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कैदी से सुपरस्टार बनने का सफरनामा है :कैदी बैंड

डायरेक्‍टर : हबीब फैसल
कास्‍ट : आदर जैन, आन्‍या सिंह, सचिन पिलगांवकर, प्रिंस परविंदर सिंह
प्रोडूसर: आदित्य चोपड़ा

यश राज बैनर की फिल्म “कैदी बैंड”आज रिलीज हो चुकी है और यह फिल्म बॉलीवुड में दो नए एक्‍टर्स साथ ला रही है। आपको बता दें, इस फिल्म से कपूर खानदान का एक और चिराग फिल्‍मों की दुनिया में कदम रख रहा है। आज का शुक्रवार इन दोनों ही सितारों के लिए काफी अहम है। साथ ही इस फिल्म से राज कपूर के नाती आदर जैन भी फिल्‍मों में एंट्री कर रहे हैं। उनके साथ नए एक्‍ट्रेस आन्‍या सिंह भी नजर आने वाली हैं। “कैदी बैंड”की कहानी 5 अंडरट्रायल कैदियों की है जो स्वतंत्रता दिवस पर परफॉर्म करने के लिए एक बैंड बनाते हैं। ये कैदी स्वतंत्रता दिवस के लिए एक खास गाना तैयार करते हैं और वो गाना सोशल मीडिया के माध्यम से खूब लोकप्रिय हो जाता है। इसी के साथ ये कैदी स्टार बन जाते हैं और यहां से शुरू होती है जेल से आजादी तक की इनकी लड़ाई।

फिल्म की कहानी
“कैदी बैंड” की कहानी 5 अंडरट्रायल कैदियों की है जो स्वतंत्रता दिवस पर परफॉर्म करने के लिए एक बैंड बनाते हैं। ये कैदी स्वतंत्रता दिवस के लिए एक खास गाना तैयार करते हैं और वो गाना सोशल मीडिया के माध्यम से खूब लोकप्रिय हो जाता है। इसी के साथ ये कैदी स्टार बन जाते हैं और यहां से शुरू होती है जेल से आजादी तक की इनकी लड़ाई। लेखक और निर्देशक हबीब फैसल की फिल्म “कैदी बैंड” का विषय अच्छा है। यह फिल्म देश के उन कैदियों की बात करती है जो दोषी करार दिए जाने से पहले ही सालों जेल में कैद होते हैं, यानी अंडरट्रायल कैदी। फिल्म के कई सीन दिल को छू जाते हैं। खास तौर से आतंकवाद के आरोप लिए एक बेगुनाह कैदी से हर महीने उसकी बीवी और बेटी जेल में मिलने आती हैं। फिल्म में बेल मिलने की टूटती उम्‍मीद और बेल मिलने पर जमानत की मोटी रकम न दे पाने पर फिर से जेल जाना जैसी कई चीजें दिखाई गई हैं।

परफॉरमेंस

“कैदी बैंड” से आदर जैन डेब्यू कर रहे हैं और उन्होंने अपने किरदार को अच्छे से निभाया है। अन्या सिंह की भी ये पहली फिल्म है और उन्होंने अपने अभिनय की अच्छी छाप छोड़ी है। उनके अभिनय में कैदी का दर्द नजर आता है। सपोर्टिंग कास्ट ने भी अच्छा अभिनय किया है।

फिल्म के अन्य पहलु

“कैदी बैंड” सच्ची घटनाओं से प्रेरित है जो अपने पहले सीन में माचन लाल की कहानी कहती है, जिसका जुर्म अगर साबित होता तो ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 साल की सजा होती। लेकिन वो इंसान 54 साल तक जेल में बंद रहा और 54 साल के बाद वह निर्दोष साबित हुआ।”कैदी बैंड” जेल में कैद कैदियों की छोटी-छोटी आजादी और ख्वाहिशों के बारे में बताती है।

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