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चीनी समानों के विरोध में  1 करोड़ लोगों ने संकल्प पत्र भरा : स्वदेशी जागरण मंच

स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक श्री अश्विनी महाजन ने  आज कहा कि चीनी समानों के विरोध में देशवासी संकल्प ले रहे हैं। इसी कड़ी में अब तक 1 करोड़ लोगों ने चीनी समान नहीं खरीदने का संकल्प लेते हुए संकल्प पत्र भरकर चीन के प्रति अपना कड़ा रोष जताया हैं। इसके अलावा डेढ़ करोड़ और लोग संकल्प पत्र भरेंगे। इस अभियान में आम लोगों की भागीदारी अहम होगी। श्री महाजन  भारत-चीन द्विपक्षीय सम्बन्धों पर संगोष्ठी में बोल रहे थे।

इस अवसर पर उन्होने कहा कि पिछली दीपावली पर चीनी समान के बहिष्कार के कारणचीनी इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी देखी गई थी। उन्होने अमेरिका के बारे में दिलाते हुए कहा कि अमेरिका ने 1933 में ‘बाय अमेरिकन एक्ट’ बनाया था जिसका सीधी मकसद अपनी देश की कंपनियों और वहां बने साजो सामान प्राथमिकता देना था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने स्वदेशी उत्पादन की नीति बनाई है जो कि सराहनीय कदम हैं। पिछली सरकार ने कई निविदाओं के लिए ऐसी शर्ते ऱखी थी जो सिर्फ चीनी कंपनियों को
लाभ पहुंचाने के मकसद से ही थी। उन्होने जोर देते हुए कहा कि देश के संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी कंपनियां टेंडर ले रही हैं जो कि सुरक्षा की दृष्टि से बेहद ही खतरनाक है।

उन्होंने तीन कारण गिनाते हुए लोगों से आग्रह किया कि क्यों हमें चीनी समान का बहिष्कार करना चाहिए-

  • चीन का व्यवहार हमारे देश के प्रति कभी ठीक नहीं रहा, चाहे एनएसजी हो या आतंकवाद, चीन ने हमेशा भारत विरोधी ही काम किया है।
  •  देश में चीन के समान आने के कारण युवा बेरोजगार हो रहे है। क्योकि  देश के कुल आयात में से 24 प्रतिशत चीन कर रहा है, जिसके कारण देश में विनिर्माण कम हो रहा है और स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है।  चीन से आयात कम होने पर भारत में उत्पादन बढ़ेगा जिससे नौकरयिों में वृद्धि होगी।
  • चीनी कंपनियों को देश में काम करने का टेंडर देने का मतलब है कि उनके कुछ ऐसे उद्योगों को पुर्नजीवित करना जो वहां मृत हो चुके हैं।

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