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रानी लक्ष्मीबाई और भगिनी निवेदिता की जयंती मनाई

बोल बिंदास, दिल्ली- राष्ट्र सेविका समिति, दिल्ली प्रान्त के स्वयंसिद्धा महाविद्यालयन तरुणी वर्ग द्वारा रानी लक्ष्मी बाई एवं भगिनी निवेदिता जयंती के उपलक्ष्य पर दिल्ली महाविद्यालय के भारती कॉलेज , जनकपुरी में तरुणी सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कॉलेज की छात्राएं उपस्थित रही। प्रमुख संबोधन दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर और मेधावनि सिंधु सृजन की सह-संयोजिका डा. चारु भसीन कालरा जी का रहा। उन्होंने कहा कि भगिनी निवेदिता स्वयं प्रेरणा से भारत एवं धर्म की सेवा करती थी।

आयरिश महिला होते हुए भी भारत को, भारत के आचार- विचार, संस्कृति, संस्कार को अपनाया जैसे कि वे भारत की ही बेटी हो। उन्होंने झांसी की रानी की पूरी जीवनी संक्षेप में उपस्थित बहनो को बताई। किस प्रकार उन्होंने महिलाओं का सैंन्य दल तैयार किया। रानी के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता को बहुत ही सरल शब्दों में समझाया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि डा गीता भट्ट जी(एसोसिएट प्रोफेसर, भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंस) ने भी मार्गदर्शन किया एवं उपस्थित बहनो के प्रश्नों का समाधान भी किया। तरुणिओं को किस प्रकार भगिनी निवेदिता एवं रानी लक्ष्मी बाई से प्रेरणा लेनी चाहिए। भगिनी निवेदिता ने भारत की संस्कृति को समझने के लिए और इसकी सेवा करने के लिए यहाँ कि भाषा- संस्कृत, हिंदी और बंगाली सीखी। भारत की सेवा भारतीय बन कर की। स्वयंसिद्धा द्वारा प्रस्तुत किये गए रानी लक्ष्मी बाई पर नाटिका एवं सेल्फ डिफेंस और मार्शल आर्ट से प्रभावित होकर उन्होंने उपस्थित बहनो को हमारी संस्कृति, हमारी धरोहर की रक्षा का संदेश भी दिया। इस कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति के दिल्ली प्रान्त की सह- बौद्धिक प्रमुख मंजू जी भी उपस्थित रही।

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