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भारत सरकार ने की समुद्री सुरक्षा चाक-चौबंद

सरकार ने समुद्री सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है। सरकार ने कोस्ट गार्ड के लिए 31,748 करोड़ रुपये की लागत वाले ‘निर्णायक पांच वर्षीय ऐक्शन प्रोग्राम’ को मंजूरी दे दी है। बता दें कि कोस्ट गार्ड आर्मी, वायुसेना और नेवी के बाद डिफेंस मिनिस्ट्री के अंतर्गत आने वाला सबसे छोटा सशस्त्र बल है। हालांकि, मुंबई पर 2008 में हुए 26/11 के हमले के बाद इसकी भूमिका बेहद अहम हो चली है।

सूत्रों के मुताबिक, इस ऐक्शन प्लान के तहत कोस्ट गार्ड को पट्रोल वाहन, बोट्स, हेलिकॉप्टर्स, एयरक्राफ्ट्स और अन्य अहम साजोसामान से लैस करने की तैयारी है। डिफेंस सेक्रटरी संजय मित्रा की अगुआई वाली एक बैठक में इस महीने की शुरुआत में इस मसौदे को मंजूरी दी गई। मकसद 2022 तक कोस्ट गार्ड को 175 शिप और 110 एयरक्राफ्ट से लैस फोर्स करना है, ताकि न केवल ऑपरेशनल कमियों को पूरा किया जा सके, बल्कि तटीय सुरक्षा को चाक-चौबंद किया जा सके। इसके अलावा, द्वीपों, समुद्र के अंदर मौजूद प्राकृतिक और सैन्य संसाधनों की हिफाजत करना, स्मगलरों और समुद्री डकैतों से लड़ना और समुद्र में तेल फैलने और प्रदूषण को रोकना है।

भारत का तटीय विस्तार 7,516 किमी में है। कोस्ट गार्ड की क्षमता फिलहाल बेहद सीमित है। इसके बेड़े में 60 शिप, 18 हॉवरक्राफ्ट और 52 छोटे इंटरसेप्टर बोट्स शामिल हैं। जहां तक हवाई बेड़े का सवाल है, कोस्ट गार्ड के पास 39 टोही विमान, 19 चेतक हेलिकॉप्टर और चार अडवांस्ड ध्रुव हेलिकॉप्टर्स हैं। बता दें कि मुंबई हमले के बाद देश की समुद्री सुरक्षा में बड़ी खामियां उभरकर सामने आई थीं।

एक सूत्र ने बताया, ‘कोस्ट गार्ड के लिए 65 शिप और इंटरसेप्टर बोट्स निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से हेलिकॉप्टरों की खरीद प्रक्रिया में है।’ बता दें कि हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को 16 देसी ध्रुव हेलिकॉप्टरों का ऑर्डर दिया जा चुका है। इसके अलावा, एयरबस कंपनी से 14 टि्वन इंजन EC-725 टैक्टिकल हेलिकॉप्टरों की खरीद का प्रस्ताव मंजूरी के आखिरी चरण में है। इन हेलिकॉप्टरों से 30 लोग तक ढोए जा सकते हैं।

– ऋषभ अरोड़ा

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