You are here
Home > breaking > #MeToo अभियान का हिस्सा बन रहीं हैं लाखों महिलाएं

#MeToo अभियान का हिस्सा बन रहीं हैं लाखों महिलाएं

सोशल मीडिया पर रविवार  15 अक्तूबर से ‘यौन हिंसा के खिलाफ’ शुरू हुए #MeToo अभियान में लगातार महिलाएं जुड़ती जा रही हैं और अपने साथ हुए यौन हिंसा की घटनाओं को बता रही हैं. विश्व भर में अबत तक सोशल मीडिया में लगभग आठ लाख से ज्यादा महिलाएं इस अभियान का हिस्सा बन चुकी हैं. इस अभियान में पुरुष भी शामिल हो रहे हैं और बता रहे हैं कि किस प्रकार जीवन में उनके साथ यौन हिंसा हुई. #MeToo की शुरुआत ट्‌विटर से हुई थी, लेकिन अब इसका प्रसार फेसबुक पर भी हो चुका है.

रविवार को अमेरिका की अभिनेत्री, गायिका और सामाजिक कार्यकर्ता एलिसा मिलानो ने एक ट्वीट किया और महिलाओं के खिलाफ हो रही यौन हिंसा की भयावहता को बताने के लिए लोगों से आग्रह किया कि वे अपने साथ हुई घटना को बताने के लिए  #MeToo के साथ ट्‌वीट करें. उन्हें अपने ट्‌वीट का बहुत अच्छा रिस्पांस मिला और सोमवार सुबह को ही लगभग 30,000 हजार लोग इस अभियान का हिस्सा बन गये. ट्‌वीटर के बाद यह कैंपेन फेसबुक पर भी नजर आने लगा और रविवार से अबतक लगभग आठ लाख से ज्यादा स्त्री-पुरूष इस कैंपेन का हिस्सा बन चुके हैं.

भारत में भी #MeToo अभियान से जुड़ी महिलाएं

#MeToo कैंपेन में हिस्सा लेने के लिए भारतीय महिलाएं भी सामने आयीं हैं और ध्यान देने वाली बात यह है कि मध्यम वर्गीय महिलाएं भी इस अभियान का हिस्सा बन रही हैं. अबतक यह होता आया है कि भारतीय मध्यम वर्ग की महिलाएं यौन हिंसा के मुद्दे पर चुप रहती हैं, लेकिन उन्होंने सामने आकर बताया है. कल वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ की बेटी मल्लिका दुआ ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर बताया किस तरह वह यौन हिंसा की शिकार हुई. मल्लिका ने बताया कि उसकी मां कार चला रही थी और उसका हाथ उसके स्कर्ट में हर जगह को टच कर रहा था, उस वक्त वह सात साल की थी, उसकी बड़ी बहन जो 11 साल की थी, वह भी साथ में बैठी थी. वह इंसान एक हाथ मेरे स्कर्ट के अंदर रखा था और दूसरी हाथ मेरी बहन के पीठ पर रखा हुआ था. लेकिन मेरे पिता ने उस रात उसका मुंह तोड़ दिया क्योंकि उन्होंने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया था. #MeToo अभियान में लाखों लोग शामिल हुए हैं, जो इस बात का सूचक है कि किस तरह हमारे समाज में महिलाओं को यौन हिंसा का शिकार होना पड़ता है.

 सर्वे में दिल्ली को बताया गया महिलाओं के लिए असुरक्षित 

थॉमसन रायटर्स फाउंडेशन का एक सर्वे भी आया था, जिसमें भारत की राजधानी दिल्ली को महिलाओं के लिए असुरक्षित शहर माना गया. सर्वे में बताया गया कि महिलाएं यहां डरी रहती हैं और उन्हें आशंका रहती है कि कभी भी उनके साथ रेप हो सकता है. विश्व के 19 बड़े शहरों में कराये गये सर्वे में असुरक्षित शहरों की लिस्ट में दिल्ली चौथे नंबर पर है.

Leave a Reply

Top