ग्वालियर में गूंजा राष्ट्रसेवा का संदेश—आरएसएस प्रचारक पर बन रही है बायोपिक
ग्वालियर: सिनेमा की दुनिया में जब भी बायोपिक्स की बात आती है, तो हमारे जेहन में अक्सर क्रिकेटर्स या फिल्मी सितारों की कहानियां आती हैं। लेकिन असली प्रेरणा तो उन लोगों के जीवन में छिपी होती है जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश और समाज के नाम समर्पित कर दिया। इसी कड़ी में अब एक बेहद खास फिल्म की शुरुआत हो चुकी है। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक परम श्रद्धेय लक्ष्मण मार्तंड तराणेकर के जीवन पर आधारित बायोपिक— ‘तारे सो तराणेकर’ की शूटिंग आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है।
फिल्म की शुरुआत किसी फाइव स्टार होटल में नहीं, बल्कि ग्वालियर के सरस्वती शिशु मंदिर, बादलगढ़ के प्रांगण में हुई। तारीख थी 5 सितंबर 2026, सुबह-सुबह का वक्त, वैदिक मंत्रोच्चार, गणेश आरती और नारियल अर्पण के साथ फिल्म का मुहूर्त धूमधाम से संपन्न हुआ। मेकर्स ने शुरुआत ही इतनी पवित्र रखी है, जिससे साफ जाहिर होता है कि फिल्म का विजन कितना साफ और जमीन से जुड़ा हुआ है।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को ‘क्रिएटिव क्रिएचर’ और ‘यूजी फ (UGF)’ के बैनर तले तैयार किया जा रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी शूटिंग असली लोकेशंस और स्कूलों के परिवेश में हो रही है, जिससे पर्दे पर एक ओरिजिनल और रियलिस्टिक फील देखने को मिलेगा।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर लक्ष्मण मार्तंड तराणेकर कौन थे और उनका जीवन क्यों इतना खास है?

वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक ऐसे वरिष्ठ प्रचारक रहे हैं, जिनका पूरा जीवन तपस्या, संगठन के विस्तार, और राष्ट्रसेवा की मिसाल रहा है। उनके व्यक्तित्व में गजब का अनुशासन और समाज के प्रति अटूट प्रेम था। आज की युवा पीढ़ी को जब सोशल मीडिया और फिल्मी चकाचौंध से फुर्सत नहीं मिलती, ऐसे में पर्दे पर एक ऐसे शख्स की कहानी लाना जिसने अपना पूरा जीवन देश के नाम कर दिया—एक बहुत ही सराहनीय कदम है। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कारों का एक दस्तावेज बनने जा रही है।
इस पावन मुहूर्त के गवाह बने संघ परिवार और कला जगत के कई दिग्गज चेहरे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य यशवंत जी इंदापुरकर विशेष रूप से उपस्थित रहे. इसके साथ ही ‘संस्कार भारती’, ग्वालियर महानगर के समस्त कार्यकर्ता भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

सभी ने फिल्म की टीम को अपनी शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि यह बायोपिक न सिर्फ ग्वालियर बल्कि पूरे देश में एक नई प्रेरणा जगाएगी. ग्वालियर और अंचल के कला प्रेमियों में भी इस बात को लेकर भारी उत्साह है कि उनकी अपनी सांस्कृतिक धरती पर इतनी बड़ी और सार्थक फिल्म की शूटिंग हो रही है।
आज के दौर में जब बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ मसाला फिल्मों का बोलबाला रहता है, तब ‘तारे सो तराणेकर’ जैसी फिल्में सिनेमा को एक नया गहराई और अर्थ देती हैं। लक्ष्मण मार्तंड तराणेकर जी के संघर्ष और राष्ट्रसेवा के पन्नों को जब बड़े पर्दे पर उतारा जाएगा, तो यकीनन वो दृश्य हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देंगे। मेकर्स की ये कोशिश है कि उनके जीवन का हर एक पहलू पूरी प्रामाणिकता के साथ दर्शकों तक पहुंचे।
ग्वालियर की इस ऐतिहासिक धरती से उठी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाती है, ये देखना दिलचस्प होगा।
