You are here
Home > NEWS > रेप के आरोपों के बावजूद, क्यों नहीं डिगा महिला अनुयायियों का गुरमीत राम रहीम पर से विश्वास- रवि पाराशर

रेप के आरोपों के बावजूद, क्यों नहीं डिगा महिला अनुयायियों का गुरमीत राम रहीम पर से विश्वास- रवि पाराशर

 

वरिष्ठ पत्रकार रवि पाराशर भारतीय महिलाओ की उस मनोदशा को विश्लेषित कर रहें हैं जो उन्हें राम रहीम जैसे ढोंगी बाबाओं के जाल में फंसाती है।

डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम इंसा को 20 साल की सज़ा ने साबित कर दिया है कि भारतीय लोकतंत्र में शक्ति संपंन्नों को अपराध करने की छूट नहीं है। साबित हो गया है कि इंसाफ़ का राज क़ायम है और क़ायम रहेगा। लेकिन जिस तरह इस अपराधी बाबा के समर्थन में लोगों ने हिंसा की, उससे एक सवाल तो खड़ा होता ही है कि आस्था के नाम पर ऐसे लोग मासूमों को भी अपराधी कैसे बना देते हैं? लोगों को कैसे यह यक़ीन हो जाता है कि ऐसे ढोंगी, अपराधी भगवान हैं?

ख़ास तौर पर महिलाएं किस तरह इन अपराधियों पर अगाध श्रृद्धा करने लगती हैं? ग़ौर करें, तो भारतीय महिलाओं की यह एक प्रवृत्ति ही यह समझने के लिए काफ़ी है कि भारत की आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी उनके प्रति सामाजिक व्यवस्था और सरकारों का रवैया कितना उदासीन रहा है? असल में भारत में महिलाओं को दिया जाने वाला दोयम दर्जा इसके लिए ज़िम्मेदार है। हर मामले में महिलाओं को पीछे रखने की मानसिकता की वजह से वे ख़ुद को असुरक्षित महसूस करती हैं और यही वजह है कि उन्हें ऐसे ढोंगी बाबाओं में अपना रहनुमा नज़र आने लगता है।

ऐसा नहीं है के भारत में महिलाओं के जीवन सुधार की तरफ़ सोचा ही नहीं गया है, लेकिन सोच पर अमल के मामले में भारतीय पुरुष समाज पूरी तरह ईमानदार साबित नहीं हो पाया है। जब तक बच्चियों के प्रति परिवार और समाज की सोच परिपक्व नहीं होती, तब तक ख़ासकर ग्रामीण अंचलों में महिलाएं इस तरह की मानसिक पराधीनता से मुक्त नहीं हो पाएंगी। काम हो रहा है, लेकिन तेज़ रफ़्तार की ज़रूरत है। देश की समृद्धि की राह महिलाओं की मानसिक मज़बूती के आधार पर ही बन पाएगी, यह समझने की ज़रूरत है।

 रवि पाराशर

Leave a Reply

Top