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Yoga Lovers ने “अस्थमा से निजात पाने के सूत्र” पर कार्यशाला का आयोजन किया।

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंचम योग गुरु सुनील सिंह जी के सानिध्य में Yoga Lovers ने 19.11.2017 को डॉ पुष्पा शर्मा के सहयोग से बानगियाँ समाज मंदिर के प्रांगण में सप्तमी कार्यशाला का आयोजन डॉ मान्या दत्ता, श्री अनिल कौल और श्री महेश केसर के संरक्षण में आयोजित किया गया।

इस कार्यशाला का शुभारंभ ॐ की ध्वनि के साथ योगी शुभम के सहयोग से योगिनी मंजू छेत्री ने मंच का कार्यभार बड़ी ही कुशलता से संभाला।

इस कार्यशाला की प्रथम वक्ता एक्यूपंक्चर विशेषज्ञ डॉ पुष्पा शर्मा ने प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर एवं रंग चिकित्सा को प्रयोग करने की विधि बताई एवं अस्थमा से किस प्रकार से रोग मुक्त हुआ जाए इन पद्धतियों का प्रयोग कर स्वस्थ रहने के उपचार एवं उपाय बताए। इन चिकित्साओं द्वारा अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने की तकनीक बताई। डॉ पुष्पा ने बताया कि सही तरीके से श्वास न लेने की प्रक्रिया को अस्थमा कहते हैं। अस्थमा के रोगी को धूल मिट्टी प्रदूषण आदि से बच कर रहना चाहिए। अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए नित्य प्रति प्रातः निरनय काल में गुनगुना पानी अवश्य पियें। भोजन के पश्चात गुड़ अवश्य लेना चाहिए। शहद के साथ मुन्नका भी लिया जा सकता है। अधिक कैलोरी और वसा युक्त भोजन का त्याग करना चाहिए। गाजर, टमाटर का सेवन सलाद रूप में अवश्य करना चाहिए, हरी शाक सब्जियों को भोजन में प्राथमिकता देनी चाहिए एवं रात को हल्का भोजन करना चाहिए का परामर्श देते हुए ठंडी एवं वसा चीज़ों से परहेज़ करने को कहा। तैलीय पदार्थों को त्यागते हुये बताया कि अदरक, निम्बू के रस में शहद मिलाकर सेवन किया जाए तो लाभ मिलता है। खट्टा एवं मिर्च मसालों के साथ साथ अरबी, कचालू एवं फूलगोभी को भी निषेध बताया है और बताया कि उड़द की दाल भी नुकसान करती है। डॉ पुष्पा ने फेफड़ों से सम्बंधित कई एक्यूप्रेशर बिंदू भी बताए। काँच की बोतल में हरे, नीले, लाल और पीले रंग की बोतल में पानी को सूर्य की रौशनी में चार्ज करके लेने से भी अस्थमा रोग ठीक हो जाता है। रोग से जल्दी छुटकारा पाने के लिए एक्यूपंक्चर से भी उपचार कर सकते हैं।

इस कार्यशाला के द्वितीय वक्ता अंतर्राष्ट्रीय पञ्चम योग गुरू सुनील सिंह ने योगिनी मोसमी के सहयोग से योग, आसन, प्राणायाम, ध्यान आदि से अभ्यास करवाते हुए नाड़ी शोधन प्राणायाम को प्राथमिकता देते हुए बताया कि यदि हम इसे निरन्तर करते रहे तो शीघ्र अतिशीघ्र अस्थमा जैसे रोग से निजात पा सकते हैं।

सूर्य चन्द्र नाड़ियो का भेद बताते हुए सही प्रकार से श्वास लेने की प्रक्रिया बताई।अस्थमा से निजात पाने के लिए नियमित रूप से आसन करने का सुझाव दिया एवं अभ्यास करवाया। नाड़ी शोधन प्राणायाम के साथ साथ कुछ आसन भी आवश्यक हैं जैसे कपालभाति प्राणायाम, अर्द्ध मत्स्येंद्र आसन, पवनमुक्तासन, सेतुबंध आसन, भुजंगासन, अधोमुख श्वान आसन, बध कोण आसन, एवं शवासन आदि एवं गहरी यौगिक श्वास क्रिया से हम अपने फेफड़ों को स्वस्थ रख सकते हैं, उन्हें अधिक ऊर्जावान एवं अधिक क्षमता वाले बना सकते हैं। इन आसनों के माध्यम से मन को शांत कर तन्त्र को सक्रिय करने की विधि बताई। इससे सभी नाड़ियाँ स्वच्छ एवं स्वस्थ रहती हैं और रक्त संचार की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से होती है। योग गुरू ने बताया कि जीवन को सदैव तनाव मुक्त रखना चाहिए। इसके लिए उन्होंने ताली योग के साथ साथ हास्य योग भी करवाया एवं लोगों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उनकी शंकाओं का धैर्यपूर्वक समाधान बताया।

इस कार्यशाला में लगभग 60 व्यक्तियों ने भाग लिया जिसमें वृद्धों के साथ साथ युवाओं की संख्या भी सम थी। युवा वर्ग Yoga Lovers की कार्यशाला में ज्ञान प्राप्त करने आता है और वृद्ध अपनी बीमारी से निजात पाने के लिए आते हैं। इस कार्यशाला में भाग लेने के लिए जयपुर से भी लोग आए हुए थे।
सुश्री अनुजा रंजन ने अंतरराष्ट्रीय पञ्चम योग गुरू सुनील सिंह के चित्रों को केनवास पर उकेर कर अपनी अनूठी प्रतिभा का प्रदर्शन किया जिसे देखकर सब अचंभित रह गए।

इस कार्यशाला में अल्टरनेटिव मेडिसिनज़ के ख्याति प्राप्त एक्यूपंक्चर विशेषज्ञ डॉ राजेश भयाना जी भी उपस्थित थे। Yoga Lovers के Women Wing का गठन करते हुए उनका सम्मान भी किया गया जो कि तन मन धन से जनसेवा में कार्यरत रहते हैं।

अध्यात्म साधना केंद्र के कोर्डिनेटर योगी सुनील कुमार जी ने भी उपस्थिति दे Yoga Lovers की core टीम का मनोबल बढ़ाया।

Yoga Channel के लगभग सभी सदस्यों ने अपनी उपस्थिति देकर शोभा बढ़ाई एवं योग से सम्बंधित वस्तुओं का Stall भी लगाया। योगी प्रकाश दूबे एवं Pilatis Expert योगी सचिन के सहयोग से जलपान लेते हुए कार्यशाला सम्पन्न हुई।

YOGA LOVERS  का प्रयास प्रत्येक कार्यशाला में जनजागरण में विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्त हो स्वस्थ रहने की जागरूकता देना है।

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