामूहिक शंखनाद ने न सिर्फ एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया, बल्कि दिल्ली की धरती पर एकता, भाईदूरी और सनातन आस्था की एक ऐसी तस्वीर पेश की जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

लाल बाग के राजा की महिमा से तो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी देश की जनता जुड़ी है, और जब वही भव्य परंपरा दिल्ली के आंगन में उतरी, तो लोगों ने दिल खोलकर इसका स्वागत किया।

इस दशम (10वें) वर्ष में प्रवेश करते हुए आयोजन समिति ने जिस भव्यता के साथ गणपति बप्पा की आराधना की है, उसने साबित कर दिया है कि आस्था की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। बप्पा के दर्शन के लिए राजनेता से लेकर आम जनता तक, हर कोई कतार में खड़ा होकर आशीर्वाद लेता नजर आया।

शंखनाद के इस विश्व रिकॉर्ड के साथ ही ‘लाल बाग का राजा, दिल्ली’ का यह दसवां संस्करण ऐतिहासिक बन गया है।

भक्ति, शक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का यह संगम आने वाले कई सालों तक श्रद्धालुओं के जेहन में जिंदा रहेगा। बप्पा के जयकारों के साथ दिल्ली का यह कोना इन दिनों पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।

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