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SC का बडा फैसला फर्जी जातीय प्रमाणपत्र वालो पर गिरेगी गाज

सुप्रीम कोर्ट ने एक बडा फैसला सुनाया है। जिसमें अब फर्जी जातीय प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाना एडमिशन पाना एक अपराध के वर्ग में आएगा।आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षित वर्ग की नौकरी पाना या एडमिशन पाना एक अपराध है। फ़र्ज़ी प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी पाने वाले या पढ़ाई करने वाले व्यक्ति की नौकरी या शिक्षा को केवल इस आधार पर सुरक्षित नहीं किया जा सकता कि उसने आधिक समय के लिए नौकरी या पढ़ाई कर ली है।चीफ जस्टिस जे एस खेहर और जस्टिस डी वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति बहुत लंबे समय से नौकरी कर रहा है और बाद में उसका प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो, उसे सेवा में बने रहने की अनुमति दी जा सकती है।कोर्ट ने आदेश देते समय साफ किया कि यह फैसला केवल भविष्य के मामलों में लागू होगा। कोर्ट ने कहा कि भले ही कोई फर्ज़ी प्रमाणपत्र के आधार पर 20 साल की नौकरी कर चुका हो मामले के संज्ञान में आते ही न केवल उसकी नौकरी जाएगी, बल्कि उसे सजा भी होगी।गौरतलब है कि पिछले महीने केंद्र सरकार ने कहा था कि जो लोग फर्ज़ी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं, उन्हें बर्ख़ास्त किया जाएगा। वहीं, कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मार्च में लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में बताया था कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर 1832 लोगों ने नौकरी ले रखी है। इनमें से 276 को नौकरी से बर्खास्त किया गया है और 521 के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी हो रही है।

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