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ताइवान-भारत में बढ़ते कारोबारी संबंध

पूर्वी एशिया के समुंदर में स्थित छोटे-से देश ताइवान से भारत के कारोबारी संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। पिछले साल के अंत में भारत और ताइवान ने एक-दूसरे के साथ व्यापारिक रिश्ते प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। खुद ताइवानी राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन इस मामले में खासी रूचि ले रहे हैं। यही कारण है कि इन दोनों देशों के बीच व्यापार में पिछले साल जनवरी से सितंबर के बीच करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और इस समय भारत ताइवान के लिए 18वां सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर है। 100 से भी ज्यादा ताइवानी कंपनियां इस समय भारत में 10 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा का निवेश किए हुए हैं। यह निवेश कैमिकल्स, आई.टी., ऑटो पाट्र्स, वित्तीय सेवाओं, निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग, खदानों की खोज, स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में किया गया है। सच तो यह है कि ताइवान पहले से ही भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों की सफलता में अहम भूमिका निभा रहा है।

ताइवान और भारत के बीच इन संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए हाल ही में दिल्ली में हुए ‘ताइवान एक्सपो’ में ‘स्मार्ट इंडस्ट्री और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफेक्चरिंग’ पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें कई प्रमुख ताइवानी कंपनियों ने हिस्सा लिया और भारत में काम करने की इच्छा जताई। ताइवान बाहरी व्यापार विकास परिषद और भारतीय व्यापारियों के संगठन फिक्की की ओर से हुए इस आयोजन में यह उम्मीद जताई गई कि इससे दोनों देशों के कारोबारी रिश्ते और ज्यादा मजबूत होंगे जिसका फायदा दोनों देश उठा सकेंगे।

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