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रोजगार बचाओ…आरक्षण बचाओ… संविधान बचाओ… देश बचाओ-डॉ सूरज मंडल

 

5 मार्च, 2018 को यूजीसी ने एक कोर्ट केस का हवाला देते हुए, दिल्ली विश्वविद्यालय सहित तमाम विश्वविद्यालयों की फैकल्टी नियुक्ति में एक नई रोस्टर व्यवस्था लागू किये जाने का निर्देश दिया है। इसके तहत पूर्व में 200 रोस्टर प्रणाली, जिसके तहत सम्पूर्ण विश्वविद्यालय को अथवा एक महाविद्यालय (कॉलेज) को इकाई मानते हुए बैकलॉग सहित नियुक्तियों का प्रावधान का प्रावधान था, इसके जगह विभागों को इकाई मानते हुए 13 पॉइंट रोस्टर लागू किया जाने का निर्देश दिया गया है। इसके विरुद्ध दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेज के सैकड़ों शिक्षक दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी के समक्ष Joint Action Committee to Save Reservation के तत्वाधान में लगभग एक महीने तक रीले भूख हडताल किये और अन्य शांतिपूर्ण तरीकों से संघर्ष जारी रखे हुए हैं।

डा. सूरज मंडल,
सदस्य, जॉइंट एक्शन कमिटी टू सेव रिज़र्वेशन।

रोस्टर पर हमारे संघर्ष को समझने के लिए पहले इतना समझ लें कि इस व्यवस्था से देश के तमाम विश्वविद्यालयों में फैकल्टी नियुक्ति में OBC, SC, ST आरक्षण को समाप्त कर दिया गया है। यह ध्यान में रखें कि अनुसूचित जाति /जनजाति के योग्य अभ्यार्थियों को भविष्य में विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने के रास्ते भी बंद कर दिए गए हैं।
यह कैसे हुआ इसको इस तरह से जानें :
1. विभाग को यूनिट मानने पर कभी भी एक साथ 14 पद नहीं आएंगे l ST/SC के लिए एक पद भी नहीं मिल पायेगा l आप सोचिये कि JNU, DU, AU, AMU, BHU, HCU में कितने ऐसे विभाग हैं जिसमें मात्र एक या दो या अन्तिम तीन प्रोफेसर ही विभाग को संचालित करते हैं l वहाँ कभी भी ST/SC/OBC की नियुक्ति हो ही नहीं सकती l
2. विभाग बहुत चालाकी से 1 या 2 या 3 पद निकलता है l जिस स्थिति में सबसे पहली हत्या तो ST की होती है, उसके बाद SC की उसके बाद, OBC की l
3. विभाग को यूनिट मानने के बाद कितने साल बाद ST का नम्बर आएगा, फिर SC का नंबर आएगा, फिर OBC का नंबर आएगा इसका अन्दाज ही नहीं लगाया जा सकता l 200 प्वाइन्ट रोस्टर से पहले 13 प्वाईंट रोस्टर था l इसी कारण OBC,SC,ST प्रोफेसर खोजने से भी नहीं मिलते हैं l सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश में 2015 में यही 13 प्वाईंट रोस्टर लागू किया गया था जिस कारण 84 असिस्टेंट प्रोफेसर पद में ST-SC का एक भी पद नहीं आया था l OBC का एक मात्र पद आया था l
अभी हाल में 13 पॉइंट रोस्टर के तहत तीन विश्वविद्यालयों में फैकल्टी नियुक्ति हेतु विज्ञापन से स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति / जनजाति / ओबीसी के लिए पद हैं ही नहीं।
जबकि 200 प्वाइंट रोस्टर में अनिवार्य रूप से ST,SC,OBC का पद क्रम आता है l इस 200 प्वाइंट रोस्टर में UGC, VC को अनिवार्य रूप से विश्वविद्यालय को ‘इकाई’ मानना पड़ता है l इस स्थिति में ST,SC,OBC के साथ लोकतंत्रीय, समाजिक और संवैधानिक न्याय होता है l हमें इसी 200 प्वाईंट रोस्टर के लिए तब तक लड़ना है जब तक इसे इस देश सभी विश्वविद्यालयों में लागू कर दिया जाए ।
शिक्षकों की मांग यह है कि नए रोस्टर व्यवस्था, जिसमें विश्वविद्यालय या महाविद्यालय की जगह विभागों को इकाई माना गया है और रिक्तता (Vacancy), के आधार पर लागू किया गया है, उसे अविलम्ब वापस लिया जाय।
हमारी मांग यह है कि 200 पॉइंट रोस्टर को पुनः बहाल किया जाये। इसके लिए सरकार अध्यादेश लाये।
इसी तरह दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में कार्यरत तमाम एडहॉक शिक्षकों की नौकरी बचेगी, जुलाई में उन्हें पुनः नियुक्ति पत्र प्राप्त होगी और स्थाई नियुक्ति की गुंजाईश बनी रहेगी, अन्यथा वे नौकरी से बाहर हो जायेंगे।
मोदी सरकार ने 62 विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को स्वायतता प्रदान कर दी है, जो निश्चित रूप से उच्च शिक्षा के निजीकरण और व्यवसायीकरण की ओर ले जाने वाला है। इससे सभी कैटेगरी के परमानेंट शिक्षकों की भी समस्याएँ बढ़ेंगी।

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