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राष्ट्र सेविका समिति द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था “भारतीय मीडिया में महिलाओं का चित्रण”

आज देशबंधु कालेज के आडिटोरियम में देशबंधु कालेज के वूमन डेवलमेंट सैल और राष्ट्र सेविका समिति के मेधावनी सिंधु सृजन के तत्वाधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था *भारतीय मीडिया में महिलाओं का चित्रण( Potrayal of women in Indian Media)
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पंजाब केसरी की निदेशक श्रीमती किरन चोपड़ा, अध्यक्षता सुप्रसिद्ध इतिहासकार और इग्नू में वरिष्ठ प्रोफेसर कपिल कुमार ने की।अन्य वक्ताओं में देशबंधु कालेज के प्रिंसिपल डा०अजय अरोड़ा, वरिष्ठ फ्रीलांस पत्रकार सुश्री सर्जना शर्मा और नेहरू मेमोरियल में सीनियर फैलो पत्रकार श्रीमती संध्या जैन ने इस विषय पर पर अपने अपने विचार रखे और भारतीय मीडिया में महिलाओं के दुर्भाग्यपूर्ण चित्रण पर चिंता प्रकट की।


कार्यक्रम का संचालन डा०रूबी मिश्रा ने किया। उन्होंने राष्ट्र सेविका समिति के बारे में जानकारी दी और बताया कि कैसे वं स्वर्गीय श्रीमती लक्ष्मीबाई केलकर ने राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना 1936 में विजयादशमी के दिन वर्द्धा में की। राष्ट्र सेविका समिति राष्ट हित में समर्पित सेविकाओं की दैनिक,साप्ताहिक और मासिक शाखायें लगती हैं जो सेविकाओं में शारीरिक, बौद्धिक विकास तथा मनोबल बढ़ाने की दिशा में कार्य करती है।

मुख्य अतिथि किरन चोपड़ा जी ने कहा कि आज की पीढ़ी युवाओं की पीढ़ी है,और अगर युवा आगे बढ़ कर समाज सेवा करते हैं तो उन्हें सबसे पहले महिलाओं का सम्मान करना होगा। सभ्यता, संस्कृति और संस्कार को अपनाने से ही सही दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

संध्या जैन जी ने कहा कि प्राचीन काल में भारतीय महिलाओं का बहुत सम्मान होता था परंतु विदेशी आंकार्ताओ के भारत में आने के बाद महिलाओं में पर्दा प्रथा,सती प्रथा,दहेज प्रथा कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं का जन्म हुआ। लेकिन समय समय पर समाज सुधारकों ने ऐसी कुरोतियों को समाप्त करने और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बहुत से कार्य किये ग्रे जिससे समाज में बदलाव दिखने लगा,और बहुत सी महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने लगी।जैसे सत्तर के दशक में पेड़ों को काटने से बचाने के लिए सुंदर लाल बहुगुणा के नेतृत्व में बहुत सी महिलाओं ने भाग लिया, कितनी ही महिलाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। 1975 में UNO ने भी अंतरर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की घोषणा की।
सुश्री सर्जना जी ने कहा कि आजकल भारतीय मीडिया महिलाओं का उचित सम्मान नहीं करती है और यहां तक अपने अधिकतर विज्ञापनों में भी महिलाओं का केवल फुअड और अश्लील चित्रण प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे विज्ञापनों और कार्यक्रमों से समाज में नैतिकता, संस्कारों और मूल्यों का हनन हो रहा है।

सुप्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर कपिल कुमार ने छात्र छात्राओं को आहृवान किया कि अगर किसी को कोई भी विज्ञापन या कार्यक्रम अश्लील,अप्रसांगिक या अनैतिक लगता है तो उनको जागरूक नागरिक के तौर पर आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अधिकार है,और संवेधानिक संस्थायें ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगा सकती हैं। हमारी आज की अधिकतर फिल्में न केवल भारतीय संस्कृति पर सुनियोजित हमला कर रही हैं, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही हैं। इस संदर्भ में कपिल कुमार जी ने बताया कि पद्मावती फिल्म में उन्हें बतौर इतिहासकार बुला कर फिल्म रिलीज होने से पहले दिखाई गई थी जिसमें फिल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर दिखाने पर उन्होंने अपना विरोध दर्ज करवाया था।
इस अवसर पर राष्ट्र सेविका की दिल्ली प्रचारक सुश्री विजया शर्मा, मेधावी सिंधु सृजन की निशा राना जी, प्रेरणा जी,तथा चारु भसीन कालरा भी उपस्थित रहीं।

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