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स्वच्छ भारत अभियान के सामने चुनौतियाँ देश सुधार के लिए आपने क्या किया ? ये प्रश्न ख़ुद से कीजिए

डॉक्टर विंदेश्वर पाठक
संस्थापक, सुलभ स्वच्छ एवं सामाजिक सुधार आंदोलन

1968- में देश के किसी घर में शौचलय नहीं थे, तब हमने सुलभ की शुरुआत की, बहुत आगे हम आ गए हैं फिर भी आज भी  चुनौतियाँ बहुत बड़ी हैं, और सबको स्वयं आगे आकर इस चुनौती से लड़ना होगा. हमने टू पीट शौचालय का आविष्कार किया  अगर ये तकनीक न होती तो आज खुले में शौच से मुक्ति सम्भव नहीं होती. मोदी का सपना भी इस तकनीक से ही पूरा हो रहा है, ज़्यादातर शौचालय आज इसी तकनीक पर बन रहे हैं. मेरे लिए व्यक्तिगत ख़ुशी की बात है कि मोदी जी ने शौचालय को इतनी बड़ी प्राथमिकता दी.
देश में 6,46,000 गाँव है, हर गाँव से एक व्यक्ति अपने गाँव में शौचालय बनने की निगरानी देखे तभी सम्भव है कि 2019 तक सबके घर शौचालय बने.  जवाबदेह NGO आगे आकर सरकार का हाथ बटायें.

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