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कोरोना के विरुद्ध संघर्ष में समाज के साथ है संघ- मनमोहन वैद्य

बोल बिंदास- दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण देश में पैदा हुई स्थिति और इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा कार्यो को लेकर संगठन के अ०भा०सह सरकार्यवाह श्री मनमोहन वैद्य ने वीडियो ऐप के माध्यम से पत्रकार वार्ता की। उन्होंने कहा कि यह एक अभूतपूर्व संकट है और भारत अच्छे से इसका सामना कर रहा है।

उन्होंने 130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में निर्णयों को लागू कराने में सरकार के कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पहले 1 दिन के कर्फ्यू और फिर 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन का फैसला लिया गया वह ठीक था

उन्होंने भारतीय समाज की सक्रियता का हवाला देते हुए उसके सहयोगी स्वभाव की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारे समाज का तानाबाना कुछ ऐसा है संकट के मौके पर लोग एक दूसरे की सहायता को आगे आ जाते हैं। दूसरे देशों में सरकार पर निर्भरता अधिक है।

इस संकट के दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने उत्तर पूर्वी राज्यों अरुणाचल, मणिपुर, त्रिपुरा से लेकर देश के प्रत्येक राज्य में सेवा का जो काम किया उसकी भी जानकारी उन्होंने दी।

देश के 26 हजार स्थानों पर सेवा कार्यों में लगे 2 लाख स्वयंसेवक।

उन्होंने बताया कि इस समय देश भर में 26 हजार स्थानों पर संघ के 2 लाख स्वयंसेवक सेवा कार्यों में लगे हैं। इन सेवा कार्यों से साढे 25 लाख परिवारों को इसका लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि इनमे लगभग 25 प्रकार के सेवा कार्य चल रहे हैं। कई स्थानों पर हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं जिनके माध्यम से लोगों की समस्याएं हल की जा रही है । इन सेवा कार्यों में लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा और दूसरी तरह की सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इसमें दूसरे प्रांतों से आकर दूसरी जगहों पर रह रहे लोगों की सहायता की जा रही है। कई जगहों पर कोरोना से बचाव के लिए सेफ्टी ड्रेस का निर्माण किया जा रहा है। कई स्वयंसेवक परिवार मास्क बनाकर भी दे रहे हैं। लोगों को सुरक्षा के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा और होम्योपैथिक दवाइयां भी दी जा रही हैं। अलग-अलग स्थानों पर दूध- सब्जी फल भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

धार्मिक स्थानों पर रहने वाले भिक्षुकों और बंदरों की चिंता भी कर रहे हैं स्वयंसेवक।

धार्मिक स्थानों पर आश्रित रहने वाले भिक्षुकों के लिए भी भोजन की व्यवस्था हो रही है। चित्रकूट और हम्पी में बंदरों के लिए भी भोजन की व्यवस्था की जा रही है।

देश में कई स्थानों पर घुमंतू जनजातियों और कई प्रदेशों में जनजातीय इलाकों में लोगों की सहायता के लिए स्वयंसेवक सतत लगे हैं।

अपने ही समाज में एक्सपोज हो रहे तबलीगी।

तबलीगियों से जुड़े एक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि उन्हें अलग से कोई टिप्पणी नहीं करनी है लेकिन उनके कारण कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है तथ्य यही कह रहे हैं।

उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि ठीक उसी समय बेंगलुरु में संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक होनी थी जिसे स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रद्द कर दिया गया। जो लोग इस बैठक के लिए पहुंच भी गए थे उन्हें दूर-दूर रखा गया और वापस भिजवा दिया गया।

तबलीगियों से जुड़े एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि अपने कार्यक्रम रद्द ना करना एक बात है लेकिन छिपे रहना, लोगों को छिपाना, सेवा में लगे लोगों और नर्सों के साथ दुर्व्यवहार करना यह उनकी विकृत मानसिकता को ही दर्शाता है

उन्होंने कहा कि यह भी सच है कि मुस्लिम समुदाय के बड़े वर्ग ने सरकार के निर्देशों का समर्थन किया है, वो सहयोग भी कर रहे हैं लेकिन एक तबका है जो समझ नहीं रहा है।

तबलीगियों से जुड़े एक दूसरे प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह एक साजिश है या नहीं यह उन्हें नहीं पता लेकिन उनके समाज में ये लोग खुद एक्सपोज हो रहे हैं।

संकट के समय स्वयंसेवक लगा रहे हैं – ई शाखाएं।

उन्होंने बताया कि इस बीच संघ की प्रत्यक्ष लगने वाली शाखाएं ई. शाखा के रूप में लग रही हैं। परिवार के लोग साथ आ रहे हैं तो परिवार शाखा का प्रयोग भी हो रहा है।

उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में संघ से संबंधित संस्था विद्या भारती संस्था ने 16 जिलों में अपने 115 भवन प्रशासन को उपयोग के लिए दिए हैं। संघ के स्वयंसेवक दैनिक मजदूरी करने वालों की भी चिंता कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिव्यांगों के बीच काम करने वाले सक्षम नाम के संगठन ने इस संकट के दौरान मनोचिकित्सकों की सेवाएं भी उपलब्ध करवाई हैं

इस बीच संकट के समय सफाई सुरक्षा और दूसरे आवश्यक कार्य में लगे लोगों की चिंता, उन्हें चाय बिस्किट देने का काम भी स्वयंसेवकों ने किया है।

विश्व हिंदू परिषद् के कार्यकर्ता भोजन वितरित करते हुए

सेवा के इस विशाल कार्य में सेवा भारती, राष्ट्र सेविका समिति, विद्या भारती, भारतीय मजदूर संघ, वनवासी कल्याण आश्रम, विद्या भारती, सक्षम, नेशनल मेडिकल आर्गनाइजेशन, भाजपा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, आरोग्य भारती, सीमा जन कल्याण समिति जैसी संस्थाओं ने सहयोग किया है।

श्री मनमोहन वैद्य ने जानकारी दी कि यह समय संघ के शिक्षा वर्ग का समय होता है। 1929 से लेकर अभी तक प्रतिबंधों को छोड़कर कभी भी इसे निरस्त नहीं किया गया। पहली बार इसे निरस्त किया जा रहा है। कोरोना के विरुद्ध संघर्ष को मजबूती देने के लिए संघ ने अपने 90 वार्षिक संघ शिक्षा वर्ग को निरस्त किया है। संघ पर लगे तीन प्रतिबंधों के अतिरिक्त इसे कभी भी निरस्त नहीं किया गया था।

पत्रकारों से प्रश्न-उत्तर के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि यह संकट सभी पर आया है, सभी वर्ग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं अपने एक मित्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वो अपने सभी 125 कर्मचारियों को संकट के समय भी वेतन दे रहे हैं।

एक दूसरे प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि इस संकट से निपटने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है यह एक अभूतपूर्व स्थिति है सभी को मिलकर इससे पहले बाहर आना होगा फिर धीरे-धीरे स्थिति सुधरेगी

सुरक्षा और बचाव को लेकर एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि सभी को मास्क लगाना है सैनिटाइजर का प्रयोग करना है सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनी है। सेवा का कार्य करते समय स्वयंसेवक भी इसका पालन कर रहे हैं।

प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमें इस बीमारी की चुनौती से बाहर निकलना है उसके बाद देश को आर्थिक संकट से बाहर निकलना है फिर धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होगी

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