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संसद का शीत सत्र आज से, जीएसटी-नोटबंदी सहित कई मुद्दों पर हंगामे के आसार

नई दिल्ली : संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है, जिसके हंगामेदार रहने के आसार हैं। उम्मीद की जा रही है गुजरात चुनाव प्रचार में तीखे तेवर अपना चुकी विपक्ष संसद में भी हमलावर तेवर अपना सकती है और जीएसटी, नोटबंदी, अर्थव्यवस्था और किसानों से जुड़े विषयों समेत कई अन्‍य मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास कर सकती है। विपक्ष राफेल लड़ाकू विमान खरीद पर भी दोनों सदनों में चर्चा की कोशिश करेगा, जिसमें कांग्रेस ने बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। इसमें तीन तलाक का मुद्दा भी छाया रह सकता है, जिस पर सरकार विधेयक लाना चाहती है।

गुजरात चुनाव की वजह से देरी से शुरू हो रहे सत्र पर गुजरात व हिमाचल प्रदेश के नतीजे का भी असर होगा। हालांकि अगर भाजपा गुजरात व हिमाचल प्रदेश में जीत दर्ज करती है, जैसा कि एग्जिट पोल्‍स में दावा किया गया है तो हाल ही में कांग्रेस के नए अध्यक्ष घोषित होने वाले राहुल गांधी के लिए चुनाव के दौरान उठाए गए मुद्दों पर भाजपा को घेरना मुश्किल हो जाएगा।

सरकार की विपक्ष से सहयोग की अपील
इस बीच, सरकार ने संसद सत्र के सुचारु संचालन के लिए गुरुवार शाम सर्वदलीय बैठक बुलाई और विपक्ष से सहयोग की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से रचनात्‍मक सहयोग की अपील की है। वहीं, कांग्रेस गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निशाना बनाए जाने को लेकर मोदी से माफी की मांग पर अड़ी है।

सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर इसके संकेत दिए कि सरकार लोकसभा और राज्‍य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने पर चर्चा कराना चाहती है। उन्‍होंने इस मुद्दे पर सभी पार्टियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रस्‍ताव का समर्थन करने की अपील की।

5 जनवरी तक चलेगा शीत सत्र
करीब एक माह तक चलने वाला संसद का शीतकालीन सत्र प्राय: नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले समाप्त हो जाता है। इस बार शीत सत्र 15 दिसंबर से 5 जनवरी तक चलेगा। क्रिसमस की वजह से 25 व 26 दिसंबर को छुट्टी रहेगी। कांग्रेस की अगुवाई में 17 अन्य विपक्षी पार्टियां एक साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को घेरने की कोशिश करेंगी।

जीएसटी, नोटबंदी विपक्ष का मुख्‍य मुद्दा
तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने आईएएनएस से कहा, ‘इस बार जीएसटी व नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव, धार्मिक असहिष्णुता, राजस्थान में पश्चिम बंगाल के मजदूर का मारा जाना जैसे बड़े मुद्दे संसद में उठाए जाएंगे। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दों पर सामंजस्य बिठाएंगी।’

विपक्षी पार्टियों -माकपा, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और द्रमुक समेत अन्य पार्टियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे संसद में सरकार को घेरने के लिए साथ में सामंजस्य बिठा कर सरकार पर हमला करेंगे। कांग्रेस नेता के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि संसद में जीएसटी, नोटबंदी, राफेल मुद्दा, आधार को पैन व अन्य दस्तावेजों से जोड़ने का मुद्दा उठाया जाएगा।

‘सरकार नियमों के तहत चर्चा करने को तैयार’
वहीं, भाजपा का कहना है कि वह इस सत्र के लिए पूरी तरह से तैयार है और चाहती है कि इसमें सकारात्मक चर्चा हो। संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि संसद चर्चा का सर्वोच्च स्थान है और सरकार नियमों के तहत किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है। उन्‍होंने कहा, ‘सरकार गरीब हितैषी है। विपक्ष को नियमों के तहत चर्चा करनी चाहिए।’

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