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पुणे हिंसा: दलित और मराठाओं के बीच खूनी संघर्ष, महाराष्ट्र बंद

1 जनवरी को महाराष्ट्र के पुणे में भीम कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ मनाने लाखों दलित इकट्ठा हुए थे। जहां उनकी मराठा संगठनों से हिंसक झड़प हो गई। इसके बाद दलितों नें आज महाराष्ट्र  बंद का आह्वान किया है।

सैकड़ों की संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर  मुलुंद, चेम्बुर, भांडुप, विख्रोली के रमाबाई आंबेडकर नगर और कुर्ला के नेहरू नगर में ट्रेन ऑपरेशंस को रोक दिया।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त लक्ष्मी गौतम के  मुताबिक यहाँ समूह में लोग मौजूद हैं जो विरोध प्रदर्शन कर रास्ता रोकने की कोशिश कर रहे हैं पुलिस अब तक उन पर नियंत्रण रखने में सफल रही है|

गौरतलब है कि सोमवार को समारोह का आयोजन शांतिपूर्वक चल रहा था  लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पड़ोसी गांवों की ओर से हिंसक झड़प शुरू हो गई।

पुलिस का कहना है कि  दलित समुदाय के 5 लाख से भी  ज्यादा लोग भीम कोरेगांव की 200वीं वर्षगांठ मनाने के लिए पुणे शहर में जमा हुए थे।

इतिहास पर नजर डालें तो इस लड़ाई में ब्रिटिश सेनाओं ने 1 जनवरी 1818 को पेशवाओं की सेना को शिकस्त दी थी। हर साल एक जनवरी को हजारों दलित जयस्तंभ तक मार्च करते हैं।

पिछले वर्षों पर नजर डालें तो कभी हिंसा की इस तरह की कोई भी घटना देखने को नहीं मिलती है। इस साल किसी अन्य झगड़े के कारण भीम कोरेगांव के आसपास के इलाकों में तनाव पसरा हुआ था।

पुलिस  के अनुसार किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए  वधु बुद्रुक गांव में सुरक्षाबल को पहले से ही  तैनात किया गया था। लेकिन सोमवार की सुबह सैकड़ों की संख्या में लोग (ज्यादातर मराठा समुदाय के) वधु बुद्रुक गांव में जमा हो गए।

आशंका है  कि सोशल मीडिया पर आह्वान की वजह से ज्यादातर लोग  जमा हुए थे उन्होनें  पुलिस की गाड़ियां और फायर टेंडर समेत सैकड़ों वाहनो को फूंक दिया   इसके बाद  ही घटनास्थल पर भारी पुलिसबल तैनात किया गया।

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