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नवाजुद्दीन का सवाल : गोरे लोगों को ही सुंदर क्यों समझा जाता है…

अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने काले रंग के लोगों के प्रति आलोचना की है. उन्होंने उनकी एक फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर के एक कथित बयान के बाद यह बात कही. गौरतलब है कि ‘बाबुमोशाय बंदूकबाज’ के कास्टिंग डायरेक्टर संजय चौहान ने कथित तौर पर कहा था कि नवाजुद्दीन के साथ गोरे लोगों को कास्ट नहीं कर सकते. चौहान ने एक इंटरव्यू में जाहिर तौर पर कहा था कि चित्रांगदा सिंह के फिल्म छोडने के बाद वे ऐसी अभिनेत्री चाहते थे जो सिद्दीकी के सामने ठीक लगे क्योंकि ‘नवाज के साथ आप गोरे और सुंदर लोगों को किरदार नहीं दे सकते हैं. यह बहुत अजीब लगेगा.’

सिद्दीकी किसी का नाम लिए बिना कल ट्वीट कर कहा, ‘मुझे यह अहसास दिलाने के लिए शुक्रिया कि गोरे और सुंदर लोगों के साथ मुझे काम नहीं दिया जा सकता है क्योंकि मैं काला और दिखने में बहुत अच्छा नहीं हूं लेकिन मैंने कभी उस पर ध्यान ही नहीं दिया.’ चौहान ने आज सिद्दीकी के रुप-रंग तक को लेकर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. सिद्दीकी ने गोरे को सुंदर बतायी जाने वाली धारणा की आलोचना की.

सिद्दीकी ने कहा, ‘लोगों की अपनी धारणाएं हैं. अगर कास्टिंग डायरेक्टर को लगता है कि वह मेरे साथ गोरे और सुंदर लोगों को नहीं रख सकते हैं तो यह उनकी समस्या है. मुझे इस बात से मतलब नहीं है कि कोई मेरे रुप-रंग के बारे में क्या सोचता है. लेकिन ऐसी चीजों से मुझे ठेस पहुंचती है.’ ‘ उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल फिल्म उद्योग को दोषी ठहराना गलत होगा क्योंकि पूरे देश में ऐसा होता है.

चौहान  ने कहा, ‘ मेरे बयान को पूरी तरह से गलत तरीके से पेश किया गया. मैंने कहा था कि फिल्म के लिए नवाज जैसे अच्छे अभिनेताओं की आवश्यकता थी. आपको ऐसे अभिनेताओं की जरुरत होती है जो उनके कद की बराबरी करने में सक्षम हों. मुझे ये नहीं मालूम कि ‘फेयर एंड हैंडसम’ कहां से आया लेकिन मैंने ये शब्द नहीं कहे.’

– साक्षी दीक्षित

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