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हस्तशिल्पियों के लिए आॅनलाइन बाजार

दीपक दुआ
लेखक वरिष्ठ फिल्म समीक्षक व पत्रकार हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज से घुमक्कड़। सिनेमा विषयक लेख, साक्षात्कार, समीक्षाएं व रिपोर्ताज लिखने वाले दीपक कई समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज़ पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखते हैं और रेडियो व टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।

अपने देश में हथकरघा और हस्तशिल्प का विशाल बाजार है लेकिन दिक्कत यह है कि कारीगरों को उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए कमीशनखोरों की एक लंबी कतार का सामना करना पड़ता है। हालांकि कई जगहों पर कुछ एक सहकारी समितियां अच्छा काम कर रही हैं मगर अभी भी हाथ से बनी चीजें हर जगह उचित कीमत पर नहीं पहुंच पा रही हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए डायरेक्ट क्रिएट नाम की एक कंपनी ने कारीगरों, डिजाइनरों, निर्माताओं, विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को आॅनलाइन जोड़ रही है। डायरेक्ट क्रिएट डाॅट काॅम नाम की इस वेबसाइट को मिले शुरूआती रिस्पांस से उत्साहित होकर अब ये लोग आने वाले दिनों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कारीगरों को जोड़ने का अभियान चला रहे हैं।

डायरेक्ट क्रिएट के संस्थापक राजीव लुंकड़ बताते हैं कि राजस्थान में सांगनेर, बाड़मेर, कोटा, सीकर, उत्तर प्रदेश में वाराणसी, निजामाबाद, फिरोजाबाद, भदोई और मध्य प्रदेश में बस्तर, चंदेरी, बाघ, महेश्वर, ढोकरा, भील जैसे क्षेत्रों के करीब एक हजार हस्तशिल्पियों के अलावा 200 नए डिजाइनरों को भी इस अनोखे मंच से जोड़ा जाएगा। राजीव कहते हैं कि हमारा मकसद सिर्फ सामान बेच कर मुनाफा कमाना ही नहीं बल्कि उस मुनाफे के पर्याप्त हिस्से को सही हाथों में पहुंचाना और भारत की प्राचीन शिल्प परंपराओं को जीवित रखना भी है।

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