उत्तराखंड में रंग लाई जेन-जी को मजबूत करने की धामी सरकार की मुहिम, इतनी सरकारी नौकरियां कभी नहीं मिलीं

देवभूमि उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार जिस तरह से युवाओं के बहुमुखी विकास पर ध्यान दे रही है, उससे लगता है कि राज्य की कुछ प्रमुख समस्याओं का स्थाई समाधान जल्द ही हो जाएगा। असल में होता यह है कि प्रशासन जब समस्या की जड़ पर प्रहार नहीं कर ऊपर-ऊपर से उसके फौरी निदान की कोशिशों में ही जुटा रहता है, तब ऐसे प्रयासों के गंभीर नतीजे नहीं निकल सकते। लेकिन अब ऐसा नहीं है। धामी सरकार अब समस्याओं का गंभीरता से अध्ययन कर उनकी जड़ों पर प्रहार की नीति पर काम कर रही है, तो उसके अच्छे परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

समस्या की जड़ पर प्रहार
ऐसा ही एक मसला है रोजगार के लिए उत्तराखंड से युवाओं का पलायन। पलायन रोकने के लिए धामी सरकार तमाम स्तरों पर असरदार काम करती नजर रही है। ऐसा नहीं है कि पहले की सरकारों ने इस ओर कोशिशें नहीं कीं, लेकिन उन्होंने समस्या की जड़ों पर प्रभावी प्रहार नहीं किए। अब धामी सरकार ने नीति में बदलाव किया है, तो नतीजे भी साफ दिखाई दे रहे हैं।

दोगुनी से ज्यादा सरकारी नौकरियां
उदाहरण के लिए, मुख्यमंत्री धामी के अब तक के कार्यकाल में 34 हजार से ज्यादा युवाओं को राज्य में सरकारी नौकरियां मिली हैं। गौरतलब है कि पहले की तमाम सरकारों के कुल कार्यकाल में युवाओं को मिली सरकारी नौकरियों का आंकड़ा इसके आधे से भी कम है। सवाल है कि ऐसा क्यों हुआ? क्या पहले की सरकारें सरकारी नौकरियां देने को लेकर गंभीर नहीं थीं? ऐसा नहीं था।

नियमित हुई सरकारी नौकरियां
पहले होता यह था कि पेपर लीक, नकल और प्रतियोगी परीक्षाओं में दूसरी तरह की गड़बड़ियों पर रोक के लिए असरदार कदम नहीं उठाए गए। नतीजा यह होता रहा कि नौकरियों के लिए बहुत सी प्रवेश परीक्षाओं के अंतिम नतीजे आ ही नहीं पाते थे। प्रशासनिक और अदालती अडंगों की वजह से प्रतियोगी परीक्षाएं कई-कई बार रद्द हो जाती थीं। नतीजे लटक जाते थे। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती प्रक्रिया अनियमित थी, लिहाजा रिक्त पदों पर नियमित भर्तियां हो ही नहीं पाती थीं। इस प्रमुख समस्या से निपटने का उपाय धामी सरकार से पहले नहीं किया गया। अब धामी सरकार ने नए पारदर्शी उपाय किए हैं, तो नियमित भर्तियां भी शुरू हो गई हैं।

असरदार नकल विरोधी कानून
धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए कड़ा नकल विरोधी कानून बनाया, जिसका बहुत असर हुआ है और युवाओं को लगातार निर्बाध रूप से सरकारी नौकरियां मिल रही हैं। राज्य में नकल विरोधी कानून फरवरी, 2023 में लागू किया गया था। इसमें नकल माफिया और संगठनों के लिए आजीवन कारावास और और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अपराधियों की अवैध संपत्ति भी जब्त की जा सकती है।

नकल विरोधी कानून प्रश्नपत्र छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस, सेवा प्रदाता और कोचिंग संस्थानों पर भी लागू होता है। इसके तहत पहली बार नकल करते पकड़े जाने पर तीन साल की जेल और पांच लाख रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर नौ महीने की अतिरिक्त कैद का प्रावधान है। दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 साल की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। दोषी परीक्षार्थी पर कई साल या आजीवन बैन भी लगाया जा सकता है।

तीन साल में ही बदली तस्वीर
बेहद सख्त नकल विरोधी कानून लागू किए जाने के बाद का आंकड़ा उल्लेखनीय रहा है। उत्तराखंड सरकार के मुताबिक वर्ष 2023 से लेकर जून, 2026 तक राज्य में कुल 33 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्त किया जा चुका है। इससे पहले केवल एक हजार के आसपास सरकारी नौकरियों की राह खोली जा सकी थी। अब आगे यह रफ्तार जारी रहेगी, इसमें अब किसी को कोई संदेह नहीं रहना चाहिए। साफ है कि अगर उत्तराखंड सरकार की तरह कोई भी सरकार समस्या की जड़ पर प्रहार करेगी, तो उसके सकारात्मक नतीजे सामने आने में देर नहीं लगेगी।

उलटी होगी पलायन दर
जाहिर है कि नियमित रूप से सरकारी नौकरियां मिलने से राज्य से युवाओं का पलायन रोकने में मदद मिलेगी। राज्य से दूसरी जगहों पर जा चुके बहुत से प्रतिभाशाली युवा अब अपनी जड़ों की ओर लौटने की योजना बनाने लगे हैं। सरकारी नौकरियों के साथ ही धामी सरकार युवाओं के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और देवभूमि उद्यमिता योजना जैसी पहल भी चला रही है।

युवाओं के लिए चार बड़े ऐलान
स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवाओं के कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जुड़ी चार बड़ी घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में विशेष औद्योगिक पार्क के जरिए पहाड़ी इलाकों में स्थानीय संसाधनों और युवाओं की क्षमता के हिसाब से रोजगार और उद्यमिता के मौके बनाने के लिए ठोस पहल की है। इसके साथ ही 18 से 30 साल की उम्र के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार और उद्यमिता प्रोत्साहन योजना की घोषणा की गई है।

युवाओं के लिए मौके ही मौके
इसके जरिए उत्तराखण्ड के युवा आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों की मदद से उद्यमिता और कौशल की ट्रेनिंग फ्री ले सकेंगे। योजना के तहत उद्यम स्थापित करने के लिए सरकार बैंक कर्ज की 30 प्रतिशत राशि अनुदान के तौर पर देगी। इससे युवाओं को कारोबार शुरू करने के लिए ट्रेनिंग के साथ ही वित्तीय मदद भी मिलेगी। पहाड़ी जिलों के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अब बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इसके तहत 11वीं और 12वीं के 10 हजार होनहार छात्र-छात्राओं को घर बैठे मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग देने के लिए धामी सरकार ने सात करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

युवा आयोग की स्थापना
सरकार ने युवाओं से जुड़े विषयों को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश में पहले ‘युवा आयोग’ की स्थापना का भी फैसला किया है। युवा आयोग शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और दूसरे संबंधित विषयों से जुड़े सुझावों और नीतिगत पहल के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम कर सकता है।

सीमाई क्षेत्रों में नई पहल
मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती गांवों के युवाओं, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को स्वरोजगार और उद्यम लगाने के लिए अतिरिक्त सहायता और प्रोत्साहन देने का ऐलान किया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर आजीविका के मौके बढ़ाने के साथ ही पलायन की चुनौती से निपटने में भी यह पहल महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है। कुल मिलाकर धामी सरकार चाहती है कि युवा सिर्फ रोजगार पाने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें।

धामी से जुड़ी जेन-जी
बड़ी संख्या में उत्तराखंड की जेन-जी और जेन-अल्फा धामी सरकार से जुड़ रही है। इसका सुबूत यह है कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान से राज्य की कक्षा 11वीं और 12वीं के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने विचार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे हैं। सीएम धामी ने 10 अगस्त को ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों से अपील की थी कि वे 24 अगस्त तक अपने विचार पोर्टल पर साझा करें। राज्य में कक्षा 11वीं और 12वीं में कुल 2,96,426 विद्यार्थी सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं।

युवाओं के साहस को सम्मान
धामी सरकार ने आपदा और कठिन हालात से जूझने वाले उत्तराखंड में बच्चों और युवाओं के अदम्य साहस को भी नई पहचान देने की पहल की है। प्राकृतिक आपदाओं या दुर्घटनाओं के दौरान असाधारण साहस दिखाने वाले बच्चों को ‘राज्य बाल वीरता पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। साफ है कि उत्तराखंड की धामी सरकार युवाओं पर पूरा फोकस कर रही है, ताकि राज्य का भविष्य उज्ज्वल बनाया जा सके।
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लेखक: रवि पाराशर

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