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गुजरात में असल में बुरी तरह हारे हैं राहुल

वरिष्ठ पत्रकार रवि पाराशर

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया है कि कांग्रेस का क़द राज्य में काफ़ी घट गया है। लेकिन मीडिया में प्रचार किया जा रहा है कि राहुल गांधी ने कड़ी टक्कर बीजेपी को दी है। आंकड़े देखें, तो यह बात कहीं से सही नहीं कही जा सकती। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने अपने दम पर 63 सीटें जीती थीं।

लेकिन इस बार राहुल गांधी की कांग्रेस पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश मेवानी और ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर के पूरे सहयोग से चुनाव लड़ा। सीधा गणित तो यही है कि इस वक़्त अगर मान लें कि कांग्रेस और उसकी सहयोगी भारतीय ट्राइबल पार्टी 80 सीटें जीत रही हैं, तो इन चार ग्रुपों के हिस्से में औसतन 20 सीटें आती हैं।

लेकिन अगर गुजरात में हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश के असर वाले इलाक़ों के चुनाव नतीजों का विश्लेषण करें, तो सौराष्ट्र और कच्छ को पाटीदारों और ओबीसी का गढ़ माना जाता है, जिसमें हार्दिक और अल्पेश का बड़ा प्रभाव था। इन दोनों क्षेत्रों में इस बार 14 सीटों का फ़ायदा कांग्रेस को हुआ है। साल 2012 के चुनावों में कांग्रेस 16 सीटों पर जीती थी, लेकिन इस बार उसे 30 सीटें मिल रही हैं।

उत्तरी और दक्षिणी गुजरात में भी ओबीसी और दलितों ने अल्पेश औऱ जिग्नेश का साथ दिया है। इस इन क्षेत्रों में कांग्रेस को नौ सीटों का फ़ायदा हुआ है। पिछली बार इन इलाक़ों में कांग्रेस 23 सीटों पर जीती थी, वहीं इस बार उसे 32 विधानसभा सीटें हासिल हुई हैं।

कुल मिलाकर जो सीटें कांग्रेस के खाते में हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश के असर से गई हैं, उनकी संख्या 33 है। दो सीटें कांग्रेस की सहयोगी भारतीय ट्राइबल पार्टी को मिली हैं। इस लिहाज़ से कांग्रेस गठबंधन को मिल रही 80 सीटों में से कांग्रेस केवल 45 सीटें ही अपने बूते पर हासिल कर पाई है। यानी पिछले चुनाव में मिली सीटों में से कांग्रेस को इस बार 18 सीटों का नुकसान ही हो रहा है। इसके अलावा गुजरात में अगर हम 22 साल लगातार शासन के दौरान एंटी इंकबेंसी फ़ैक्टर को भी ध्यान रखें और मान लें कि 10 सीटें बीजेपी से नाराज़गी की वजह से कांग्रेस के खाते में चली गईं, तो राहुल गांधी की कांग्रेस केवल 35 सीटों पर ही जीती हुई मानी जाएगी। कांग्रेस में राहुल गांधी की हैसियत 2012 में भी पार्टी अध्यक्ष जैसी ही थी। अर्थ ये हुआ कि अब अध्यक्ष बनने से उनकी साख़ पर कोई असर नहीं पड़ा है और गुजरात के वोटरों ने उन्हें नकार दिया है।

2012 विधानसभा चुनाव कांग्रेस को मिली 63 सीटें
2017 विधानसभा चुनाव
राहुल गांधी 45 – 10 (इंकंबेंसी फ़ैक्टर) = 35 सीटें
हार्दिक+अल्पेश+जिग्नेश 33 सीटें

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