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रिलायंस फाउंडेशन ने बदली किसानों की तकदीर

बोल बिंदास, नई दिल्ली, नीता अंबानी के मार्गदर्शन में रिलायंस फाउंडेशन ने देश के विभिन्न राज्यों के किसानों को खेती के आधुनिक तौर तरीकों से परिचित करा कर उनके जीवन में सफलता के नये आयाम लिख दिए। रिलायंस फाउंडेशन ने एक सलाहकार समिति निर्माण किया जो देश के अलग अलग गांवो में जाकर किसानो से मिलती है और उन्हें आनी वाली खेती में आने वाली समस्याओं के बारे में जानकर उन्हें वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने के लिए प्रेरित करती है और उनके लिए संसाधन जुटाने का काम भी करती है। आज दिल्ली में रिलायंस फाउंडेशन के सुनील श्रीवास्तव ने मीडिया को रिलायंस फाउंडेशन किस प्रकार से इस क्षेत्र में कार्य कर रहा है, इसके बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर महाराष्ट्र से भरत भोंसले, देवघर (झारखंड) से श्रीमती सत्यश्री सिंह, जमवारामगढ़ (राजस्थान) से तोफन राम मीणा, कदैया शाह गांव-बेरासिया ब्लॉक, भोपाल ( मध्यप्रदेश) से विशाल सिंह मीणा भी उपस्थित थे जिन्होंने रिलायंस फाउंडेशन द्वारा उनके विकास के लिए किए गए कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कैसे उनके और गांव के अन्य किसानों के जीवन में बदलाव आया और आज वे एक सुखमय जीवन बिता रहे हैं।

 

 

रिलायंस फाउंडेशन के सुनील श्रीवास्तव ने फाउंडेशन के कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वो कैसे वैज्ञानिक विधि से किसानों को खेती करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी मिट्टी का विश्लेषण करके वो बताते हैं कि किसान किस तरह की उपज लें। कैसे अपनी उपज को दुगना करें। साथ ही वो बाज़ार से कैसे अधिक से अधिक लाभ ले सकते हैं। परंपरागत उपज के अतिरिक्त वो फूलों की भी खेती करके अपने खेतों से 12 मास लाभ कमा सकते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

वहां उपस्थित भरत भोसले, जो सिरकलस, पूर्णा तालुका से आने वाले एक प्रगतिशील किसान हैं, ने बताया कि किस तरह से रिलायंस फाउंडेशन द्वारा प्रसारित सलाह और प्रबंधन प्रक्रियाओं का उन्होंने पालन किया और सिर्फ अपनी सहजन (शेवगा) की फसल से 2 लाख रूपये से अधिक की आय अर्जित की।   भरत भोसले के पास 25 एकड़ की कृषि भूम जिसमें से 15 एकड़ सिंचित है। उनके परिवार में 12 सदस्य शामिल हैं। वह कपास, सोयाबीन, गन्ना, हल्दी और टमाटर उगाते हैं।

विलेज एसोसिएशन (वीए) के सदस्‍य से लेकर स्‍वास्‍थ्‍य संगिनी बनने और फिर त्रिकूट कृषक प्रोड्यूसर कंपनी के बोर्ड ऑफ डॉयरेक्‍टर (बीओडी) में शामिल होने तक का सत्यश्री का सफर टिटमोह, देवघर, झारखंड की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत है। वह सबसे मुखर महिला सदस्‍यों में से एक रही हैं – शराब और घरेलू हिंसा जैसे सामाजिक मुद्दों के खिलाफ अपने गांव की महिलाओं को संगठित करने में उनकी भूमिका महत्‍वपूर्ण रही है। मात्र 10वीं कक्षा तक पढ़ी सत्यश्री सिंह आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

वर्ष 2012 में तोफन राम मीणा के गांव में रिलायंस फाउंडेशन ने काम करना शुरू किया। रिलायंस फाउंडेशन के मार्गदर्शन में खेती के वैज्ञानिक तौर तरीकों को अमल में लाकर उन्होंने अपनी आमदनी को दुगना कर लिया है। वह विलेज एसोसिएशन (वीए) के एक जीवंत और सक्रिय सदस्य हैं तथा वर्तमान में गांव के साथ-साथ उनकी प्रोड्यूसर कंपनी के लिए भी एक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

विशाल सिंह मीणा को उनके जुनून और समर्पण ने उन्‍हें आज एक सफल उद्यमी बना दिया है। एक संघर्षशील किसान से ताजा फूलों के एक सफल निर्यातक तक, वह अपनी सफलता का श्रेय रिलायंस फाउंडेशन (आरएफ) के सूचना आधारित मार्गदर्शन और परामर्श को देते हैं। अपने चार एकड़ की कृषि भूमि को पुनर्जीवित करने की उनकी आकांक्षा के साथ, उन्होंने आरएफ सूचना सेवा हेल्पलाइन को कॉल किया और आरएफ टीम से सहायता मांगी। उन्हें गेहूं, टमाटर, धनिया और लहसुन के अलावा फूल उगाने के लिए मार्गदर्शन दिया गया था। आज, विशाल मुंबई और दुबई तक अपने ग्लैडियोलस फूल बेचते हैं। विशाल सिंह मीणा एक आदर्श उदाहरण हैं कि कैसे रिलायंस फाउंडेशन की सूचना सेवाओं ने ज्ञान  जिज्ञासुओं को ज्ञान प्रदाताओं से जोड़कर उनकी आजीविका को रूपान्‍तरित किया है। रिलायंस फाउंडेशन की स्थापना रिलायंस इंडस्ट्री द्वारा 2010 में नीता एम. अंबानी के नेतृत्व में की थी। आज 8 साल के अल्पसमय में इसकी गतिविधियों से 20 मिलियन लोगों तक इसके कार्यों का लाभ पंहुचा है। कार्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत फाउंडेश गांवों के पूर्ण विकास के लिए सतत कार्यरत है।

 

बोल बिंदास, संवाददाता    

 

 

 

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