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राष्ट्रहित के लिए स्वदेशी आधारित नीति अपनाने की है आवश्यकता – डॉ. अश्विनी महाजन

26 सितम्बर, नई दिल्ली | स्वदेशी का स्वतंत्रता आन्दोलन में अहम योगदान रहा. अंग्रेजों ने देश को ना सिर्फ राजनीतिक रूप से गुलाम बनाया बल्कि आर्थिक रूप से भी गुलाम बनाया. जिसका असर आज तक दिखाई देता है. हमारे देश के पास आयात करने के लिए विदेशी मुद्रा का भंडार सीमित है, यह हमारे देश के राजनेताओं ने नहीं कहा अपितु यह अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने कहा कि हमें अपनी नीतियों को अपने अनुसार बनाना होगा. भारत में स्वदेशी जागरण मंच ने हमेशा से वैश्वीकरण का विरोध किया है साथ ही भारत के लगभग सभी विचारधारा के लोगों ने इसका विरोध किया. हम सभी प्रकार की विचारधारा का सम्मान करते हैं. हमारी राष्ट्रवादी विचारधारा हैं. राष्ट्रहित के लिए स्वदेशी पर आधारित नीति की आवश्यकता है. स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संयोजक डॉ. अश्विनी महाजन ने यह विचार व्यक्त किये.

शरन्या और राष्ट्र सेविका समिति के संयुक्त तत्वावधान में आज स्वदेशी के विषय पर भीमराव अम्बेडकर कॉलेज में तीन सत्रों में युवा सम्मेलन आयोजित किया गया. श्री अश्वनी महाजन ने बताया कि देश में किसानों की दशा ठीक नहीं है, देश के 60 प्रतिशत लोग कृषि से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं, इसके बावजूद देश की जीडीपी में कृषि का योगदान 15 प्रतिशत है, जो कृषि की दुर्दशा को दर्शाता है. गाँव की तुलना में प्रति व्यक्ति आय का प्रतिशत शहरों में कही अधिक है, यह चिंता का विषय है, इस कारण गाँव से शहरों की ओर पलायन तेजी से बढ़ा है, फलस्वरूप देश में कृषि का संकट और बढ़ा है.

सेमीनार के समापन पर राष्ट्र सेविका समिति की सह प्रान्त कार्यवाहिका विदुषी जी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया .

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