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सोनिया के ‘चाणक्य ‘अहमद पटेल पड़ गये अमित शाह पर भारी

सोनिया के चाणक्य अहमद पटेल ने अपने जीवन का सबसे मुश्किल राज्यसभा चुनाव जीत कर एक बार फिर साबित कर दिया कि वे हर हाल में खेल में बने रहने के माहिर हैं. उनकी जीत से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राहत की सांस ली, क्योंकि राजनीतिक रूप से वे उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. सोनिया गांधी ने इसके लिए चुनाव आयोग को भी धन्यवाद दिया है. अहमद पटेल की योग्यता व निष्ठा के कारण सोनिया गांधी उन पर भरपूर भराेसा करती हैं. कह सकते हैं सोनिया के अहमद उतने ही भरोसेमंद हैं, जितने मोदी के लिए शाह. भले ही राजनीति के मोदी-शाह युग में अहमद पटेल की पार्टी कांग्रेस की छवि कितनी भी धूमिल क्यों नहीं हुई हो, लेकिन उनका दम-खम और कौशल कायम है. अहमद पटेल ऐसी मुश्किल लड़ाई पहली बार नहीं जीते हैं. उन्होंने 26 साल की उम्र में 1977 में भरूच से लोकसभा का चुनाव तब जीत लिया था, जब देश भर में इमरजेंसी के कारण इंदिरा गांधी के खिलाफ लहर चल रही थी. इसके बाद भी उन्होंने 1980 व 1984 में यहां से जीत हासिल की. इसके बाद के दिनों में राज्यसभा से संसद में प्रवेश करने लगे और कल की जीत के बाद उच्च सदन में उनकी पांचवी पारी होगी.

अहमद पटेल इस बार राज्यसभा चुनाव में सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ रहे थे. उनके विजय रथ को रोकने के लिए अमित शाह, शंकर सिंह वाघेला जैसे दो दिग्गज सीधे तौर पर मोर्चे पर थे. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी तो खुले तौर पर यह घोषणा कर चुके थे कि अहमद भाई किसी हाल में नहीं जीतने वाले हैं. कल वोट देने के बाद कुछ ऐसे ही शब्द वाघेला के थे. उन्होंने भी कहा कि अहमद भाई के रेपुटेशन के साथ कांग्रेस ने खिलवाड़ किया. लेकिन, भले ही उनकी पार्टी आज बेजार हो, ऐसे में उनके व्यक्तिगत कौशल को हल्के में लेना भाजपा को भारी पड़ा.

कहा यह जा रहा है कि कांग्रेस के जिन दो विधायकों भोला भाई गोहिल व राघव जी ने वोट देने के बाद अमित शाह को अपन बैलेट दिखाया, यह घटना पटेल की ही रणनीति का हिस्सा थी. ताकि उनका वोट रद्द करवाया जा सके. नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के एक विधायक ने नेतृत्व द्वारा भाजपा को वोट करने का निर्देश ठुकरा कर अहमद पटेल के प्रति अपना समर्पण दिखाया. इसी तरह एनसीपी के दो में से एक विधायक ने उन्हें वोट दिया. इस पूरे खेल में 176 विधायकों ने वोट किया था, जिसमें अमित शाह व स्मृति ईरानी को 46-46 वोट मिले, जबकि अहमद पटेल को 44 वोट मिले. वहीं, भाजपा के तीसरे उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत को 38 वोट मिले. पटेल की मजबूत घेराबंदी के सामने वाघेला का सुबह-सुबह दिया वह बयान भी फुस्स हो गया कि मैंने तो अहमद पटेल को वोट नहीं दिया है. वास्तव में ऐसा बयान देकर वाघेला ने दूसरे कांग्रेस विधायकों को पटेल के खिलाफ वोट करने का अघोषित संदेश दिया था.

अपनी जीत पर अहमद पटेल ने आधी रात में एक बेहद शालीन ट्वीट किया – सत्यमेव जयते. हालांकि अहमद पटेल ने इसके कुछ देर बाद तीन और ट्वीट कर अपने अगले लक्ष्य का खुलासा कर दिया. उन्होंने लिखा – यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है, उन्होंने अपने जीत को धनबल-बाहुबल की हार बताया, उन्होंने भाजपा के दबाव के बावजूद अपने विधायकों के समर्थन के लिए आभार जताया. उन्होंने लिखा कि भाजपा का निजी प्रतिशोध और राजनीतिक आतंक उजागर हो गया है. उन्होंने अंतिम पंक्ति लिखी – इस साल गुजरात चुनाव में जनता इसका उचित जवाब देगी. यानी अब उन्होंने यह संदेश दे दिया है कि वे मोदी-शाह को गुजरात चुनाव में कड़ी टक्कर देने की रणनीति तय करने में अपनी पूरी ऊर्जा आने वाले महीनों में लगायेंगे.

-ऋषभ अरोड़ा

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