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एमसीडी चुनाव 2017: ‘आप’ पर दोतरफा मार, डूबेगी या लगेगी नइया पार ?

दिल्ली में अप्रैल के महीने में एमसीडी (दिल्ली की नगर पालिकाएं) के चुनाव हैं. राज्य में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) के साथ ही विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के लिए भी ये चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न हैं. ऐसे में, गुरुवार को सामने आए दो घटनाक्रम या कहें कि फैसले दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल के लिए मुश्किल बनते दिख रहे हैं.

इनमें पहला तो यह कि राज्य के सतर्कता विभाग के कहने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आप सरकार की एक कथित ‘जासूसी इकाई’ के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. दूसरे मामले में उपराज्यपाल अनिल बैजल ने आप से 97 करोड़ रुपए वसूलने का आदेश दिया है.

आपको बता दें कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने एक ‘जासूसी इकाई’ का गठन किया है. इसे नाम दिया गया है ‘फीडबैक यूनिट.’ यह इकाई सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करती है और उन्हीं की देखरेख में काम करती है. सूत्र बताते हैं कि इस टीम में आईबी (खुफिया ब्यूरो), राॅ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग), आयकर विभाग और कुछ अन्य जांच एजेंसियों के रिटायर्ड अफसरों को शामिल किया गया है. इस इकाई के लिए सरकार ने एक करोड़ रुपए का कोष भी बनाया है. राज्य के विभागों में भ्रष्टाचार का पता लगाकर पुख्ता प्रमाण के साथ उसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का काम इस इकाई को सौंपा गया है.

यहां तक तो सब ठीक था. लेकिन जिस सतर्कता विभाग के तहत इस ‘फीडबैक यूनिट’ का गठन हुआ, उसी ने इसके कामकाज पर संदेह जताते हुए सीबीआई को शिकायत कर दी है. इसमें बताया है कि यूनिट के किसी कैलाश चंद नाम के व्यक्ति को 50,000 रुपए आवंटित किए गए. इन्होंने अलकनंदा इलाके में स्थित कालका पब्लिक स्कूल में रिश्वत के मामले का खुलासा करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन करने पर यह रकम खर्च की. सरकार ने कैलाश चंद को एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक शाखा) में यूडीसी (उच्च श्रेणी क्लर्क) बताया है. जबकि सतर्कता विभाग के ही मुताबिक एसीबी में इस नाम का कोई कर्मचारी ही नहीं है.

यही नहीं, सतर्कता विभाग ने बताया है कि फीडबैक यूनिट के लोगों को सरकार ने एक कार, दो एसयूवी और तीन मोटरसाइकिलें भी उपलब्ध कराईं. साथ ही कामकाज में मदद के लिए चार डाटा एंट्री ऑपरेटर भी उनके लिए नियुक्त किए. फीडबैक यूनिट के स्टाफ के सदस्यों को उनकी उपस्थिति के आधार पर मानदेय देने का प्रावधान किया गया. और दिलचस्प यह कि इस इकाई के हर सदस्य ने अब तक अपनी 100 फीसदी उपस्थिति दर्ज कराई. लिहाजा, उनके मानदेय पर सरकार ने फरवरी 2016 से अब तक 40,82,982 रुपए खर्च कर दिए. जबकि सतर्कता विभाग को ही पता नहीं कि ये लोग कहां बैठते हैं. कब-क्या काम करते हैं. सतर्कता विभाग से ये जानकारियां मिलने के बाद सीबीआई ने आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

दूसरी तरफ, उपराज्यपाल अनिल बैजल के हालिया आदेश ने केजरीवाल सरकार को दूसरा झटका दिया है. बैजल ने सरकारी विज्ञापनों से जुड़े मामले की जांच करने वाली एक समिति की रिपोर्ट के बाद आप से 97 करोड़ रुपए वसूलने का आदेश दिया है. समिति ने कहा है कि दिल्ली में सरकारी विज्ञापनों के जरिए ‘आप’ को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है. इसके बाद बैजल ने मुख्य सचिव एमएम कुट्टी से कहा है कि 30 दिन के अंदर सत्ताधारी पार्टी से यह रकम वसूल की जाए.

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