You are here
Home > NEWS > सहिष्णुता नहीं, समरसता से बढ़ेगा सद्भाव – स्वामी केशवानंद

सहिष्णुता नहीं, समरसता से बढ़ेगा सद्भाव – स्वामी केशवानंद

“सहिष्णुता नहीं, समरसता बढाने से बढ़ेगा धार्मिक सद्भाव” – ये विचार हैं ‘इंटरनेशनल आदि शंकराचार्य रिसर्च एंड अवेयरनेस फाउंडेशन’ के संस्थापक स्वामी केशवानंद जी के । स्वामी केशवानंद ( के पी भारद्वाज जी ) का मानना है कि आज के समय में सभी धर्मों को आपस में एक दूसरे के प्रति सहिष्णुता का नहीं, उन्हें जबरन बर्दाश्त करने का नहीं, बल्कि प्रेम और सद्भाव का व्यवहार करने की आवश्यकता है इसीलिए इस विचार को जन जन तक पहुंचाने के लिए वे अपने शिष्यों के साथ 15 नवंबर 2017 से दिल्ली से पद यात्रा पर निकले हैं । तकरीबन 750 किलोमीटर लंबी ये पद यात्रा करीब दो सप्ताह में दिल्ली से चलकर, हरियाणा, पंजाब होती हुई जम्मू-कश्मीर के पावन तीर्थ माता वैष्णों देवी के दरबार पर जाकर समाप्त होगी ।
इस यात्रा के उद्देश्य के बारे में बात करते हुए स्वामी केशवानंद जी ने बताया कि वे विगत 2 दशकों से देश विदेश में अपने ज्योतिषीय ज्ञान, धार्मिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करने में जुटे हैं । वर्तमान में नीदरलैंड के दे हेग शहर में अपना अधिकतम समय बिताते हुए उन्होंने आदि-शंकराचार्य जी और उनके जीवन एवं उनके विचारों का गहन अध्ययन किया, तब उन्होंने पाया कि आज से लगभग 1200 वर्ष पूर्व जब भारत राजनीतिक तौर पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक तौर पर भी विभक्त था, और आज का हिंदू धर्म भी 84 से ज्यादा संप्रदायों में बंटा हुआ था । धर्म के नाम पर आडंबर और कर्मकांड हावी था | तब हिंदू धर्म को कुरीतियों और आडंबरवाद से बचाते हुए आदि शंकराचार्य ने पूरी भारत भूमि की पैदल यात्रा की । विभिन्न लोगों से धर्म पर विचार किया और भारत भूमि के चार कोनों में चार मठों की स्थापना करके सनातन हिंदू धर्म की रक्षा की । उसी प्रकार से आज फिर आदि शंकराचार्य जी के विचारों की प्रेरणा से अब विभिन्न धर्मों को धर्मनिरपेक्षता के आडंबर से बचाने का समय आ गया है। धर्मनिरपेक्षता के झंडाबरदार जिस तरह धार्मिक समरसता के मूल भाव को हानि पहुंचा रहे हैं उसका पर्दाफाश करने की आवश्यकता है । अगर कोई भी व्यक्ति अपने धर्म का सम्मान नहीं बचा सकता तो वो दूसरे धर्म का सम्मान कैसे कर पाएगा ? इसीलिए हमें धार्मिक सहिष्णुता की बजाय धार्मिक समरसता के भाव को बढ़ाने की आवश्यकता है । इसी हेतु से स्वामी केशवानंद जी ने अपने शिष्यों के साथ इस पद यात्रा का 15 नवंबर से अपने प्रेरणा पुंज ‘दादा भैया शक्तिपीठ, सेक्टर 11, रोहिणी, नई दिल्ली’ से आरंभ किया । इस यात्रा के शुभारंभ के समय शारदापीठ काश्मीर के श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य अनंतश्री विभूषित स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ जी महाराज का सानिध्य भी मिला । शंकराचार्य जी ने आदि शंकराचार्य जी के जीवन, उनकी शिक्षाओं और शारदापीठ के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि ये केवल एक पदयात्रा नहीं, केशवानंद जी का ये प्रयास आदि शंकराचार्य जी के विचारों को जमीन पर उतारने वाला भागीरथी है जिससे समाज को धार्मिक सद्भाव बढ़ाने की बड़ी प्रेरणा मिलेगी । उन्होंने केशवानंद जी से इस प्रयास को भारत ही नहीं वरन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी जारी रखने को कहा । स्वामी केशवानंद जी के इस प्रयास में विभिन्न राज्यों से सैंकड़ो गणमान्य नागरिकों के साथ आचार्य़ मदन जी भी उपस्थित थे ।

संगठन का उद्देश्य है :-
• आदि शंकराचार्य जी के बारे में जागरूकता पैदा करना
• शारदा पीठ, कश्मीर की अपनी संपूर्ण गरिमा और शुद्धता के अस्तित्व को फिर से स्थापित करना
• अन्य धर्मों के साथ सहिष्णुता के बजाय सद्भाव और सम्मान को बढ़ावा देना
• गंगा, यमुना आदि पवित्र नदियों की सफाई पर जागरूकता एवं ध्यान केंद्रित करना
• पर्यावरण और स्वच्छता के सुधार के लिए सभी को एकजुट करना
• हमारे धर्म के प्रति नई पीढ़ी और साबित विज्ञान तर्क के बीच हमारे धर्म के बारे में जागरूकता पैदा करना
• आदि शंकराचार्य जी के ज्ञान के साथ शिक्षाविदों के पाठ्यक्रम को जोड़ना
• आदि शंकराचार्य जी के सम्मान में वेदांत शिक्षाविदों पर आधारित नए विश्वविद्यालयों का निर्माण करना
• लुटियन क्षेत्र के एक सड़क का नाम बदलकर ‘शंकराचार्य मार्ग’ रखने के लिए सरकार से मांग करना
• विश्व स्तर पर कार्यशालाओं, एवं सेमिनारों को आयोजित करके संस्कृत (सबसे प्राचीन) भाषा के प्रति जागरूकता पैदा कर सिखाने का प्रयास करना

Leave a Reply

Top