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भविष्य को संजो लेना चाहता हूँ, अपनी कला के माध्यम से- प्रतुल दाश

नई दिल्ली | प्रतुल दाश की प्रदर्शनी में दाखिल होते ही ऐसा लगा मनो हम किसी दूसरी दुनिया मे आ गए हो और ऐसा लगा जैसे येपेंटिंग हमसे कुछ कहना चाहती है तभी हमरे नजर पड़ती  है  उनकी पेंटिंग ‘सेविंग फॉर द फ्यूचर’ पर. इसमें प्रतुल का सेल्फ पोर्ट्रेट है, और हैं वे सब फूल जो आपने हमने आज तक देखें होंगें और शायद न भी देखे हों. भरपूर फूल और खूबसूरत फूल, इस कदर फूल कि खुशबु का भ्रम होने लगता है. और यही जीत है प्रतुल के कलाकार की.

उनका कहना हैं मैं भविष्य को संजो लेना चाहता हूँ, अपनी कला के माध्यम से. कहीं ऐसा हो कि हमारे आगे की पीढ़ी को इनके दर्शन दुर्लभ हो जाएँ तो कम से कम मेरी कला ही उन्हें इनके दर्शन करवा सकेगी. इस पेंटिंग में कई पशु-पक्षी और जीव भी हैं. वे भी प्रतुल की इसी कवायद के तहत हैं कि  भविष्य को कहीं कला में संजो कर रख लिया जाए.

प्रतुल बड़े कैनवास पर तीन डायमेंशन दिखाते हुए चौथे और पांचवें डायमेंशन को आपके मन मस्तिष्क पर अंकित कर देते हैं. उनके हर चित्र में जीवन जैसे गाता हुया दिखाई पड़ता है.

‘द लास्ट वारियर’ में कैक्टस के नीले फूल बारहसिंघे के बड़े बड़े सींगों से प्रतिस्पर्धा करते हुए मालूम होते हैं. आप को लगता है ये जीवन की जंग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जहाँ हर पल स्थूल और सूक्ष्म के बीच एक न पाट सकने वाली खाई बनी रहती है. प्रतुल का कहना है कि उन्हें एक कहानी से इस पेंटिंग की प्रेरणा मिली, जिसमें लेखक कैक्टस के एक फूल के भीतर चला जाता है जहाँ उसे एक जंगल मिलता है और एक नयी दुनिया भी.

द डियर’ पेंटिंग में एक अनोखी रात का चित्रण है. ये पेंटिंग प्रतुल ने दो कैनवास पर बना कर जोड़ी है. हिरण एक ऊंची जगह से छलांग लगा रहा है, वह अपनी ऊंची कूद के ठीक मध्य में है. कुछ लोगों को उसके मरे हुए होने का भी भ्रम होने लगता है लेकिन गौर से देखें तो हिरण की आँखों में अजीब ज़िंदगी भरी तरलता है जो उसके जीवन से भी अधिक जिंदा होने का सबूत देती है. आसमान के तारे रात को सपनों की ललक से भर रहे हैं.  ज़मीन पर रेगिस्तान जैसा वीराना है मगर पत्थरों से चिना हुया. और उसी वीराने में लाल रंग के चटक फूल भी खिले हुए हैं. पूरी पेंटिंग जैसे किसी दिल के उद्गारों को लफ़्ज़ों में न कह कर रंगों से कहने की कोई नयी तदबीर है.

‘द नाईट लाइफ ऑफ़ अ लॉस्ट प्रिंस’ में एक साधारण से लड़का है, जिसके तन पर सिर्फ एक जांघिया है. गरीब लड़का जिसकी सारी दुनिया आँखों में भरे सपनों में समाई हुयी है. रात के अँधेरे में वो फूलों और तितलिओं के सपनों में खोया अपनी कमियों की तरफ से आँखें मूंदे हुए है.

प्रतुल की इस प्रदर्शनी में फूलों और तितलिओं की भरमार है. प्रतुल एक नजर से आशावादी कलाकार के तौर पर उभरते हैं, जिन्हें भविष्य को लेकर अंदेशे तो हैं, मगर उनके मन में आशंकाओं से ज्यादा आशाएं बसी हुयी हैं और वे ही बार बार उनकी कला में नज़र आती हैं.

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