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माथेरान: प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग- सीमा फैज़ी

।सीमा फैज़ी ।

पेशे से पत्रकार सीमा फैज़ी पिछले 14 साल से सहारा मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं, स्वभाव से घुमक्कड़ सीमा को घूमना घूमाना …नए लोगों से मिलना, नई जगहों को जानना और समझना पसंद है। फिलहाल आप मुंबई में रहती हैं। 

प्रकृति से अगर है आपको प्यार तो मुंबई से दो घंटे की दूरी तय कर ज़रूर जाए माथेरान. मानसून में माथेरन का कोई मुकाबला नहीं. बारिश के दिनों में यहां प्रकृति अपना ऐसा जादू बिखेरती है कि देखने वालों की आंखे हैरान रह जाती है और दिल खुशी से भर जाता है

मुंबई से सिर्फ 90 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले में मौजूद है भारत का छोटा सा हिल स्टेशन – माथेरान। करजत तहसील के अंदर आने वाला यह प्राकृतिक खूबसूरती से भरा मनमोहक छोटा हिल सा स्टेशन है। महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट पर्वत शृंखला में समुद्र तल से 800 मीटर (20625 फीट) की उँचाई पर बसे इस हिल स्टेशन को 2003 में भारत सरकार ने ईको सेंसेटिव ज़ोन घोषित किया था। इसलिए यहां किसी भी तरह के वाहन नहीं ले जाए जा सकते। प्रदूषण मुक्त यहां का वातावरण मन को शांति प्रदान करता है. शहर की प्रदूषण से बचने और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून के कुछ पल बिताने के लिये माथेरान बिल्कुल उपयुक्त जगह है।

माथेरन की खोज मई 1850 में ठाणे जिले के कलेक्टर ह्यूज पोयन्ट्‌स मलेट ने की थी। मुंबई के तत्कालीन गवर्नर लॉर्ड एल्फिंस्टोन ने यहां भविष्य के हिल स्टेशन की नींव रखी और गर्मी के दिनों में वक्त गुजारने की दृष्टि से इसे विकसित किया गया। 5000 की आबादी वाला 20 वर्ग किलोमीटर में फैला ये कस्बा वर्षा ऋतृ में स्वर्ग बन जाता है। बारिश की बूंदो से जमीन जी उठती है और उसकी ये खुशी हरियाली की सूरत में नज़र आती है….पहाड़ हरे हो जाते है… पहड़ों पर होने वाली बारिश जमीन पर उतरते ही झरनों की शक्ल ले लेती हैं…हवाएं इन झरनों से ऐसा खेल खेलती है कि पानी जमीन की जगह आकाश की और मुड़ जाता है….. उस समय घाटियों में फैला कोहरा, हवा में तैरते बादल और भीगा-भीगा मौसम एक अलग ही समां पैदा करते हैं। माथेरान में प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने के लिए 36 व्यू पॉइंट्‌स हैं (हनीमून पॉइंट एलेक्जेंडर पॉइंट, रामबाग पॉइंट, लिटिल चौक पॉइंट, चौक पॉइंट, वन ट्री हिल पॉइंट, ओलंपिया रेसकोर्स, लॉर्डस पॉइंट, सेसिल पॉइंट, पनोरमा पॉइंट) जहां से वादियों में दूर तक फैली सुंदरता को आंखों में बसाया जा सकता है। इसके अलावा माउंट बेरी और शारलॉट लेक भी यहां के मुख्य आकर्षण हैं. माउंट बेरी से नेरल से आती हुई ट्रेन का दृश्य देखा जा सकता है। हरियाली के बीच से धीमे धीमे घुमावदार रास्तों से आती ट्रेन का दृश्य आपको अभिभूत कर देगा (मानसून के सीज़न में ये ट्रेन बंद कर दी जाती है). इसके अलावा शारलॉट लेक यहां के सबसे खूबसूरत स्थानों में से एक है। लेक के दायीं ओर पीसरनाथ का प्राचीन मंदिर है। कहा जाता है कि यहां मांगे जाने वाली हर मुराद पूरी होती है. वहीं बायीं और दो पिकनिक स्पॉट लुईस पॉइंट और इको पॉइंट हैं.

माथेरान पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है नेरल स्टेशन। जो माथेरन से करीब 8 किलोमीटर दूर है। इसके आगे वाहनों का प्रवेश वर्जित है। आगे जाने के लिए या तो पैदल जाना होगा, या  रिक्शे और घोड़ों का प्रयोग करना होगा। मुंबई से माथेरन आप अपनी गाड़ी या टैक्सी से भी जा सकता है इसमें करीब 3 से साढे तीन घंटे लगेंगे लेकिन अगर आप धुमक्कड है और कम पैसे में घुमना पसंद करते है तो मुंबई के किसी भी स्टेशन से करजत जाने वाली लोकल पकड़ ले इसका किराया 250 रुपये तक पड़ेगा. लोकल ट्रेन से आप नरेल स्टेशन पर उतरे ….ये सफर करीब एक से डेढ घटे का होगा इससे आगे आप चाहे तो टेक्सी कर ले जिसका किराया 400 रुपये पड़ेगा और अगर आप शेयरिंग टेक्सी में जाते है तो एक व्यक्ति को 80 रुपये देना होगा। माथेरान में प्रवेश करते ही यहां का वातावरण और शुद्ध हवा मन को ताजगी और स्फूर्ति से भर देती है.

इस छोटे से हरे-भरे कस्बे में साल भर पर्यटकों का तांता लगा रहता है। लेकिन यहां आने का सबसे अच्छा मौसम मानसून है। सर्दी और गर्मी में आपको हवा पानी और हरियाली का विहंग्म दृष्य देखने को नहीं मिलेगा। (जिससे आपको प्रकृति की ताकत और उसकी खूबसूरती का एहसास हो जाएगा. ये गैर जरूरी है)

तो बारिश की चिंता किये बिना चले आए माथेरन. भीगे भीगे मौसम में आपका दिल दिमाग और आत्मा अनोखी खुशी और स्फूर्ति से भर जाएगा.

 

सभी चित्र-सीमा फैज़ी

 

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