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भारत की पहचान के स्वर को ही ध्वनित किया है पांचजन्य और ऑर्गनाइजर ने – डॉ. मनमोहन वैद्य

नई दिल्ली, 22 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य एवं सूचना प्रसारण मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने आज साप्ताहिक पत्र पांचजन्य एवं ऑर्गनाइजर के विशेषांकों का विमोचन किया। भारत प्रकाशन के तत्वावधान में पांचजन्य और ऑर्गनाइजर के 70 वर्ष पूर्ण होने पर नेहरु मेमोरियल सभागार, तीनमूर्ति भवन में इन दोनों राष्ट्रवादी साप्ताहिकों की गौरवशाली यात्रा पर प्रकाश डालने के निमित्त यहाँ समारोह आयोजित किया गया। आरएसएस के दिल्ली प्रान्त संघचालक एवं भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक श्री आलोक कुमार, पांचजन्य ऑर्गनाइजर के समूह सम्पादक श्री जगदीश उपासने, पांचजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर, ऑर्गनाइजर के संपादक श्री प्रफुल्ल केतकर इस अवसर पर मंचासीन थे।

डॉ. मनमोहन वैद्य ने बताया कि ऑर्गनाइजर और पांचजन्य ने भारत की पहचान को स्वर देने का काम किया है। इन दोनों ही पत्रों के भारत के स्वर को ही ध्वनित किया है, साथ देने वाले भले ही बदलते रहे हों। पांचजन्य ऑर्गनाइजर की यह दीर्घ संकल्पित यात्रा आसन नहीं थी। संसाधनों का अभाव था लेकिन कार्यकर्ताओं की ध्येयनिष्ठा और विचार के सत्य की ताकत के कारण यह सफलता प्राप्त हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघ के मुख पत्र हैं। जिस विचार को लेकर संघ चला वही विचार इनके लेखों में दिखाई देते हैं, इसलिए यह भ्रम पैदा होता है। किन्तु अध्यात्म के आधार पर देश को जोड़े रखने का विचार संघ का विचार वास्तव में भारत का विचार है, जिसको ऑर्गनाइजर और पांचजन्य ने भी अंगीकार किया। इनकी प्रकाशन संस्था का नाम भी भारत प्रकाशन इसीलिये है। यह राष्ट्रीय विचारों की पत्रिका है, संघ के विचारों की प्रतिध्वनि यहाँ के लेखों में अवश्य मिलता है। संघ का विचार संघ के सरसंघचालक, सरकार्यवाह, सह सरकार्यवाह तथा प्रचार टोली के अधिकारीयों के वक्तव्यों में प्रकट होता है।

डॉ. वैद्य ने बताया कि आज दो तरह के भारत का चित्र समाज में दिखता है, एक का केंद्र पश्चिम में है जो अभारतीय अवधारण है, दूसरे की जड़ भारत से ही जुडी है, इनके बीच का संघर्ष आज दिखाई देता है। एक का केंद्र जेएनयू है, एक का बीएचयू है। सब मार्ग सामान है यह केवल बात भारत मानता है। अब तक का भारत भारत को ही नकार रहा था, अब भारत की बात करने वाले शक्तिशाली हो गए हैं इसलिए विश्व में भारत का मान बढ़ रहा है। भारत की अध्यात्म आधारित संस्कृति भारत जो जोड़े रख सकने में सक्षम है, पांचजन्य और ऑर्गनाइजर की सफलता मूल मंत्र भी यही है कि उसने भारत की अध्यात्म की परंपरा को नहीं छोड़ा।

श्रीमती स्मृति ईरानी ने कहा कि 70 साल पहले किसने सोचा होगा की नेहरु मेमोरियल में पांचजन्य ऑर्गनाइजर का कार्यक्रम होगा। कलम की असली ताकत तमाम प्रहरों और प्रलोभन के बावजूद इन दोनों साप्ताहिकों में आज भी अक्षुण है। उन्होंने कार्यक्रम की प्रसंशा करते हुए कहा कि उन्होंने पुराने सहयोगियों भुलाया नहीं और यहाँ इस अवसर पर सम्मानित किया, यह भारतीय विचार की ही महत्ता है। कुछ लोग यह मानते हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का वो ही प्रतिनिधित्व करते हैं। पांचजन्य, ऑर्गनाइजर के सन्दर्भ में यह लोग पूर्वाग्रह से ग्रसित रहते हैं जबकि हम अपने विरोधियों को भी अपने पृष्ठों में सम्मानपूर्वक स्थान देते हैं। उन्होंने प्रसंशा करते हुए बताया कि विज्ञापन के माहौल में भी एक विशेष वर्ग से विज्ञापन की लालसा छोड़कर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र शक्ति के रूप में बने रहना पांचजन्य, ऑर्गनाइजर की बहुत बड़ी उपलब्धि है। हिंदी और अंगरेजी के आलावा प्रांतीय भाषाओं में भी इनके संस्करण निकालने होंगे क्योंकि अँधेरा बहुत है और दिये बहुत कम।

पांचजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर ने बताया कि इन 70 सालों का चित्र इतना बड़ा है कि कोई भी कैनवास और कूची छोटी उसे चित्रित करने में छोटी पड़ जाएगी। राष्ट्रीय विचार को स्वर देने में पांचजन्य की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है, भारतीय पत्रकारिता के सभी रंग इसमें समाहित हैं।

श्री प्रफुल्ल केतकर ने बताया कि भारत एक राष्ट्र था, एक राष्ट्र है यह विचार बार-बार ऑर्गनाइजर में प्रतिपादित होते रहा। यह सिर्फ 70 साल का समारोह नहीं है अपितु इतने वर्षों से जनता से इन पत्रों को मिले प्यार का भी सेलेबरेशन है। आजादी के समय पाकिस्तान में हिन्दुओं के कत्लेआम को दुनिया के सामने ऑर्गनाइजर ने रखा, 2015 में केरल में वामपंथी हिंसा को सामने लाये। “वोईस ऑफ़ नेशन” ऑर्गनाइजर मूल मन्त्र और “भारत की बात पांचजन्य का मूल मन्त्र” का अर्थ दो अलग-अलग भाषा के पाठकों के लिए सामान ही है।

इससे पूर्व श्री आलोक कुमार ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के पांचजन्य में सम्पादकीय दायित्व की पवित्र परंपरा को बनाए रखने के लिए  हमें वचन देना होगा कि उसकी श्रेष्ठता बनाए रखेगे।

इस अवसर पर श्रीमती स्मृति ईरानी और डॉ. मनमोहन वैद्य ने पांचजन्य के पूर्व संपादक श्री महेंद्र कुलश्रेष्ठ और पूर्व  प्रबंधक श्री रूपलाल मेहरोत्रा को सम्मानित किया।

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