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सजायाफ्ता सुप्रीमो, और बातें नैतिकता की ? -जवाहर यादव

दो लोग फोन पर बात करते सुनाई देते हैं और मनमानी बातें करते हैं। वे बात किसी तीसरे और चौथे शख्स के बारे में करते हैं। और हमारे विपक्ष को इसमें बहुत बड़ा मुद्दा नजर आता है। उन्हें इतनी कॉमनसेंस तो लगानी चाहिए कि किसी अन्य के बारे में मनगढ़ंत बातें तो कोई जानबूझकर, साजिश के तहत या अज्ञानता में भी कर सकता है। जिन दो लोगों की बातचीत बताई जा रही है, उनमें से एक तो इन तथ्यों को ही नकार चुके है ।

इस हवाहवाई मुद्दे पर इनेलो ने दो घंटे तक विधानसभा का वक्त खराब किया और स्पीकर के बार-बार चेताने के बावजूद शोर मचाते रहे। असल में इनेलो विधायकों के पास बजट पर चर्चा करने लायक तो कुछ था नहीं, अपनी झेंप मिटाने के लिए वे सदन से निष्काषित होने का बहाना ढूंढ रहे थे। तभी वे स्पीकर की तरफ से अवसर देने के बावजूद नहीं माने और उन्हें नेम कर बाकी सत्र के लिए बाहर कर दिया गया।

खैर, हमारे मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी ने इस मामले में जांच विजिलेंस से करवाने का आदेश दे दिया है और कह दिया है कि गड़बड़ मिली तो एफआईआर दर्ज कर भी जांच होगी। इससे सबको स्पष्ट हो जाना चाहिए कि भाजपा सरकार में ना भ्रष्टाचार के लिए जगह है, ना ऐसे किसी आरोप को हल्के में लिया जाता।

लेकिन हैरानी की बात तो इनेलो के साथियों ने कर दी, नैतिकता के आधार पर पेहोवा नगरपालिका चेयरमैन का इस्तीफा मांगकर। इस दल के नेताओं की जुबान से नैतिकता जैसे शब्द अच्छे नहीं लगते। जिस दल के तमाम कार्यकर्ता और उनके नेता एक ऐसे शख्स को मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाते हैं जो आज के दिन ना चुनाव लड़ सकते ना मुख्यमंत्री बन सकते। खुद उनके नेता का जेल से ही शपथ लेने का सपना भी नैतिकता से कितना दूर है, यह सब समझते हैं।

दरअसल यह विपक्षी दलों की हताशा और निराशा है कि वे सरकारी नौकरियों की भर्ती में भ्रष्टाचार ढूंढते ढूंढते थक चुके हैं। इनके प्रवक्ता बार-बार सरकारी भर्तियों में गड़बड़ी के झूठे दावे करते हैं और हर बार उन्हें मूंह की खानी पड़ती है। पुलिस की भर्ती को लेकर ये लोग हल्ला करते रहे लेकिन आखिरकार वो भर्ती आज तक के इतिहास की सबसे पारदर्शी भर्ती साबित हुई। इसी तरह क्लर्क भर्ती को रुकवाने के लिए एक प्रवक्ता जो वकील भी हैं, कोर्ट तक चले गए लेकिन अब कोर्ट ने उसे भी हरी झंडी दिखा दी है और जल्द ही हरियाणा को 6 हजार से ज्यादा क्लर्क मिलने वाले हैं।

यह विपक्ष की बौखलाहट ही है कि जब भर्ती आयोग के चेयरमैन या सदस्यों पर कोई दमदार आरोप नहीं लगा पाए तो किसी अन्य तरीके से उन पर कीचड़ उछालने की कोशिश की जा रही है। जनता इनेलो और कांग्रेस के ये सारे नाटक देख रही है और उन्हें इस नौटंकी का सही वक्त पर जवाब भी देगी।

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