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अपना बीमारी भूल समाज के रोगोपचार में लगे रहे महावीर जी : कृष्णगोपाल

संसार ने अभी तक लोक कल्याण के लिए अस्थियों का दान करने वाले महर्षि दधीचि के बारे केवल शास्त्रों में पढ़ा परंतु हमने अपने वरिष्ठतम साथी महावीर जी के रूप में उस प्रात: स्मरणीय महान आत्मा के साक्षात् दर्शन भी किए हैं। उन्होंने खुद कष्ट सहे पर समाज व संगठन को अपना श्रेष्ठ दिया, अपनी बीमारी भुला कर समाज के रोगों का उपचार करते रहे। महावीर जी चाहे आज हमारे बीच नहीं रहे परंतु सेवा व कर्तव्यपालन के रूप में जो उन्होंने मीलस्तंभ स्थापित किए हैं वह सदैव जनकल्याण के मार्ग के यात्रियों का मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे।


यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह श्री कृष्णगोपाल ने यहां के सर्वहितकारी विद्या मंदिर में संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य महावीर जी की आत्मिक शांति के लिए आयोजित श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उनका 24 अक्तूबर को चंडीगढ़ में देहावसान हो गया था। दिवंगत आत्मा को शब्दांजलि अर्पित करते हुए संघ अधिकारी श्री कृष्णगोपाल ने कहा कि महावीर जी गंभीर बीमारी से पीडित थे परंतु उन्होंने इसका किसी से जिक्र तक नहीं किया। वे शायद नहीं चाहते थे कि संघ की श्रमशक्ति या संसाधन उनके निजी जीवन पर लगे और इसी के चलते अपनी बीमारी को भुला कर समाज का उपचार करते रहे और एक दिन चलते-चलते बिना कुछ कहे हमसे विदा ले गए। उन्होंने कहा कि महावीर जी का जीवन संत के समान केवल और केवल समाज के लिए ही समर्पित था। वे परिश्रमी एवं उच्च जीवन के धनी थे। उनका चिंतन था कि व्यक्ति अनुशासित दिनचर्या से समय का उचित प्रबंधन कर समय को बाँध सकता है। उन्होंने हिमाचल में संघ कार्य को प्रदेश के दूरस्थ स्थानों तक आपने परिश्रम पूर्वक पहुँचाया।

वे मंडी व शिमला में जिला प्रचारक, कांगड़ा के विभाग प्रचारक और फिर हिमगिरि प्रान्त (हिमाचल व जम्मू-कश्मीर) के सह-प्रान्त प्रचारक रहे। इसके बाद आपने पंजाब के प्रांत प्रचारक, उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख, अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख के नाते दायित्व निभाया। जब वो पंजाब के प्रांत प्रचारक थे,उस समय अमृतसर में 119 बस्तियां थी और उनका आग्रह था के इन 119 बस्तियों में शाखा को पहुंचाना है। वो अपनी धुन के इतने पक्के थे के उन्होंने यह संख्या 100 से ऊपर पहुंचा के ही दम लिया।


श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद् के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री दिनेश जी ने बताया कि उन्होंने पूर्वोत्तर में समाज को जागृत किया। वहां विकट व विरोधी परिस्थितियों में भी संघ कार्य को आगे बढ़ाया। देश की मुख्यधारा से दूर हो रही कई जनजातियों में उन्होंने राष्ट्रभाव का संचार किया।
इस अवसर पर संत मनमोहन जी, स्वामी सूर्यदेव जी, संघ के उत्तर क्षेत्र के प्रचारक प्रमुख श्री रामेश्वर दास, उत्तर क्षेत्र प्रचारक श्री बनवीर सिंह, पंजाब प्रांत प्रचारक श्री प्रमोद कुमार, केंद्रीय राज्यमंत्री श्री विजय सांपला, राज्यसभा सदस्य श्री श्वेत मालिक,पूर्व मंत्री अनिल जोशी सहित भारी संख्या में विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक, राजनीतिक, धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों ने महावीर जी का स्मरण किया। संघ की मानसा इकाई की जिला कार्यकारिणी के सदस्य श्री रामप्रकाश व स्वर्गीय महावीर के भाई एडवोकेट सूरज छाबड़ा ने महावीर जी को देश में मानसा की पहचान बताया और सभी आए हुए गणमान्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

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