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घोटाला: नीरव मोदी की इस कंपनी से पैसा रिकवर करना है एक बड़ी मुश्किल

आर्थिक मामलोँ के एक्सपर्ट व चार्टर्ड अकाउंटेंट

CA D.K. Mishra

 

नई दिल्ली। 11000 करोड़ से ज्यादा के बैंक घोटाले में आरोपी नीरव मोदी की अलग-अलग संपत्तियों और कंपनियों की जांच की जा रही है। परत दर परत जिन कंपनियों के राज खुल रहे हैं उनमें सबसे ऊपर आती है जानी-मानी ज्वैलरी कंपनी गीतांजलि जेम्स। जांच में सामने आया है कि वित्तीय ढांचे के हिसाब से गीतांजलि जेम्स इस घोटाले में शामिल है और उसके मार्फत कई गड़बड़ियां की गई।

वित्तीय दबाव से गुजर रही गीतांजलि

वर्ष 2017 की “एनुअल रिपोर्ट” के आधार पर कंपनी आर्थिक दबाव से गुजर रही है। कंपनी में कर्ज अतिदेय हो रहे है यानी कि मियाद पर भुगतान नहीं हो पा रहे। यही स्थिति ऋणपत्र (डिबेंचर्स) के भुगतान का भी है। कंपनी ने कार्यशील- पूंजी (वर्किंग- कैपिटल)की सीमा से भी ज्यादा कर्ज , बैंकों से ले रखा है। ये सभी तथ्य कंपनी के आडिटर्स द्वारा ऑडिट रिपोर्ट के जरिये सूचित किये जा चुके है। कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट में सहायक कंपनियों के आर्थिक आंकड़ों को शामिल करके रिपोर्ट किया गया है जो किसी अन्य चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा सत्यापित है। बैलेंस शीट को देखने पर यह प्रतीत होता है कि कंपनी का ज्यादातर कारोबार ,कार्यशील पूंजी आधारित है और गत वर्ष 2017 में कुल रु 16573 करोड़ का कारोबार हुआ। पर बाजार से 12828 करोड़ रुपये की वसूली लेनी दिखाई गई है, जिसका मतलब है कि उधार की बिक्री में ज्यादा धन लगा है। इन देनदारों की गुणवत्ता व उगाही के बारे में इस वक्त कहना कठिन होगा। हालांकि फंड्स की तरलता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि डिबेनचर का मात्र रु 1.48 करोड़ का भुगतान कंपनी समय से ना कर सकी। 2017 की किताबों में कुल कर्ज रु 7950 करोड़ दिखाया गया है और देयता 8246 करोड़, यानी कंपनी की कुल देनदारी रू 16196 करोड़ रुपये बनती है, जो वर्तमान वर्ष में और बढ़ी ही होगी।
जहाँ तक कारोबार से आमदनी का प्रश्न है,कंपनी का कुल मुनाफा 167 करोड़ रुपये का है, उसे और समायोजन के बाद ये 22.50 करोड़ रुपये के घाटे में बदल जाता है।

अर्थात जिस तरह से कंपनी का प्रदर्शन है है उससे ज्यादा उम्मीद लगाना निरर्थक होगा , उसके ऊपर वर्तमान घोटाले की रिपोर्टिंग, निश्चित तौर पर निवेशकों का विश्वास या रुझान इस कंपनी के प्रति काफी कम कर देगा। इस फर्जीवाड़े की जांच शुरू होने और कारोबार को सील करके सारी संपत्ति जब्त किए जाने की प्रक्रिया के बाद कंपनी की आर्थिक स्थिति का और भी बिगड़ना स्वाभाविक है।

सारे तथ्यों की समीक्षा से ये बात स्पस्ट है कि कंपनी की आर्थिक स्तिति इतनी मजबूत नहीं दिखती कि कर्ज की उगाही आसानी से हो जाए।

निवेशकों का भरोसा डगमगाया

जानकारी के मुताबिक कंपनी का शेयर मध्य जनवरी से अब तक लगभग 45 फीसदी गिर चुका हैं और घोटाला उजागर होने के बाद से निरंतर ये लुढ़कही रहा हैं। सीबीआई द्वारा एफआईआर में लगबग 5000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। अगर आरोप सिद्द हुआ तो कंपनी की विश्वसनीयता ख्तम हो जाएगी। वैसे भी निवेशक का इस घनटाक्रम के बाद से ही विश्वास डगमगा सा गया है और वे इस कंपनी में ज्यादा रूचि नहीं दिखा रहे हैं। गत शुक्रवार को इसका मार्केट कैपीटलाइजेशन घट कर 445 करोड़ रुपये हो गया है। जाहिर है अगर वास्तव में कंपनी इस घोटाले में शामिल पाई गई, तो परिणाम और बदतर होंगे।

जब्त की गई संपत्तियों व स्टाक का वसूली कीमत

यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि कंपनी की चल संपत्ति जैसे गोल्ड व डायमंड की बिक्री मूल्य में ब्रैंडिंग व डिजाइनिंग की कीमत व मार्कअप जुड़ा होता है। एजेंसीज द्वारा जब्त स्टाक के आक्शन या वसूली पर वास्तविक मूल्य ही मिलेगा। इसी तरह अचल संपत्ति भी कम कीमत पर ही बिकती है। ज़्यादातर देखा गया है कि जब्त सम्पत्ति औने-पौने दाम पर ही बिकती है।तो यह कहना उचित होगा कि जब्त संपत्तियों से पूरी घोषित उगाही नहीं हो सकती।

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