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नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया से फिल्मों के 9200 प्रिंट्स गायब

आपने फिल्मों की कहानी चोरी होने के बारे में जरूर सुना होगा. लेकिन क्या आपने कभी फिल्मों के प्रिंट चोरी या गायब होने के बारे में सुना है? नहीं सुना है तो हम आपको बता दें कि नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया से फिल्मों के 9200 प्रिंट्स गायब हो गए हैं.

इनमें मशहूर भारतीय फिल्मकारों और विदेशी फिल्मकारों की क्लासिक फिल्में भी शामिल हैं. दरअसल 2010 में नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया ने पुणे की एक फर्म को अपनी सभी रील्स पर बारकोड लगाने की जिम्मेदारी दी थी. लेकिन कंपनी को इस दौरान पता लगा कि कई फिल्में कागजी रिकॉर्ड में तो हैं लेकिन उनकी रील्स फिजिकली मौजूद नहीं हैं,

फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक रील्स के 51 हजार 500 डिब्बे और 9200 प्रिंट गायब हैं. जबकि एनएफएआई के मुताबिक उसके यहां 1.3 लाख फिल्मों की रील्स मौजूद है. एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक ये खुलासा एक आरटीआई के जरिए हुआ है.

रिपोर्ट के मुताबिक, गायब होने वाले प्रिंट्स में सत्यजीत रे की ‘पाथेर पंचाली’ , मेहबूब खान की ‘मदर इंडिया’ , राज कपूर की ‘मेरा नाम जोक’र और ‘अवारा’ और गुरु दत्त की ‘कागज के फूल’ समेत कई निर्देशकों की फिल्मों की प्रिंट मौजूद नहीं हैं. कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों के प्रिंट्स का भी अता पता नहीं है . इनमें ‘बैटलशिप पोटेमकिन’, ‘बाइसाइकिल थीफट, जापानी फिल्मकार अकीरा कुरोसोवा की ‘सेवन समुराय’ ‘नाइफ इन द वाटर’ जैसी फिल्मों के अलावा सौ से ज्यादा साइलेंट फिल्में भी गायब हैं.

इस रिपोर्ट में ये दावा भी किया गया है कि 2015 में 17595 फिल्म रील्स बोरों में भरकर रखी गई थीं जिनमें से कई नष्ट हो चुकी हैं और सिर्फ  2645 फिल्म रील्स ही ऐसी थी जिन्हें चलाया जा सकता था. यानी हो सकता है कि फिल्मों के शौकीन कई ऐसी फिल्मों को ना देख पाएं जिन्हें फिल्मी दुनिया की सबसे महान फिल्मों में शामिल किया गया है.

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