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बेटी मरियम की गलती ने छीना नवाज शरीफ की कुर्सी

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने पनामा केस में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दोषी ठहराया है। पांच जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि उनके खिलाफ इस मामले में मुकदमा चलाया जाना चाहिए। फैसले के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया गया और शरीफ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस तरह पाकिस्तान के सामने सियासी संकट पैदा हो गया है। शरीफ के परिवार के विदेश में संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जेआईटी का गठन किया था, जिसने बीती 10 तारीख को अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी। गौरतलब है कि 2013 में अमेरिका स्थित इंटरनैशनल कन्सॉर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) नामक एक एनजीओ ने पनामा के मोजैक फोंसेका नामक कानूनी फर्म के कई पेपर्स का खुलासा किया था।

कहा जाता है कि ये दस्तावेज उसे किसी अज्ञात सूत्र ने उपलब्ध कराए थे। इनमें उन लोगों के नाम हैं, जिन्होंने अपनी अरबों की संपत्ति गैरकानूनी रूप से छुपा कर रखी है। इनके मुताबिक अलग-अलग देशों की बड़ी हस्तियों ने अपनी अरबों की संपत्ति का ऐसी जगहों पर निवेश किया, जहां टैक्स का कोई चक्कर नहीं है। पनामा पेपर्स में भारत के 500 लोग भी शामिल हैं, जिनमें से 300 नामों का खुलासा हो चुका है। इन पेपर्स से पता चला है कि नवाज शरीफ के बेटों हुसैन और हसन के अलावा बेटी मरियम नवाज ने टैक्स हैवन माने जाने वाले ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में कम से कम चार कंपनियां शुरू कीं, जिनके जरिए उन्होंने लंदन में छह बड़ी प्रॉपर्टीज खरीदीं। शरीफ के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गईं जिनमें एक पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान खान की भी है। नवाज के खिलाफ फैसला आते ही उनका सियासी भविष्य अधर में लटक गया है। अब शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) को नया नेता चुनना होगा। शरीफ के छोटे भाई और पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ को पीएम बनाया जा सकता है, हालांकि दिक्कत यह है कि वह नैशनल असेंबली के सदस्य नहीं हैं। जब तक वह इसके सदस्य नहीं बन जाते तब तक किसी और को बिठाना पड़ेगा।

यह एक जोखिम है, जिससे उनके परिवार से सत्ता छिन भी सकती है। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी पीपीपी भी मजबूत स्थिति में नहीं है। पाकिस्तान में जब-जब ऐसी स्थिति आती है, सेना के सत्ता पर काबिज होने की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि कुछ लोग इससे यह कहकर इनकार करते हैं कि सेना प्रमुख कमर बाजवा से नवाज के अच्छे संबंध हैं। जो भी हो, भारत को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। राजनीतिक अनिश्चितता का लाभ उठाकर भारत विरोधी ताकतें पहले से भी ज्यादा सक्रिय हो सकती हैं।

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