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अमृत योग है महाकुंभ-17 अक्तूबर को होगा ध्वजारोहण

सिमरिया महाकुंभ-2017
ध्वजारोहण 17 अक्टूबर

अमृत योग है महाकुंभ


शरद पूर्णिमा की रात चांद से अमृत वर्षा होती है यह बात अब रहस्य नहीं है. आस्था से आगे विज्ञान के सहारे समझने वालों के लिए भी तथ्य प्रर्याप्त हैं, उपलब्ध हैं. ठीक कुछ यही होता है कुंभ योग में. कम लोगों को पता है कि कुंभ दरअसल ज्योतष में एक योग है. आकाश में यानी गोचर में जब सूर्य, चंद्रमा और वृहस्पति एक ही राशि में आते हैं तो कुंभ योग बनता है. शरद पूर्णिमा की रात के चांद से ज्यादा अमृत तत्व इस योग में उत्पन्न होता है.

रुद्रयामल तंत्र में विवरण

इसका पूर्ण विवरण आगम के प्रमुख शास्त्र रुद्रयामल तंत्र के रुद्रयामलोक्ताअमृतीकरणप्रयोग अध्याय में दिया है. मानते हैं इस विशेष काल में जल को मंत्र प्रयोग से शोधित करें तो अमृत सा प्रभाव पैदा होता है. एक अर्थ में इसे ही समुद्र मंथन और फिर अमृत का प्रकट होना मानते हैं. यही कारण है कि कुंभ नदियों और सागर के किनारे जहां अथाह जलराशि हो वहां मनाने का विधान रहा.

नवग्रह के प्रभाव में हैं हम

हमें यह समझ लेना चाहिए कि संपूर्ण पृथ्वी नवग्रहों के प्रभाव में पलती है. हमारे चिंतन-विचार, रूप-रंग, हाव-भाव, कद-काठी से लेकर उन्नति-अवनति और जीवन-मरण सब इन्हीं ग्रहों के हाथ में है. हमने अपनी संस्कृति में इन्हें देवता बना कर पूजा. उनकी गति को समझा, उससे तालमेल बिठाया और असर यह रहा कि जीवन सुखमय और शांतिपूर्ण था. उससे ऊपर बात यह कि प्रकृति मां है सभी बच्चों के लिए बराबर लेकिन जो बच्चा ज्यादा नजदीक रहता है स्वाभाविक रूप से उसे अधिक प्यार मिलता है.

17 अक्टूबर से सिमरिया में तुलार्क कुंभ

17 अक्टूबर को एक ऐसा ही योग है. यह तुलार्क कुंभ है. सूर्य चंद्रमा और वृहस्पति तुला राशि में आ रहे हैं. गति के हिसाब से वृहस्पति एक राशि में एक वर्ष रहते हैं और इनका क्रम फिर से 12 वर्ष बाद आता है, सूर्य हर राशि में एक-एक महीना रहते हैं और चंद्रमा एक राशि में ढाई दिन. अर्थात 17 अक्टूबर से तीनों तुला राशि में रहेंगे. ऐसी स्थिति का अलग-अलग राशि के लोगों पर तो असर पड़ता ही है जलराशि पर समवेत असर पड़ता है. हमारे ऋषि मुनियों ने इस प्रभाव को समझते हुए ही नदियों और सागर के किनारे हर संक्राति में कुंभ का विधान रचा था.

आदि कुंभस्थली है सिमरियाधाम

17 अक्टूबर से बिहार के मिथिलांचल में स्थित सिमरियाधाम में तुलार्क कुंभ लग रहा है. यह स्थान आदि कुंभस्थली के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि ऐतिहासिक समुद्र मंथन इसी क्षेत्र में हुआ. यही वह स्थान भी है जहां मंथन से निकले अमृत का वितरण किया गया.

कल्पवास को मानते हैं कुंभ का अवशेष

कल्पवास को कुंभ का अवशेष मानते हैं और सिमरिया में लगने वाला कल्पवास अनंत काल से श्रेष्ठ रहा है. अन्यान्य अनेक कारणों से भी यह स्थान देश के प्रमुख तीर्थस्थलियों में गिना जाता है. 17 अक्टूबर से शुरू होने वाले सिमरिया महाकुंभ में 19 अक्टूबर 29 अक्टूबर और 8 नवंबर को पर्व स्नान या शाही स्नान है. महाकुंभ का समापन 16 नवंबर को होगा.

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