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महिला सशक्तिकरण के लिए ‘स्व’ को पहचानकर ‘स्वावलंबी’ बनना है आवश्यक – जयंत सहस्रबुद्धे

बोल बिंदास-नई दिल्ली,  विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर दिल्ली में ‘शक्ति विज्ञान भारती’ संगठन द्वारा तीन दिवसीस वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है. वेबिनार के उदघाटन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री  श्री जयंत सहस्रबुद्धे कहा की महिला सशक्तिकरण के लिए उन्हें स्वावलंबी बनाना होगा. उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी को अपने अपने स्व को जागृत करना होगा क्योंकि स्व से ही स्वाभिमान जागृत होगा। श्री सहस्रबुद्धे ने बताया कि हम क्या थे? अर्थात् हमारी शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति कितनी उत्कृष्ट एवम् उन्नत थी, पर आज हम क्या हो गए? और हमें  क्या होना है? इस पर विचार करना है। अस्मिता को जागृत करने पर ही हमारा देश गौरवशाली स्थिति में पहुंच सकता है। रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उन्होंने आचार्य प्रफुल्ल राय के अनुसंधान का उदाहरण प्रस्तुत किया जिसको अंतरराष्ट्रीय ‘नेचर पत्रिका’ में महत्व दिया गया है।

शक्ति संगठन की अध्यक्षा सुधा तिवारी ने इस अवसर पर ‘शक्ति संगठन’ इकाई के उद्देश्यों को बताते हुए कहा कि संगठन का उद्देश्य विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण से तात्पर्य प्रत्येक क्षेत्र से है। क्योंकि विज्ञान हमारी संस्कृति, परंपरा में बसा हुआ है जिसे हमें संगठन के माध्यम से संजोकर  का रखना है।

गौरतलब है कि शक्ति संगठन के अंतर्गत विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में महिलाओं का सशक्तिकरण का कार्य किया जा रहा है। इस प्रयोजन से हुए इस अभ्यास वर्ग वेबिनर का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर स्मिता सुंदरम द्वारा किया गया, जिसमें ‘राष्ट्रीय शक्ति’ से उमा, प्रोफेसर अंकिता एवम् बिंदु सुराज, प्रोफेसर रजनी जोशी, डॉ उमा, रंजना आर्या, किंकिणी जी, शक्ति की विभिन्न इकाइयों से रजनी, स्मिता शर्मा व अन्य स्वयं सेविकाओं  सहित 45 से अधिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

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